मकर राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

  •  अनीष व्यास
  •  दिसंबर 28, 2020   19:20
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मकर राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

मकर राशि वाले जातकों के लिए वर्ष 2021 शुभ रहने वाला है। क्योंकि आपके राशि स्वामी शनि इस पूरे ही वर्ष, गुरु बृहस्पति के साथ युति करते हुए अपने ही भाव में विराजमान होंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस कारण कार्यस्थल पर आपका समय जल्दी ही गुजरता प्रतीत होगा।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष पर आधारित भविष्यफल पढ़ने के बाद आप साल 2021 में होने वाली सभी प्रकार के घटना-दुर्घटना से पूर्व में ही परिचित हो जाएंगे और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप नए वर्ष की पूरी योजना बनाने में सफल रहेंगे। यह भविष्यवाणी चन्द्र राशि, लग्न तथा वैदिक ज्योतिष के आधार पर किया गया है। इस वार्षिक राशिफल को छह अलग-अलग विषयों में बाँटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें कॅरियर, आर्थिक स्थिति, परिवार, प्रेम-रोमांस, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल है।

आइये विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानते है कि नववर्ष 2021 में मकर राशि का राशिफल कैसा रहेगा।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मकर राशि के जातकों को वर्ष 2021 में अच्छे फल प्राप्त होंगे। आपकी राशि में शनि और गुरु की युति आपको भाग्य का साथ प्रदान करेगी, जिस कारण आप अपने कॅरियर में बिना रुके लगातार आगे बढ़ते जाएंगे। बिजनेसमैन के लिए भी साल 2021 लाभदायक रहने वाला है। आर्थिक जीवन में शुरुआती कुछ महीनों में कष्ट आयेंगे, लेकिन वर्ष के मध्य भाग में धन की आवाजाही आपकी आर्थिक तंगी को दूर करेगी। राहु वर्ष के मध्य में आपको धन लाभ करने के कई अवसर देंगे। परिवार में मान, सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी तथा फैमिली में किसी की शादी होने के कारण सामाजिक रूप से आपका परिवार आगे बढ़ेगा। दांपत्य जीवन में उतार चढ़ाव की स्थिति रह सकती है। वर्ष 2021 आप अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें। बहुत दिनों से चले आ रहे कष्ट दूर होंगे और मकर जातकों की कोई पुराना रोग चल रहा है उससे भी जातकों को मुक्ति मिलेगी।

कॅरियर 

मकर राशि वाले जातकों के लिए वर्ष 2021 शुभ रहने वाला है। क्योंकि आपके राशि स्वामी शनि इस पूरे ही वर्ष, गुरु बृहस्पति के साथ युति करते हुए अपने ही भाव में विराजमान होंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस कारण कार्यस्थल पर आपका समय जल्दी ही गुजरता प्रतीत होगा। वहीं नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को भी इस दौरान, आगे बढ़ने के कई अच्छे मौके प्राप्त होंगे। परंतु इसके लिए उन्हें मेहनत और प्रयास करने की ज़रूरत होगी। यदि इस वर्ष ग्रहों और नक्षत्रों के होने वाले गोचर आपके पक्ष में रहते हैं तो कई नौकरी पेशा जातकों को पदोन्नति मिलने की संभावना बन सकती है। विशेष रूप से वो जातक जो कला, संगीत, फैशन और कपड़ा उद्योग के क्षेत्र से जुड़े है, उनके लिए यह समय अपनी क्षमता को निखारने और अपनी स्थिति को और बेहतर करने के लिए बेहद शुभ दिखाई दे रहा है। मई के माह में आपको भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा क्योंकि इस दौरान शुक्र देव का गोचर वृषभ राशि में होगा। इसके साथ ही व्यापार के स्वामी चंद्रमा भी इस दौरान शनि के साथ युति करेंगे। इसलिए चंद्रमा पर शनि का प्रभाव, व्यापारी जातकों को इस वर्ष सबसे अधिक लाभ देने वाला है। 

आर्थिक स्थिति 

मकर राशि वालों को वर्ष 2021 में आर्थिक जीवन में मिश्रित परिणाम मिलेंगे। क्योंकि इस वर्ष भर आपके खर्चें सबसे अधिक हो सकते हैं, इसलिए हर प्रकार की आर्थिक तंगी से बचने के लिए आपको अपने ख़र्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि जनवरी और फरवरी के महीनों के दौरान, मकर राशि में शुक्र का गोचर आय में वृद्धि करते हुए, आपकी आर्थिक स्थिति को  बेहतर करेगा। अप्रैल में आपके दूसरे भाव में गुरु बृहस्पति का गोचर, आपकी आमदनी में वृद्धि भी लाएगा। हालांकि इस समय आपको अपना धन निवेश करने से पहले, किसी विशेषज्ञ की सलाह लेने की ज़रूरत होगी। कुल मिलाकर कहें तो, अप्रैल से सितंबर तक और फिर मध्य नवंबर से वर्ष के अंत तक का समय, आपके आर्थिक जीवन के लिए सबसे अधिक लाभकारी रहने वाला है।

परिवार 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मकर राशि के जातकों को वर्ष 2021 में अपने घरेलू जीवन में मिश्रित परिणाम मिलेंगे। आपके चतुर्थ भाव में मंगल देव की उपस्थिति आपकी मां को स्वास्थ्य कष्ट देगी, जिसके कारण आपके भी मानसिक तनाव में वृद्धि होगी। कई जातक इस साल, पारिवारिक विवादों को हल करने का प्रयास करते भी दिखाई देंगे। आपके लिए जनवरी, फरवरी और मार्च का समय सबसे अधिक शुभ साबित होगा। क्योंकि फरवरी में मंगल देव का गोचर वृषभ राशि में होगा, जिससे आपको परिवार के बच्चों के साथ अपने संबंध बेहतर करने में मदद मिलेगी। हालांकि पंचम भाव में राहु की उपस्थिति के कारण, आपके पुत्र के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। विवाहित जातकों के लिए यह अवधि अनुकूल रहने वाली है। साथ ही आपके दांपत्य भाव के स्वामी चंद्रमा का गुरु बृहस्पति को दृष्टि करना, इस बात की ओर इशारा करता है कि आपके और जीवनसाथी के बीच सम्मान की भावना इस वर्ष साफ़ दिखाई देगी। जिससे आपका एक-दूसरे के प्रति प्रेम, रोमांस और सामंजस्य के भाव में बढ़ोतरी होगी। इससे आप हर ग़लतफहमी को दूर करने में भी पूरी तरह सफल होंगे।

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प्रेम-रोमांस 

आपके पंचम भाव में राहु की उपस्तिथि आपको प्रेम संबंधों में अपार सफलता दिलाने का कार्य करेगी। आपकी राशि में राहु की इस शुभ स्थिति के कारण, आपके और प्रेमी के बीच संबंध बेहतर हो सकेंगे, जिससे आप दोनों को एक दूसरे के साथ अच्छा समय व्यतीत करने का अवसर भी मिलेगा। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि यदि आप अभी तक सिंगल है तो, इस वर्ष धनु राशि में शुक्र का होने वाला गोचर आपको कार्यस्थल पर किसी विपरीत लिंगी व्यक्ति से मुलाक़ात करने का अवसर दे सकता है। इस दौरान आप दोनों कार्यक्षेत्र पर साथ मिलकर किसी परियोजना पर कार्य करते हुए, अपने संबंध बेहतर कर सकेंगे। साल 2021 प्रेम और रोमांस के लिए अच्छा साबित होगा। क्योंकि इस समय आप अपने अहम को दूर कर पूर्व के हर विवाद, झगड़े, और ग़लतफहमी को हल कर सकेंगे। इससे साल भर प्रेमी जातकों के बीच प्रेम संबंधों में वृद्धि होने की संभावना है। 

शिक्षा

मकर राशि वालों के लिए यह वर्ष अनुकूल रहेगा। इस दौरान आपके पंचम भाव में राहु की उपस्थिति, छात्रों को पढ़ाई-लिखाई में अच्छे परिणाम देने का कार्य करेगी। इसके साथ ही आप अपनी मेहनत से, इस समय शिक्षा में सबसे अधिक लाभ उठा सकेंगे। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि जो छात्र किसी बड़े शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने के इच्छुक थें, उनके लिए वर्ष की शुरुआत सबसे अधिक उत्तम रहने वाली है। क्योंकि इस दौरान गुरु बृहस्पति की दृष्टि, आपके पंचम भाव पर होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे मकर राशि के जातकों के लिए, वर्ष थोड़ा प्रतिकूल रहने वाला है। वहीं विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए जनवरी, फरवरी और अगस्त का महीना सबसे अधिक शुभ साबित होगा। इसके अलावा अप्रैल, सितंबर और नवंबर का महीना भी मकर राशि के विद्यार्थियों के लिए, सामान्य से अच्छा ही रहने की संभावना है।

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स्वास्थ्य 

स्वास्थ्य के लिहाज़ से मकर राशि जातकों के लिए ये अवधि ख़ासा अनुकूल रहेगी। इस वर्ष आप खुद को सामान्य से अधिक सेहतमंद पाएंगे, क्योंकि आपकी राशि पर गुरु बृहस्पति और शनि की युति का प्रभाव होगा, जिससे आपको सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी। भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष आपके प्रथम भाव पर कई लाभकारी ग्रहों का प्रभाव भी, आपके मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न करने में भी मदद करेगा। जिससे आप मानसिक रूप से बेहतर दिखाई देंगे और इससे आपको अपने हर कार्य को व्यवस्थित और रचनात्मकता के साथ पूरा करने में सफलता मिलेगी। यदि आप पूर्व की किसी बीमारी से पीड़ित नहीं हों तो, ये साल भी आपकी सेहत के लिए उत्तम ही रहेगा। हालांकि अपने अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए, अपने खान-पान में अतिरिक्त बदलाव कर, अपनी अच्छी दैनिक दिनचर्या को अपनाते हुए आप उसमें भी सुधार ला सकते हैं। इसके साथ ही अगर आप किसी मौसम जनित बीमारी से पीड़ित थे तो, आपको इस वर्ष उससे भी निजात मिलने की संभावना अधिक रहेगी।

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ज्योतिष उपाय

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि बुधवार को चींटियों को आटा डालें, और प्रतिदिन श्री दुर्गा सप्तशती पाठ पढ़ें । 9 वर्ष से कम आयु की छोटी कन्याओं को, सफेद मिठाई बांटें और उनका आशीर्वाद लें। हर बुधवार के दिन साबुत मूंग की दाल, अपने हाथों से गाय को खिलाएं।

अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक







पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 20, 2021   13:47
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पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

प्राचीन समय से ही पेड़ पौधों की पूजा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है और आज भी हम किसी न किसी रूप में पेड़ पौधे की पूजा अवश्य ही करते हैं। वह चाहे पीपल हो, तुलसी हो, समी हो या फिर बरगद का ही पेड़ क्यों ना हो, हमारे लिए काफी महत्त्व रखते हैं। 

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हमारे शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि हर मनुष्य को अपने जीवन काल में एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। इतना ही नहीं, शास्त्र यह भी कहते हैं कि अगर किसी कारण वश कोई मनुष्य एक पेड़ काटता है, तो उसे 10 पेड़ लगाकर उनका पालन करने के उपरांत ही एक पेड़ काटने के पाप से मुक्ति मिल पाएगी। ऐसे में पेड़ लगाने की महत्ता कितनी है, इसे आप सहज ही समझ सकते हैं। 

अगर आप भी पेड़ लगाने का विचार अपने मन में ला रहे हैं, तो वास्तु में इसके कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करते हुए अगर वृक्षारोपण किया जाए, तो इसका सकारात्मक असर हमारे जीवन में देखने को मिलता है।

आईये जानते हैं ...

पेड़ लगाने का सही समय

वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप पेड़ लगाने जा रहे हैं या बगीचे का निर्माण करने जा रहे हैं, तो इसके लिए आपको कुछ विशेष नक्षत्रों का इंतजार करना होगा। जिनमें स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र को सबसे सर्वोत्तम बताया गया है। अगर आप इन नक्षत्रों में पेड़ लगाते हैं तो यह पेड़ आपके जीवन में खुशहाली लेकर आएंगे।

पेड़ लगाते समय दिशा का ध्यान

अगर आप वृक्षारोपण करने जा रहे हैं, तो आपको यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि वह वृक्ष सही दिशा में लगें। अगर आपके घर में बगीचे के लिए जगह छोड़ी जा रही है, तो आप को ध्यान रखना चाहिए कि वह जगह वाम पार्श्व होना चाहिए। नेत्रत्व या अग्नि कोण में बगीचे का निर्माण करना अशुभ बताया जाता है और कहा जाता है कि इसका दुष्प्रभाव पूरे घर के ऊपर पड़ता है।

इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि घर के पूर्व दिशा में कभी भी बड़े और विशाल पेड़ पौधों को नहीं लगाना चाहिए। अगर भूलवश आपसे ऐसा हो गया है तो इस भूल के दुष्परिणाम को कम करने के लिए आपको घर के उत्तर दिशा में आंवला, हरश्रृंगार, तुलसी और अमलतास के पौधों का रोपण करना चाहिए।

वृक्ष फल नहीं दे रहे हों तो करें यह उपाय

अगर आपके घर के आस-पास फलदार वृक्ष लगे हुए हैं और वह फल नहीं दे रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार इन पौधों या पेड़ों की जड़ों में मूंग, उड़द, कुलथी, तिल और जौ मिलाकर पानी तैयार करना चाहिए और इस पानी को वृक्षों की जड़ों में डालना चाहिए।

जमीन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए

जिस जमीन पर आपका आवास बना हुआ है, उस पर यदि कोई दोष है, तो इस दोष को दूर करने के लिए आपको 'आंवले' का पौधा अपने आवास के आसपास ज़रूर लगाना चाहिए।

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चंद्रमा की पीड़ा को दूर करने के लिए

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए

माता लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी रहे, इसके लिए आपको अपने घर के पास बेल यानी कि बिल्व का पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। कहा जाता है कि बेल के पेड़ पर माता लक्ष्मी का निवास होता है और घर के आस-पास इस पेड़ को अगर लगाया जाए, तो माँ लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहती हैं।

 घर के आसपास इन पेड़ - पौधों को लगाने से बचें

- अगर आपके घर के आसपास केला, बेर और बाँझ अनार के वृक्ष हों तो आपके ऊपर इनका नकारात्मक असर पड़ता है। कहा जाता है कि इन तीनों वृक्षों की वजह से आपकी संतान के ऊपर हमेशा कष्ट बना रहता है।

- इसके अलावा कैक्टस के पौधों को भी कभी भी अपने आवासीय परिसर में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से आप हमेशा शत्रु बाधा से गिरे रह सकते हैं और आपके ऊपर धन हानि का योग भी बना रहेगा।

- अपने आवासीय परिसर में कभी भी कंचन, पलाश, अर्जुन के पेड़ नहीं लगाने चाहिए। इन पेड़ों से नकारात्मक शक्ति निकलती है और यह अशांति के कारक होते हैं।

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हालाँकि पेड़ -पौधे हमारे जीवन दाता हैं। इनसे मिलने वाली ऑक्सीजन से ही हम ज़िंदा रहते हैं, इसलिए अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाएं। लेकिन वास्तु के इन नियमों का ध्यान अवश्य रखें।

विंध्यवासिनी सिंह 







क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 2, 2021   16:16
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क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

भारत शुरू से ही ऋषि-मुनियों का देश रहा है। यहां होने वाले धार्मिक क्रियाकलाप का आयोजन ऋषि परंपरा की ही देन है।

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पहले के समय में तमाम ऋषि -धर्मात्मा यज्ञ, हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान के द्वारा मानवता के कल्याण के उपाय करते ही रहते थे। आज भी हम अपने घर में जब भी कोई शुभ कार्य होता है, तो यज्ञ- हवन जरूर कराते हैं। कहते हैं कि कोई भी पूजा-पाठ बिना हवन के संपन्न नहीं होता है। वहीं जब भी आप अपने घर में या कहीं भी हवन होते हुए देखते होंगे तो आपने एक बात पर गौर जरूर किया होगा कि हवन कुंड में हवन सामग्री डालने के बाद 'स्वाहा' शब्द बोलना अनिवार्य बताया जाता है।  

अगर आपको लगता है कि पंडित जी यूं ही 'स्वाहा' बोलने को कह रहे हैं, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि किसी भी यज्ञ में अगर 'स्वाहा' बोले बगैर यज्ञ सामग्री डाली जाती है तो वह यज्ञ सामग्री देवताओं को प्राप्त नहीं होती है। और हमारा यज्ञ अधूरा रह जाता है। 

आइये जानते हैं इसके पीछे का रहस्य...

हवन के समय 'स्वाहा' बोले के पीछे की प्राचीन कथा

हमारे धार्मिक ग्रंथों में 'स्वाहा' को लेकर तमाम तरह की किवदंती प्रचलित हैं।

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

ऐसे ही एक और कथा प्रचलित है, जिसमें कहा जाता है कि प्रकृति की एक कला के रूप में स्वाहा का जन्म हुआ था, और स्वाहा को भगवान कृष्ण से यह आशीर्वाद प्राप्त था कि देवताओं को ग्रहण करने वाली कोई भी सामग्री बिना स्वाहा को समर्पित किए देवताओं तक नहीं पहुंच पाएगी। यही वजह है कि जब भी हम अग्नि में कोई खाद्य वस्तु या पूजन की सामग्री समर्पित करते हैं, तो 'स्वाहा' का उच्चारण करना अनिवार्य होता है।

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ऐसी ही एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें यह बताया गया है कि एक बार देवताओं के पास अकाल पड़ गया और उनके पास खाने-पीने की चीजों की कमी पड़ने लग गई। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने यह उपाय निकाला कि धरती पर ब्राह्मणों द्वारा खाद्य-सामग्री देवताओं तक पहुंचाई जाए। 

इसके लिए अग्निदेव का चुनाव किया गया, क्योंकि यह ऐसी चीज है जिसमें जाने के बाद कोई भी चीज पवित्र हो जाती है। हालांकि अग्निदेव की क्षमता उस समय भस्म करने की नहीं हुआ करती थी, इसीलिए स्वाहा की उत्पत्ति हुई और स्वाहा को आदेश दिया गया कि वह अग्निदेव के साथ रहें। इसके बाद जब भी कोई चीज अग्निदेव को समर्पित किया जाए तो स्वाहा उसे भस्म कर देवताओं तक उस चीज को पहुंचा सके। 

यही कारण है कि जब भी अग्नि में कोई चीज हवन करते हैं, तो 'स्वाहा' बोलकर इस विधि को संपूर्ण की जाती है, ताकि खाद्य पदार्थ या हवन की सामग्री देवताओं को सकुशल पहुंच सके।

तो ये हैं वह कारण, जिसके चलते हवन में डाली सामग्री के बाद 'स्वाहा' बोलना धार्मिक रूप से अनिवार्य होता है।

- विंध्यवासिनी सिंह







जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  जनवरी 23, 2021   18:11
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जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानि कि 'त्रिदेव' में से भगवान विष्णु को सृष्टि के संचालन का कार्य सौंपा गया है। यही वजह है कि पृथ्वी पर आयोजित होने वाले किसी भी मांगलिक कार्य के लिए बृहस्पति देव, जो स्वयं विष्णु भगवान के एक रूप हैं, उनको याद किया जाता है। विशेष तौर पर शादी-विवाह जैसे बंधनों को मजबूत बनाने के लिए बृहस्पति देव की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

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शास्त्र हमें यह भी बताते हैं कि किसी के भाग्य में बृहस्पति का संयोग ठीक नहीं है, तो उसके वैवाहिक जीवन में क्या-क्या संकट आ सकते हैं। शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन है कि अगर पति पत्नी संयुक्त रूप से भगवान बृहस्पति की पूजा करते हैं, तो निश्चय ही उनके जीवन पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है और उनका रिश्ता मधुर बना रहता है।

ऐसे में हम आज आपको भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिससे दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और आपसी सामंजस्य बना रहेगा।

बिगड़े बृहस्पति का ऐसा होता है आपके जीवन पर असर

अगर आपके भाग्य में बृहस्पति शुभ नहीं है या वृहस्पति ग्रह टेढ़ा है तो इसका सीधा असर आपके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है और आपके वैवाहिक जीवन में खलल पढ़ना प्रारंभ हो जाता है।

इतना ही नहीं, अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आपके भाग्य में बृहस्पति बाधित है, तो इसका असर यह होता है कि आपका विवाह संपन्न होने में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं।

वहीं महिलाओं के संदर्भ में कहा जाता है कि अगर उनके भाग्य में बृहस्पति कमजोर है तो उनका चरित्र खराब होने की संभावना बनी रहती है।

दांपत्य जीवन खुशहाल बनाने के लिए ऐसे करें बृहस्पति भगवान की पूजा 

अगर आप पति पत्नी हैं और आपके रिश्ते में उठापटक जारी है यानी कि पति पत्नी के बीच किसी भी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा है तो ऐसे में आपको भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके रिश्ते का गतिरोध समाप्त होगा और आप आनंद पूर्वक गृहस्थ जीवन का सुख भोग सकेंगे।

इसके लिए आप गुरुवार के दिन, अपने पूजा वाले स्थान पर बृहस्पति भगवान के लिए आसन लगाएं। इसके लिए आपको पीले कपड़े का आसन बिछाना होगा और उस पर भगवान बृहस्पति यानी कि लक्ष्मी और विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित कर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करना होगा।

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भगवान बृहस्पति की पूजा में यह बेहद आवश्यक है कि पति और पत्नी दोनों सम्मिलित हों और खुशी मन से भगवान की आराधना करें।

पूजा के दौरान पति पत्नी को पीले रंग के वस्त्र पहनना बहुत आवश्यक है। पीले रंग के वस्त्र पहनने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान सुहागन औरत को सुहाग की प्रतीक चुनरी अपने सर पर ओढ़ना चाहिए, तो वहीं पति को कोई कपड़ा अपने कंधे पर अवश्य रखना चाहिए।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान देसी घी का दीपक जलाना भी बहुत शुभ होता है। जहां तक संभव हो इस दिए में केसर का एक धागा अवश्य डालें।

अगर पति पत्नी के बीच अत्यधिक विवाद होते हैं, तो पूजा के दौरान लाल रंग के धागे या मौली को भगवान के सामने अर्पित करें और इस मौली को दोनों पति पत्नी अपने दाहिने कलाई पर बांध लें, इससे दोनों के बीच मनमुटाव कम होंगे और रिश्ते मधुर बनेंगे।

अगर पति पत्नी के बीच में कटुता एक सीमा से भी ज्यादा बढ़ गई है, तो आपको लगातार 11, 21 या 51 गुरुवार का व्रत रखकर भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहिए, जिससे आपके रिश्ते सामान्य हो सकें।

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

बृहस्पतिवार के दिन अगर ब्राम्हण को पीले रंग का अन्न, दान के रूप में दिया जाए, तो भी यह बेहद कारगर माना जाता है दाम्पत्य की स्थिरता बनाये रखने में।

इन उपायों को अपना कर आप अपना बिगड़ा हुआ बृहस्पति सुधार सकते हैं और सुखद वैवाहिक जीवन का आनंद ले सकते हैं। 

- विंध्यवासिनी सिंह 







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