मीन राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

  •  अनीष व्यास
  •  दिसंबर 30, 2020   17:28
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मीन राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

वर्ष 2021 मीन राशि के जातकों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि इस दौरान आपके करियर के भाव के स्वामी गुरु बृहस्पति, आपकी राशि के एकादश भाव में उपस्थित होंगे, जहाँ वो शनि के साथ युति करेंगे। इसके परिणामस्वरूप, आपको अपनी मेहनत का भरपूर लाभ मिल सकेगा

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष पर आधारित भविष्यफल पढ़ने के बाद आप साल 2021 में होने वाली सभी प्रकार के घटना-दुर्घटना से पूर्व में ही परिचित हो जाएंगे और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप नए वर्ष की पूरी योजना बनाने में सफल रहेंगे। यह भविष्यवाणी चन्द्र राशि, लग्न तथा वैदिक ज्योतिष के आधार पर किया गया है। इस वार्षिक राशिफल को छह अलग-अलग विषयों में बाँटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें कॅरियर, आर्थिक स्थिति, परिवार, प्रेम-रोमांस, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल है।

आइये विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानते है कि नववर्ष 2021 में मीन राशि का राशिफल कैसा रहेगा।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मीन राशि के जातकों को वर्ष 2021 कॅरियर के मामले में मन के अनुकूल ही परिणाम प्राप्त होंगे। मीन राशि के जातक इस दौरान अपने कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, आपको अपने सहकर्मियों का साथ मिलेगा और वो अपनी उच्च अवस्था में होते हुए आपको सहयोग करते दिखाई देंगे। आपको इस समय अपने वरिष्ठ अधिकारियों और अपने सहकर्मियों से अच्छे संबंध बनाकर चलने की ज़रूरत होगी। तभी आपके वरिष्ठ अधिकारी आपकी मेहनत को देख पाएंगे। नौकरी पेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में भाग्य का साथ मिलेगा और उनकी उन्नति और प्रमोशन होगा, मीन राशि के जातक प्रयास और अपनी मेहनत जारी रखें। इस वर्ष ना केवल आपको अपने कार्य में तरक्की मिलेगी बल्कि काम के इस वजह से ही आपका सम्मान भी बढ़ेगा। आपके भाई बहनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। परिवार के बुजुर्गों तथा समाज के सम्मानित व्यक्तियों का आपको सानिध्य मिलेगा और उनके संरक्षण में आप काफी बेहतर कार्य करेंगे, जिसके कारण ना केवल आपके सम्मान में वृद्धि होगी आपको उन्नति प्राप्त होगी। स्वास्थ्य के लिहाज से समय सामान्य से बेहतर रहने वाला है क्योंकि वर्ष 2021 में ग्रह स्थिति अनुकूल रहेगी, लेकिन आपको अप्रैल से सितंबर तक के मध्य थोड़ा ध्यान देने की ज़रूरत होगी।

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कॅरियर 

वर्ष 2021 मीन राशि के जातकों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि इस दौरान आपके करियर के भाव के स्वामी गुरु बृहस्पति, आपकी राशि के एकादश भाव में उपस्थित होंगे, जहाँ वो शनि के साथ युति करेंगे। इसके परिणामस्वरूप, आपको अपनी मेहनत का भरपूर लाभ मिल सकेगा। भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि साल की शुरुआत में जहाँ आपको मनचाही नौकरी मिलने के भी योग बनेंगे। वहीं अगर आप प्रशासनिक सेवाओं या सरकारी नौकरियों में अपनी किस्मत आज़माना चाहते हैं तो यह समय अवधि आपके लिए बेहद अनुकूल रहने वाली है। जहां तक व्यापारी जातकों की बात हैं तो, व्यापार के भाव के स्वामी बुध देव सूर्य के साथ मिलकर इस दौरान "बुधादित्य योग" का निर्माण करेंगे। इसलिए साल 2021 आपके बिज़नेस के लिए सबसे बेहतर सिद्ध हो सकता है। परंतु वर्ष 2021 में इस राशि के जातक सब जांच करने के बाद ही लोगों पर भरोसा करें अन्यथा उन्हें व्यापार में हानि हो सकती है। भोजन, रत्न और कपड़ों के बिजनेस से जुड़े लोगों को वर्ष 2021 में बहुत लाभ मिलेगा। नवंबर माह के दौरान कुछ मीन राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र से संबंधित किसी विदेश यात्रा पर जाने का अवसर भी मिल सकता है। 

आर्थिक स्थिति 

वर्ष 2021 में आपको धन संबंधी मामलों में अच्छे परिणामों की प्राप्ति होगी। साल 2021 की शुरुआत में ही गुरु बृहस्पति और शनि की आपके एकादश भाव में युति आपको निरंतर धन का प्रवाह प्रदान करने में मदद करेगी। जिसके कारण आप अपना धन को जोड़ते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सकेंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि मंगल ग्रह धन और परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, और उनकी कृपा भी आपको आर्थिक लाभ देने में मदद करेगी। इससे आपकी हर प्रकार की आर्थिक समस्याओं का बहुत ही जल्द अंत हो सकेगा। वर्ष 2021 के दौरान शनि आपके एकादश भाव में उपस्थित होंगे, जो आपके ख़र्चों के भाव के स्वामी भी होते हैं। ऐसे में आप अपने संसाधनों और रुपए का ज्यादा खर्च, अपनी विलासिता, विदेश यात्राओं व अन्य सुख-सुविधाओं पर करेंगे। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों पर आपका धन कम ख़र्च होगा। घर-परिवार में हो रहे किसी शुभ कार्यक्रम पर भी आपको कुछ ख़र्चा करना पड़ सकता है। हालांकि मध्य सितंबर के बाद, आपको अपने लंबे समय से अटके हुए किसी धन की प्राप्ति होने से अचानक लाभ मिलने के योग भी बनते नज़र आ रहे हैं।

परिवार 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वर्ष 2021 में मीन राशि के लोगों को अपने पारिवारिक जीवन में मन के अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि आपके और परिवार के सदस्यों के बीच चल रहा हर मतभेद समाप्त होगा, जिससे आपको एक दूसरे के साथ संबंध बेहतर करने में मदद मिलेगी। साल 2021 की शुरुआत में पारिवारिक जीवन सुखी और समृद्ध बनेगा, और इससे आपको घर में शांति की अनुभूति होगी। फरवरी माह के दौरान वृषभ राशि में मंगल का गोचर, आपके और परिवार के सदस्यों के रिश्तों में मजबूती और निकटता लाएगा। परिणामस्वरूप, इस दौरान आप जो भी काम करेंगे उसमें आपको भाई-बहन, विशेष रूप से अपने छोटे भाई का पूरा सहयोग मिलेगा। कई ग्रहों के शुभ प्रभाव से आप परिवार के सदस्यों या अपनी मेहनत के कारण, अगस्त और नवंबर के महीने में नया मकान खरीदने का प्लान भी कर सकते हैं। साल के मध्य में आपके और जीवनसाथी के बीच कुछ झगड़े और ग़लतफहमी पैदा होने की आशंका रहेगी। ऐसे में आपको इस दौरान एक-दूसरे पर, पूर्ण विश्वास रखने की सलाह दी जाती है। मीन राशि के जातकों के जीवन में किसी नन्हें मेहमान का आगमन भी संभव है।

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प्रेम-रोमांस 

प्रेम संबंध में वर्ष 2021 मीन राशि के जातकों को मिश्रित परिणाम मिलेंगे। क्योंकि प्रेम और रोमांस के पंचम भाव पर शनि की दृष्टि का प्रभाव, इस वर्ष प्रेमी जातकों के रिश्ते में कई चुनौतियाँ लेकर आएगा। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस दौरान आप पर गुरु बृहस्पति की कृपा भी होगी। विशेष रूप से इस साल के शुरुआती महीने, प्रेम में पड़े जातकों के लिए सामान्य से कम ही अच्छे रहेंगे। ऐसे में आपको सलाह दी जाती है कि, अपने गुस्से पर नियंत्रण रखते हुए, अपने प्रियतम पर बेवजह शक करने से बचें, अन्यथा आपको इसके लिए बाद में पछताना भी पड़ सकता है। जुलाई के माह के दौरान बुध का कर्क राशि में होने वाला गोचर, प्रेमी संग आपके रोमांस को पुनः जागृत करने का अवसर देगा। खासतौर पर अगर आप, लंबे समय से किसी प्रेम संबंध में हैं तो, आपके रिश्ते में इस दौरान नयापन आने की संभावना है। सितंबर के महीने में आपके और प्रेमी के बीच कुछ चुनौतियाँ भी आ सकती हैं। 

शिक्षा

वर्ष 2021 में मीन राशि के जातक छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने का फैसला भी ले सकते हैं। परंतु आपके पंचम भाव पर शनि देव की दृष्टि कुछ छात्रों की, पढ़ाई में रुकावटें उत्पन्न करने का मुख्य कारण बनेगी। इसलिए आपको शुरुआत से ही खुद को अपनी पढ़ाई-लिखाई के प्रति, केंद्रित रहने और अपनी मेहनत जारी रखने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि अप्रैल तक आपके पंचम भाव पर गुरु बृहस्पति की सकारात्मक दृष्टि, विधार्थियों को हर परीक्षा में सफलता प्रदान करेगी। वो जातक जो अभी तक बेरोज़गार हैं, उन्हें सितंबर के बाद नौकरी मिलने के योग बन रहे हैं। खुद पर आत्मविश्वास रखने की ज़रूरत होगी। परंतु आपको ये सलाह भी दी जाती है कि इस दौरान खुद पर ज़रूरत से ज्यादा आत्मविश्वास न करें, अन्यथा ऐसा करना आपके लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य 

वर्ष 2021 में मीन राशि के जातकों को अपने स्वास्थ्य के अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि ग्रहों की स्थिति वर्ष 2021 की शुरुआत में आपके स्वास्थ्य जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। इसलिए मीन राशि के जातक वर्ष शुरुआत में मानसिक रूप से संतुष्ट रहते हुए, हर कार्य को योजना अनुसार सफलता के साथ पूरा करते दिखाई देंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि यदि आप पहले से किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं तो इस वर्ष 2021 में आप बेहतर स्वस्थ्य जीवन का आनंद उठा सकेंगे। हालांकि, अप्रैल में आपके द्वादश भाव में गुरु बृहस्पति के गोचर से, कुछ छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी संभव है। इसलिए आपको सेहत के लिहाज़ से अगस्त माह तक, सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए, सही और स्थिर दैनिक दिनचर्या के साथ-साथ अच्छी भोजन की आदतों को अपनाने की कोशिश करें। इस वर्ष आपको मौसम जनित रोग विकसित होने की आशंका भी है।

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ज्योतिष उपाय

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि घर से निकलते हुए सदैव अपनी जेब में एक पीला साफ़ रुमाल ज़रूर रखें। हनुमान जी की आराधना और बजरंग बाण का पाठ करें। शनिवार के दिन छाया दान करें।

- अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक







पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 20, 2021   13:47
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पेड़-पौधे लगाने को लेकर क्या कहता हैं वास्तुशास्त्र? इन नियमों को जरूर जानें, होगी तरक्की

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

प्राचीन समय से ही पेड़ पौधों की पूजा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है और आज भी हम किसी न किसी रूप में पेड़ पौधे की पूजा अवश्य ही करते हैं। वह चाहे पीपल हो, तुलसी हो, समी हो या फिर बरगद का ही पेड़ क्यों ना हो, हमारे लिए काफी महत्त्व रखते हैं। 

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हमारे शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि हर मनुष्य को अपने जीवन काल में एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। इतना ही नहीं, शास्त्र यह भी कहते हैं कि अगर किसी कारण वश कोई मनुष्य एक पेड़ काटता है, तो उसे 10 पेड़ लगाकर उनका पालन करने के उपरांत ही एक पेड़ काटने के पाप से मुक्ति मिल पाएगी। ऐसे में पेड़ लगाने की महत्ता कितनी है, इसे आप सहज ही समझ सकते हैं। 

अगर आप भी पेड़ लगाने का विचार अपने मन में ला रहे हैं, तो वास्तु में इसके कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करते हुए अगर वृक्षारोपण किया जाए, तो इसका सकारात्मक असर हमारे जीवन में देखने को मिलता है।

आईये जानते हैं ...

पेड़ लगाने का सही समय

वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप पेड़ लगाने जा रहे हैं या बगीचे का निर्माण करने जा रहे हैं, तो इसके लिए आपको कुछ विशेष नक्षत्रों का इंतजार करना होगा। जिनमें स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र को सबसे सर्वोत्तम बताया गया है। अगर आप इन नक्षत्रों में पेड़ लगाते हैं तो यह पेड़ आपके जीवन में खुशहाली लेकर आएंगे।

पेड़ लगाते समय दिशा का ध्यान

अगर आप वृक्षारोपण करने जा रहे हैं, तो आपको यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि वह वृक्ष सही दिशा में लगें। अगर आपके घर में बगीचे के लिए जगह छोड़ी जा रही है, तो आप को ध्यान रखना चाहिए कि वह जगह वाम पार्श्व होना चाहिए। नेत्रत्व या अग्नि कोण में बगीचे का निर्माण करना अशुभ बताया जाता है और कहा जाता है कि इसका दुष्प्रभाव पूरे घर के ऊपर पड़ता है।

इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि घर के पूर्व दिशा में कभी भी बड़े और विशाल पेड़ पौधों को नहीं लगाना चाहिए। अगर भूलवश आपसे ऐसा हो गया है तो इस भूल के दुष्परिणाम को कम करने के लिए आपको घर के उत्तर दिशा में आंवला, हरश्रृंगार, तुलसी और अमलतास के पौधों का रोपण करना चाहिए।

वृक्ष फल नहीं दे रहे हों तो करें यह उपाय

अगर आपके घर के आस-पास फलदार वृक्ष लगे हुए हैं और वह फल नहीं दे रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार इन पौधों या पेड़ों की जड़ों में मूंग, उड़द, कुलथी, तिल और जौ मिलाकर पानी तैयार करना चाहिए और इस पानी को वृक्षों की जड़ों में डालना चाहिए।

जमीन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए

जिस जमीन पर आपका आवास बना हुआ है, उस पर यदि कोई दोष है, तो इस दोष को दूर करने के लिए आपको 'आंवले' का पौधा अपने आवास के आसपास ज़रूर लगाना चाहिए।

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चंद्रमा की पीड़ा को दूर करने के लिए

अगर आपके ऊपर चंद्रमा की पीड़ा है, या चंद्रमा का कष्ट है, तो इस कष्ट को दूर करने के लिए आपको अपने घर के पास 'गूलर' का पौधा लगाना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का असर आपके ऊपर कम हो जाता है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए

माता लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी रहे, इसके लिए आपको अपने घर के पास बेल यानी कि बिल्व का पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। कहा जाता है कि बेल के पेड़ पर माता लक्ष्मी का निवास होता है और घर के आस-पास इस पेड़ को अगर लगाया जाए, तो माँ लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहती हैं।

 घर के आसपास इन पेड़ - पौधों को लगाने से बचें

- अगर आपके घर के आसपास केला, बेर और बाँझ अनार के वृक्ष हों तो आपके ऊपर इनका नकारात्मक असर पड़ता है। कहा जाता है कि इन तीनों वृक्षों की वजह से आपकी संतान के ऊपर हमेशा कष्ट बना रहता है।

- इसके अलावा कैक्टस के पौधों को भी कभी भी अपने आवासीय परिसर में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से आप हमेशा शत्रु बाधा से गिरे रह सकते हैं और आपके ऊपर धन हानि का योग भी बना रहेगा।

- अपने आवासीय परिसर में कभी भी कंचन, पलाश, अर्जुन के पेड़ नहीं लगाने चाहिए। इन पेड़ों से नकारात्मक शक्ति निकलती है और यह अशांति के कारक होते हैं।

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हालाँकि पेड़ -पौधे हमारे जीवन दाता हैं। इनसे मिलने वाली ऑक्सीजन से ही हम ज़िंदा रहते हैं, इसलिए अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाएं। लेकिन वास्तु के इन नियमों का ध्यान अवश्य रखें।

विंध्यवासिनी सिंह 







क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  फरवरी 2, 2021   16:16
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क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

भारत शुरू से ही ऋषि-मुनियों का देश रहा है। यहां होने वाले धार्मिक क्रियाकलाप का आयोजन ऋषि परंपरा की ही देन है।

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पहले के समय में तमाम ऋषि -धर्मात्मा यज्ञ, हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान के द्वारा मानवता के कल्याण के उपाय करते ही रहते थे। आज भी हम अपने घर में जब भी कोई शुभ कार्य होता है, तो यज्ञ- हवन जरूर कराते हैं। कहते हैं कि कोई भी पूजा-पाठ बिना हवन के संपन्न नहीं होता है। वहीं जब भी आप अपने घर में या कहीं भी हवन होते हुए देखते होंगे तो आपने एक बात पर गौर जरूर किया होगा कि हवन कुंड में हवन सामग्री डालने के बाद 'स्वाहा' शब्द बोलना अनिवार्य बताया जाता है।  

अगर आपको लगता है कि पंडित जी यूं ही 'स्वाहा' बोलने को कह रहे हैं, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि किसी भी यज्ञ में अगर 'स्वाहा' बोले बगैर यज्ञ सामग्री डाली जाती है तो वह यज्ञ सामग्री देवताओं को प्राप्त नहीं होती है। और हमारा यज्ञ अधूरा रह जाता है। 

आइये जानते हैं इसके पीछे का रहस्य...

हवन के समय 'स्वाहा' बोले के पीछे की प्राचीन कथा

हमारे धार्मिक ग्रंथों में 'स्वाहा' को लेकर तमाम तरह की किवदंती प्रचलित हैं।

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

ऐसे ही एक और कथा प्रचलित है, जिसमें कहा जाता है कि प्रकृति की एक कला के रूप में स्वाहा का जन्म हुआ था, और स्वाहा को भगवान कृष्ण से यह आशीर्वाद प्राप्त था कि देवताओं को ग्रहण करने वाली कोई भी सामग्री बिना स्वाहा को समर्पित किए देवताओं तक नहीं पहुंच पाएगी। यही वजह है कि जब भी हम अग्नि में कोई खाद्य वस्तु या पूजन की सामग्री समर्पित करते हैं, तो 'स्वाहा' का उच्चारण करना अनिवार्य होता है।

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ऐसी ही एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें यह बताया गया है कि एक बार देवताओं के पास अकाल पड़ गया और उनके पास खाने-पीने की चीजों की कमी पड़ने लग गई। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने यह उपाय निकाला कि धरती पर ब्राह्मणों द्वारा खाद्य-सामग्री देवताओं तक पहुंचाई जाए। 

इसके लिए अग्निदेव का चुनाव किया गया, क्योंकि यह ऐसी चीज है जिसमें जाने के बाद कोई भी चीज पवित्र हो जाती है। हालांकि अग्निदेव की क्षमता उस समय भस्म करने की नहीं हुआ करती थी, इसीलिए स्वाहा की उत्पत्ति हुई और स्वाहा को आदेश दिया गया कि वह अग्निदेव के साथ रहें। इसके बाद जब भी कोई चीज अग्निदेव को समर्पित किया जाए तो स्वाहा उसे भस्म कर देवताओं तक उस चीज को पहुंचा सके। 

यही कारण है कि जब भी अग्नि में कोई चीज हवन करते हैं, तो 'स्वाहा' बोलकर इस विधि को संपूर्ण की जाती है, ताकि खाद्य पदार्थ या हवन की सामग्री देवताओं को सकुशल पहुंच सके।

तो ये हैं वह कारण, जिसके चलते हवन में डाली सामग्री के बाद 'स्वाहा' बोलना धार्मिक रूप से अनिवार्य होता है।

- विंध्यवासिनी सिंह







जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  जनवरी 23, 2021   18:11
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जीवन में आये संकट दूर करने हेतु पति-पत्नी करें भगवान बृहस्पति की पूजा

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानि कि 'त्रिदेव' में से भगवान विष्णु को सृष्टि के संचालन का कार्य सौंपा गया है। यही वजह है कि पृथ्वी पर आयोजित होने वाले किसी भी मांगलिक कार्य के लिए बृहस्पति देव, जो स्वयं विष्णु भगवान के एक रूप हैं, उनको याद किया जाता है। विशेष तौर पर शादी-विवाह जैसे बंधनों को मजबूत बनाने के लिए बृहस्पति देव की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

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शास्त्र हमें यह भी बताते हैं कि किसी के भाग्य में बृहस्पति का संयोग ठीक नहीं है, तो उसके वैवाहिक जीवन में क्या-क्या संकट आ सकते हैं। शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन है कि अगर पति पत्नी संयुक्त रूप से भगवान बृहस्पति की पूजा करते हैं, तो निश्चय ही उनके जीवन पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है और उनका रिश्ता मधुर बना रहता है।

ऐसे में हम आज आपको भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिससे दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और आपसी सामंजस्य बना रहेगा।

बिगड़े बृहस्पति का ऐसा होता है आपके जीवन पर असर

अगर आपके भाग्य में बृहस्पति शुभ नहीं है या वृहस्पति ग्रह टेढ़ा है तो इसका सीधा असर आपके वैवाहिक जीवन पर पड़ता है और आपके वैवाहिक जीवन में खलल पढ़ना प्रारंभ हो जाता है।

इतना ही नहीं, अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आपके भाग्य में बृहस्पति बाधित है, तो इसका असर यह होता है कि आपका विवाह संपन्न होने में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं।

वहीं महिलाओं के संदर्भ में कहा जाता है कि अगर उनके भाग्य में बृहस्पति कमजोर है तो उनका चरित्र खराब होने की संभावना बनी रहती है।

दांपत्य जीवन खुशहाल बनाने के लिए ऐसे करें बृहस्पति भगवान की पूजा 

अगर आप पति पत्नी हैं और आपके रिश्ते में उठापटक जारी है यानी कि पति पत्नी के बीच किसी भी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा है तो ऐसे में आपको भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके रिश्ते का गतिरोध समाप्त होगा और आप आनंद पूर्वक गृहस्थ जीवन का सुख भोग सकेंगे।

इसके लिए आप गुरुवार के दिन, अपने पूजा वाले स्थान पर बृहस्पति भगवान के लिए आसन लगाएं। इसके लिए आपको पीले कपड़े का आसन बिछाना होगा और उस पर भगवान बृहस्पति यानी कि लक्ष्मी और विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित कर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करना होगा।

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भगवान बृहस्पति की पूजा में यह बेहद आवश्यक है कि पति और पत्नी दोनों सम्मिलित हों और खुशी मन से भगवान की आराधना करें।

पूजा के दौरान पति पत्नी को पीले रंग के वस्त्र पहनना बहुत आवश्यक है। पीले रंग के वस्त्र पहनने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान सुहागन औरत को सुहाग की प्रतीक चुनरी अपने सर पर ओढ़ना चाहिए, तो वहीं पति को कोई कपड़ा अपने कंधे पर अवश्य रखना चाहिए।

वृहस्पति भगवान की पूजा के दौरान देसी घी का दीपक जलाना भी बहुत शुभ होता है। जहां तक संभव हो इस दिए में केसर का एक धागा अवश्य डालें।

अगर पति पत्नी के बीच अत्यधिक विवाद होते हैं, तो पूजा के दौरान लाल रंग के धागे या मौली को भगवान के सामने अर्पित करें और इस मौली को दोनों पति पत्नी अपने दाहिने कलाई पर बांध लें, इससे दोनों के बीच मनमुटाव कम होंगे और रिश्ते मधुर बनेंगे।

अगर पति पत्नी के बीच में कटुता एक सीमा से भी ज्यादा बढ़ गई है, तो आपको लगातार 11, 21 या 51 गुरुवार का व्रत रखकर भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहिए, जिससे आपके रिश्ते सामान्य हो सकें।

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को भोग के रूप में भीगे हुए चने और मुनक्के चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं, और आपकी सभी मनोकामना को पूरा करते हैं।

बृहस्पतिवार के दिन अगर ब्राम्हण को पीले रंग का अन्न, दान के रूप में दिया जाए, तो भी यह बेहद कारगर माना जाता है दाम्पत्य की स्थिरता बनाये रखने में।

इन उपायों को अपना कर आप अपना बिगड़ा हुआ बृहस्पति सुधार सकते हैं और सुखद वैवाहिक जीवन का आनंद ले सकते हैं। 

- विंध्यवासिनी सिंह 







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