कुंभ राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

  •  अनीष व्यास
  •  दिसंबर 29, 2020   14:30
  • Like
कुंभ राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

कुंभ राशि वाले बिजनेसमैन जातकों और नौकरी पेशा लोगों के लिए वर्ष 2021 थोड़ा प्रतिकूल रहेगा। आपको अपने कॅरियर में लाभ प्राप्त करने के लिए अधिक मेहनत और निरंतर प्रयास करने होंगे। ऐसे में इस समय कोई भी नया बिजनेस शुरू करने से बचें।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष पर आधारित भविष्यफल पढ़ने के बाद आप साल 2021 में होने वाली सभी प्रकार के घटना-दुर्घटना से पूर्व में ही परिचित हो जाएंगे और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप नए वर्ष की पूरी योजना बनाने में सफल रहेंगे। यह भविष्यवाणी चन्द्र राशि, लग्न तथा वैदिक ज्योतिष के आधार पर किया गया है। इस वार्षिक राशिफल को छह अलग-अलग विषयों में बाँटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें कॅरियर, आर्थिक स्थिति, परिवार, प्रेम-रोमांस, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल है।

आइये विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानते है कि नववर्ष 2021 में कुंभ राशि का राशिफल कैसा रहेगा।

इसे भी पढ़ें: मकर राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि साल 2021 में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और आपको मिलजुले परिणामों की प्राप्ति होगी। बिजनेस करने वाले जातकों को कार्यक्षेत्र के संबंध में किसी यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा। साल 2021 में नौकरी में ट्रांसफर के योग भी बन रहे हैं। आर्थिक जीवन में अचानक से खर्च में बढ़ोत्तरी नजर आएगी, जिसके चलते कुछ समय के लिए आर्थिक तंगी महसूस होगी। अपनी मेहनत अनुसार फल की प्राप्ति होगी। इसलिए मेहनत पर विश्वास करना अधिक उचित रहेगा| विद्यार्थियों को इस साल अधिक मेहनत करनी होगी। हालांकि अपने देश में शिक्षा प्राप्त करने वालों की इच्छा पूरी हो सकती है। वर्ष 2021 में आपको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा क्योंकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आपको कष्ट दे सकती हैं। साल 2021 में बहुत सी यात्राएं होंगी जिनमें से कुछ में आपको मन के अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे। हालांकि आपकी आय अच्छी रहेगी लेकिन अधिक ख़र्चों की वजह से आर्थिक समस्या पैदा हो सकती है। विदेश जाने के इच्छुक लोगों की इच्छा साल 2021 में पूरी हो सकती है। आपका पारिवारिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। दांपत्य जीवन में भी मिश्रित रहेगा। जीवनसाथी से सहयोग बनाए रखें। 

कॅरियर 

कुंभ राशि वाले बिजनेसमैन जातकों और नौकरी पेशा लोगों के लिए वर्ष 2021 थोड़ा प्रतिकूल रहेगा। आपको अपने कॅरियर में लाभ प्राप्त करने के लिए अधिक मेहनत और निरंतर प्रयास करने होंगे। ऐसे में इस समय कोई भी नया बिजनेस शुरू करने से बचें। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि आपके कॅरियर के भाव के स्वामी मंगल है, जो अपने स्वंय के तीसरे भाव में मौजूद है। साथ ही वृश्चिक राशि में शुक्र और केतु की युति दशम भाव में होने से, वर्ष 2021 में आपको कुछ संघर्ष करना पड़ सकता है। जो जातक पहले से नौकरी कर रहे है, उन्हें इच्छानुसार शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। परंतु यदि आप किसी नई नौकरी से जुड़े है तो, आपको इस समय थोड़ी अधिक मेहनत करनी होगी। मध्य वर्ष उन जातकों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगा, जो सरकारी नौकरी की तैयारी करना चाहते हैं। 

आर्थिक स्थिति

कुंभ राशि के जातकों के आर्थिक जीवन के लिए यह वर्ष अनुकूल नहीं रहेगा। क्योंकि धन के स्वामी गुरु बृहस्पति, इस दौरान आपके द्वादश भाव में होंगे। इसलिए, आर्थिक स्थितियों में सुधार के लिए आपकी निर्भरता, भाग्य के बजाय आपकी कड़ी मेहनत पर अधिक होगी। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि धन प्राप्ति के अवसर इस दौरान सबसे अधिक बाधित होंगे, जिसके कारण आप अपना धन संचय करने में पूरी तरह असफल सिद्ध होंगे। वर्ष 2021 आपको सबसे अधिक निवेश से जुड़े मामलों से सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। ऐसे में जोखिम भरे किसी भी बिजनेस में धन का निवेश न करें। क्योंकि इस साल आपको अचानक से नुकसान होने के योग बनते दिखाई दे रहे हैं। आपके ख़र्चों के स्वामी शनि इस दौरान गुरु बृहस्पति के साथ आपके द्वादश भाव में युति करेंगे। ऐसे में आपको इस साल किसी भी कार्य में अपने प्रयास, ऊर्जा और समय लगाने से पहले, उसके बारे में ठीक से सोच-विचार करने की ज़रूरत होगी।

इसे भी पढ़ें: धनु राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

परिवार 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वर्ष 2021 में पारिवारिक जीवन में आपको मिले-जुले परिणाम देगा। राहु इस वर्ष आपके चतुर्थ भाव में उपस्थित होंगे, जिसके कारण आपको काम के चलते अपने घर से दूर जाना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप, आप अपने परिवार को पर्याप्त समय देने में असमर्थ होंगे, और इससे कुछ मतभेद भी पैदा होने की आशंका है। फरवरी के महीने में शुक्र देव का गोचर, आपको महिलाओं के साथ अपने संबंध अच्छे करने के कई अवसर देगा। जिससे आप अपने परिवार की महिलाओं के साथ, अपने मजबूत और अच्छे संबंध विकसित कर सकेंगे। अप्रैल के महीने में मेष राशि में बुध का होने वाला गोचर, आपके और भाई-बहनों के संबंधों में कुछ तनाव उत्पन्न करने का मुख्य कारण बनेगा। इसके साथ ही चौथे भाव में मंगल देव का गोचर, आपकी मां के लिए तनाव और चिंता का कारण बन सकता है। ऐसे में आपको इस दौरान अपने व्यवहार में सुधार करने की ज़रूरत होगी। जो लोग काफी समय से अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चिंतित थे, उनके लिए साल का यह समय भावनात्मक रूप से आपके रिश्ते को मजबूती देगा।

प्रेम-रोमांस 

कुंभ राशि के जातकों को प्रेम संबंधों में अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि आपके प्रेम और रोमांस के भाव के स्वामी, वर्ष की शुरुआत में ही लाभ और आय के भाव में मौजूद होंगे। जिसके कारण कुंभ राशि के प्रेमी जातकों को, इस समय अपने रिश्ते के प्रति अधिक गंभीर और प्रतिबद्ध होने में मदद मिलेगी। भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इसके साथ ही कुंभ राशि में गुरु बृहस्पति का गोचर, उनके प्रेम जीवन में सकारात्मक परिणाम लाएगा। क्योंकि इस दौरान गुरु बृहस्पति की दृष्टि आपके पंचम भाव पर होगी। वो प्रेमी जातक जो लंबे समय से अपने रिश्ते के प्रति प्रतिबद्ध हैं, उन्हें इस वर्ष प्रेमी संग विवाह के बंधन में बंधने के अवसर मिलेंगे। इस दौरान आपको मन ही मन ज्यादा सोचने की जगह, अपने प्रेमी से संवाद करने की ज़रूरत होगी, तभी आप अपने रिश्ते में शांत वातावरण सुनिश्चित कर सकेंगे। इसके साथ ही अपने प्रेम संबंधों में हर तरह की ग़लतफहमी और नकारात्मकता को भी दूर करने की कोशिश करना, इस समय आपके लिए उचित रहेगा।

शिक्षा

आपके शिक्षा के स्वामी बुध इस वर्ष आपकी राशि के एकादश भाव में सूर्य के साथ युति करते हुए, आपकी राशि में "बुधादित्य योग" का निर्माण करेंगे। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि जिसके परिणामस्वरूप, वर्ष 2021 निश्चित रूप से कुम्भ राशि के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में बहुत लाभ देगा। प्रतियोगी परीक्षाओं या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को, राशि के छठे भाव पर शनि और गुरु बृहस्पति की सीधी दृष्टि, उन्हें शुभ फल देने का कार्य करेगी। इसके बाद जब शनि देव आपके नवम भाव को दृष्टि करेंगे, तब विदेश जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने का सोच रहे छात्रों को, लाभ मिलने की संभावना बन सकेगी। इस वर्ष जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीने आपके लिए काफी फ़ायदेमंद रहेंगे। वो जातक जो अभी तक बेरोज़गार हैं, उन्हें इस दौरान रोज़गार के शुभ अवसर मिलने की संभावना है।

इसे भी पढ़ें: वृश्चिक राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

स्वास्थ्य 

वर्ष 2021 आपकी सेहत के लिए थोड़ा प्रतिकूल रहेगा। क्योंकि आपके द्वादश भाव में गुरु बृहस्पति और शनि का गोचर, आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दे सकता है। भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस कारण कुछ शारीरिक परेशानियों, जैसे: पैरों में दर्द, गैस, एसिडिटी, जोड़ों का दर्द, अपच, सर्दी, खांसी, आदि से भी आपको दो-चार होना पड़ सकता हैं। यदि आप पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो आपके लिए यह समय अधिक तनावपूर्ण सिद्ध होगा। कुछ जातक इस पूरे ही वर्ष तंत्रिका या पाचन समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं। परंतु यह परेशानी भी गंभीर या लंबे समय के लिए, आपके जीवन को प्रभावित नहीं करेंगी। ऐसे में आपको इस पूरे ही वर्ष, अधिक मसालेदार भोजन का परहेज करने की हिदायत दी जाती है। यूँ तो इस वर्ष कई विभिन्न ग्रहों का गोचर आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा, लेकिन मंगल देव आपको इस वर्ष उन सभी से सफलतापूर्वक लड़ने में मदद करेंगे।

ज्योतिष उपाय

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि गाय को रोटी खिलाएँ व हर शनिवार पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाएं। मंगलवार के दिन हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार के दिन चींटियों को आटा खिलाएँ।

अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक







पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 20, 2021   13:47
  • Like
पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

प्राचीन समय से ही पेड़ पौधों की पूजा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है और आज भी हम किसी न किसी रूप में पेड़ पौधे की पूजा अवश्य ही करते हैं। वह चाहे पीपल हो, तुलसी हो, समी हो या फिर बरगद का ही पेड़ क्यों ना हो, हमारे लिए काफी महत्त्व रखते हैं। 

इसे भी पढ़ें: सेक्युलरिज्म की अलंबदार ममता बनीं सरस्वती पूजा की सबसे बड़ी पैरोकार

हमारे शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि हर मनुष्य को अपने जीवन काल में एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। इतना ही नहीं, शास्त्र यह भी कहते हैं कि अगर किसी कारण वश कोई मनुष्य एक पेड़ काटता है, तो उसे 10 पेड़ लगाकर उनका पालन करने के उपरांत ही एक पेड़ काटने के पाप से मुक्ति मिल पाएगी। ऐसे में पेड़ लगाने की महत्ता कितनी है, इसे आप सहज ही समझ सकते हैं। 

अगर आप भी पेड़ लगाने का विचार अपने मन में ला रहे हैं, तो वास्तु में इसके कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करते हुए अगर वृक्षारोपण किया जाए, तो इसका सकारात्मक असर हमारे जीवन में देखने को मिलता है।

आईये जानते हैं ...

पेड़ लगाने का सही समय

वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप पेड़ लगाने जा रहे हैं या बगीचे का निर्माण करने जा रहे हैं, तो इसके लिए आपको कुछ विशेष नक्षत्रों का इंतजार करना होगा। जिनमें स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र को सबसे सर्वोत्तम बताया गया है। अगर आप इन नक्षत्रों में पेड़ लगाते हैं तो यह पेड़ आपके जीवन में खुशहाली लेकर आएंगे।

पेड़ लगाते समय दिशा का ध्यान

अगर आप वृक्षारोपण करने जा रहे हैं, तो आपको यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि वह वृक्ष सही दिशा में लगें। अगर आपके घर में बगीचे के लिए जगह छोड़ी जा रही है, तो आप को ध्यान रखना चाहिए कि वह जगह वाम पार्श्व होना चाहिए। नेत्रत्व या अग्नि कोण में बगीचे का निर्माण करना अशुभ बताया जाता है और कहा जाता है कि इसका दुष्प्रभाव पूरे घर के ऊपर पड़ता है।

इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि घर के पूर्व दिशा में कभी भी बड़े और विशाल पेड़ पौधों को नहीं लगाना चाहिए। अगर भूलवश आपसे ऐसा हो गया है तो इस भूल के दुष्परिणाम को कम करने के लिए आपको घर के उत्तर दिशा में आंवला, हरश्रृंगार, तुलसी और अमलतास के पौधों का रोपण करना चाहिए।

वृक्ष फल नहीं दे रहे हों तो करें यह उपाय

अगर आपके घर के आस-पास फलदार वृक्ष लगे हुए हैं और वह फल नहीं दे रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार इन पौधों या पेड़ों की जड़ों में मूंग, उड़द, कुलथी, तिल और जौ मिलाकर पानी तैयार करना चाहिए और इस पानी को वृक्षों की जड़ों में डालना चाहिए।

जमीन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए

जिस जमीन पर आपका आवास बना हुआ है, उस पर यदि कोई दोष है, तो इस दोष को दूर करने के लिए आपको 'आंवले' का पौधा अपने आवास के आसपास ज़रूर लगाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहा जाता है, इस पर्व में ऋषियों का ओजस्वी तत्व निहित है

चंद्रमा की पीड़ा को दूर करने के लिए

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए

माता लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी रहे, इसके लिए आपको अपने घर के पास बेल यानी कि बिल्व का पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। कहा जाता है कि बेल के पेड़ पर माता लक्ष्मी का निवास होता है और घर के आस-पास इस पेड़ को अगर लगाया जाए, तो माँ लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहती हैं।

 घर के आसपास इन पेड़ - पौधों को लगाने से बचें

- अगर आपके घर के आसपास केला, बेर और बाँझ अनार के वृक्ष हों तो आपके ऊपर इनका नकारात्मक असर पड़ता है। कहा जाता है कि इन तीनों वृक्षों की वजह से आपकी संतान के ऊपर हमेशा कष्ट बना रहता है।

- इसके अलावा कैक्टस के पौधों को भी कभी भी अपने आवासीय परिसर में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से आप हमेशा शत्रु बाधा से गिरे रह सकते हैं और आपके ऊपर धन हानि का योग भी बना रहेगा।

- अपने आवासीय परिसर में कभी भी कंचन, पलाश, अर्जुन के पेड़ नहीं लगाने चाहिए। इन पेड़ों से नकारात्मक शक्ति निकलती है और यह अशांति के कारक होते हैं।

इसे भी पढ़ें: मां वीणा वादिनी का अवतरण दिवस है वसंत पंचमी

हालाँकि पेड़ -पौधे हमारे जीवन दाता हैं। इनसे मिलने वाली ऑक्सीजन से ही हम ज़िंदा रहते हैं, इसलिए अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाएं। लेकिन वास्तु के इन नियमों का ध्यान अवश्य रखें।

विंध्यवासिनी सिंह 







क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 2, 2021   16:16
  • Like
क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

भारत शुरू से ही ऋषि-मुनियों का देश रहा है। यहां होने वाले धार्मिक क्रियाकलाप का आयोजन ऋषि परंपरा की ही देन है।

इसे भी पढ़ें: जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

पहले के समय में तमाम ऋषि -धर्मात्मा यज्ञ, हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान के द्वारा मानवता के कल्याण के उपाय करते ही रहते थे। आज भी हम अपने घर में जब भी कोई शुभ कार्य होता है, तो यज्ञ- हवन जरूर कराते हैं। कहते हैं कि कोई भी पूजा-पाठ बिना हवन के संपन्न नहीं होता है। वहीं जब भी आप अपने घर में या कहीं भी हवन होते हुए देखते होंगे तो आपने एक बात पर गौर जरूर किया होगा कि हवन कुंड में हवन सामग्री डालने के बाद 'स्वाहा' शब्द बोलना अनिवार्य बताया जाता है।  

अगर आपको लगता है कि पंडित जी यूं ही 'स्वाहा' बोलने को कह रहे हैं, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि किसी भी यज्ञ में अगर 'स्वाहा' बोले बगैर यज्ञ सामग्री डाली जाती है तो वह यज्ञ सामग्री देवताओं को प्राप्त नहीं होती है। और हमारा यज्ञ अधूरा रह जाता है। 

आइये जानते हैं इसके पीछे का रहस्य...

हवन के समय 'स्वाहा' बोले के पीछे की प्राचीन कथा

हमारे धार्मिक ग्रंथों में 'स्वाहा' को लेकर तमाम तरह की किवदंती प्रचलित हैं।

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

ऐसे ही एक और कथा प्रचलित है, जिसमें कहा जाता है कि प्रकृति की एक कला के रूप में स्वाहा का जन्म हुआ था, और स्वाहा को भगवान कृष्ण से यह आशीर्वाद प्राप्त था कि देवताओं को ग्रहण करने वाली कोई भी सामग्री बिना स्वाहा को समर्पित किए देवताओं तक नहीं पहुंच पाएगी। यही वजह है कि जब भी हम अग्नि में कोई खाद्य वस्तु या पूजन की सामग्री समर्पित करते हैं, तो 'स्वाहा' का उच्चारण करना अनिवार्य होता है।

इसे भी पढ़ें: श्री हनुमान चालीसा के पाठ से 'ऐसे सुधारें' अपना जीवन

ऐसी ही एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें यह बताया गया है कि एक बार देवताओं के पास अकाल पड़ गया और उनके पास खाने-पीने की चीजों की कमी पड़ने लग गई। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने यह उपाय निकाला कि धरती पर ब्राह्मणों द्वारा खाद्य-सामग्री देवताओं तक पहुंचाई जाए। 

इसके लिए अग्निदेव का चुनाव किया गया, क्योंकि यह ऐसी चीज है जिसमें जाने के बाद कोई भी चीज पवित्र हो जाती है। हालांकि अग्निदेव की क्षमता उस समय भस्म करने की नहीं हुआ करती थी, इसीलिए स्वाहा की उत्पत्ति हुई और स्वाहा को आदेश दिया गया कि वह अग्निदेव के साथ रहें। इसके बाद जब भी कोई चीज अग्निदेव को समर्पित किया जाए तो स्वाहा उसे भस्म कर देवताओं तक उस चीज को पहुंचा सके। 

यही कारण है कि जब भी अग्नि में कोई चीज हवन करते हैं, तो 'स्वाहा' बोलकर इस विधि को संपूर्ण की जाती है, ताकि खाद्य पदार्थ या हवन की सामग्री देवताओं को सकुशल पहुंच सके।

तो ये हैं वह कारण, जिसके चलते हवन में डाली सामग्री के बाद 'स्वाहा' बोलना धार्मिक रूप से अनिवार्य होता है।

- विंध्यवासिनी सिंह







जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  जनवरी 23, 2021   18:11
  • Like
जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानि कि 'त्रिदेव' में से भगवान विष्णु को सृष्टि के संचालन का कार्य सौंपा गया है। यही वजह है कि पृथ्वी पर आयोजित होने वाले किसी भी मांगलिक कार्य के लिए बृहस्पति देव, जो स्वयं विष्णु भगवान के एक रूप हैं, उनको याद किया जाता है। विशेष तौर पर शादी-विवाह जैसे बंधनों को मजबूत बनाने के लिए बृहस्पति देव की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

इसे भी पढ़ें: श्री हनुमान चालीसा के पाठ से 'ऐसे सुधारें' अपना जीवन

शास्त्र हमें यह भी बताते हैं कि किसी के भाग्य में बृहस्पति का संयोग ठीक नहीं है, तो उसके वैवाहिक जीवन में क्या-क्या संकट आ सकते हैं। शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन है कि अगर पति पत्नी संयुक्त रूप से भगवान बृहस्पति की पूजा करते हैं, तो निश्चय ही उनके जीवन पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है और उनका रिश्ता मधुर बना रहता है।

ऐसे में हम आज आपको भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिससे दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और आपसी सामंजस्य बना रहेगा।

बिगड़े बृहस्पति का ऐसा होता है आपके जीवन पर असर

अगर आपके भाग्य में बृहस्पति शुभ नहीं है या वृहस्पति ग्रह टेढ़ा है तो इसका सीधा असर आपके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है और आपके वैवाहिक जीवन में खलल पढ़ना प्रारंभ हो जाता है।

इतना ही नहीं, अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आपके भाग्य में बृहस्पति बाधित है, तो इसका असर यह होता है कि आपका विवाह संपन्न होने में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं।

वहीं महिलाओं के संदर्भ में कहा जाता है कि अगर उनके भाग्य में बृहस्पति कमजोर है तो उनका चरित्र खराब होने की संभावना बनी रहती है।

दांपत्य जीवन खुशहाल बनाने के लिए ऐसे करें बृहस्पति भगवान की पूजा 

अगर आप पति पत्नी हैं और आपके रिश्ते में उठापटक जारी है यानी कि पति पत्नी के बीच किसी भी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा है तो ऐसे में आपको भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके रिश्ते का गतिरोध समाप्त होगा और आप आनंद पूर्वक गृहस्थ जीवन का सुख भोग सकेंगे।

इसके लिए आप गुरुवार के दिन, अपने पूजा वाले स्थान पर बृहस्पति भगवान के लिए आसन लगाएं। इसके लिए आपको पीले कपड़े का आसन बिछाना होगा और उस पर भगवान बृहस्पति यानी कि लक्ष्मी और विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित कर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करना होगा।

इसे भी पढ़ें: विनायक चतुर्थी के दिन व्रत से होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण

भगवान बृहस्पति की पूजा में यह बेहद आवश्यक है कि पति और पत्नी दोनों सम्मिलित हों और खुशी मन से भगवान की आराधना करें।

पूजा के दौरान पति पत्नी को पीले रंग के वस्त्र पहनना बहुत आवश्यक है। पीले रंग के वस्त्र पहनने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान सुहागन औरत को सुहाग की प्रतीक चुनरी अपने सर पर ओढ़ना चाहिए, तो वहीं पति को कोई कपड़ा अपने कंधे पर अवश्य रखना चाहिए।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान देसी घी का दीपक जलाना भी बहुत शुभ होता है। जहां तक संभव हो इस दिए में केसर का एक धागा अवश्य डालें।

अगर पति पत्नी के बीच अत्यधिक विवाद होते हैं, तो पूजा के दौरान लाल रंग के धागे या मौली को भगवान के सामने अर्पित करें और इस मौली को दोनों पति पत्नी अपने दाहिने कलाई पर बांध लें, इससे दोनों के बीच मनमुटाव कम होंगे और रिश्ते मधुर बनेंगे।

अगर पति पत्नी के बीच में कटुता एक सीमा से भी ज्यादा बढ़ गई है, तो आपको लगातार 11, 21 या 51 गुरुवार का व्रत रखकर भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहिए, जिससे आपके रिश्ते सामान्य हो सकें।

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

बृहस्पतिवार के दिन अगर ब्राम्हण को पीले रंग का अन्न, दान के रूप में दिया जाए, तो भी यह बेहद कारगर माना जाता है दाम्पत्य की स्थिरता बनाये रखने में।

इन उपायों को अपना कर आप अपना बिगड़ा हुआ बृहस्पति सुधार सकते हैं और सुखद वैवाहिक जीवन का आनंद ले सकते हैं। 

- विंध्यवासिनी सिंह 







This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept