WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 18, 2021   19:04
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WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

व्हाट्सएप की नई पाॅलिसी आने के बाद लोग खफा चल रहे थे और दूसरे प्लेफार्म पर जाना भी शुरू कर दिया। निगेटिव इम्पैक्ट देखकर व्हाट्सएप डैमेज कंट्रोल में जुट गया। ट्वीटर पर पोस्ट डालकर और अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर व्हाट्सएप लोगों को समझा रहा है कि आपकी चैट अभी भी सुरक्षित हैं।

पहले निबंध की शुरूआत एक लाइन के जरिये हुआ करती थी ''भारत एक कृषि प्रधान देश है''। मोबाइल क्रांति के बाद से स्थिति थोड़ी बदल सी गई। अब भारत व्हाट्सएप प्रधान देश भी बन चुका है। If you are not paying for it, you become the product ये अंग्रेजी की एक कहावत है। जिसका मतलब है कि अगर आप कोई प्रोडक्ट मुफ्त में ले रहे है तो इसका मतलब है कि आप खुद ही प्रोडक्ट हैं। व्हाट्सएप पर आए एक नोटिफिकेशन से ये बात जरूर साबित हो गई है। पिछले कुछ दिनों में दुनियाभर के करीब दो सौ करोड़ लोगों को व्हाट्सएप पर एक नोटिफिकेशन मिला। 

इस नोटिफिकेशन में कहा गया कि 8 फरवरी 2021 तक आपको जो शर्तें लिखीं हैं उसे स्वीकार करना होगा। अगर आप ये शर्तें स्वीकार नहीं करते तो आपका व्हाट्सएप एकाउंट बंद कर दिया जाएगा। 

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नोटिफेकेशन की शर्तें क्या थी- व्हाट्सएप आपके डेटा को फेसबुक के साथ शेयर करेगा।  जिसके लिया वो ग्रीन बटन के जरिये आपसे एग्री यानी इजाजत की मांग कर रहा है। फेसबुक ही व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी है। डेटा का मतलब है आपका फोन नंबर, आपके कांन्ट्रैक्ट्स और आपको व्हाट्सएप स्टेटस जैसी तमाम जानकारियां। ये डेटा व्हाट्सएप लेकर फेसबुक के साथ शेयर करना चाह रहा है। मतलब व्हाट्सएप आपकी कुछ चीजों की निगरानी करेगा और उसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर भी करेगा। व्हाट्सएप ये गौर करगेा कि आप कितनी देर आनलाइन रहते हैं, आनलाइन रहकर क्या करते हैं। कौन सा फोन इस्तेमाल करते हैं और किस तरह के कंटेट व्हाट्सएप पर पसंद करते हैं। क्या सबसे अधिक देखते हैं। सबसे अधिक जो कंटेट आप देखते होंगे वह बेसिक डेटा व्हाट्सएप थर्ड पार्टी यानी फेसबुक, इंस्टाग्राम को शेयर करेगा और फिर उसी से मिलता-जुलता कंटेट आपको दिखाया जाएगा। 

दरअसल, व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज इंड टू इंड इंक्रिप्शन की मदद से स्कियोर होते हैं। मान लीजिए कि दो लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे को भेजा हो। जैसे ही आप मैसेज भेजते हैं एक प्रोग्राम आपके मैसेज को एक जटिल कोड में बदल देता है। जिसे मैसेज भेजा गया है उसके फोन में वो कोड जाता है दोबारा मैसेज में बदल जाता है और जिसने वो मैसेज पढ़ा उसे समझ में आ जाता है कि सामने वाले ने मैसेज क्या भेजा। इस दौरान कोई भी मैसेज कहीं भी स्टोर नहीं होता। 

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व्हाट्सएप की नई पाॅलिसी आने के बाद लोग खफा चल रहे थे और दूसरे प्लेफार्म पर जाना भी शुरू कर दिया। निगेटिव इम्पैक्ट देखकर व्हाट्सएप डैमेज कंट्रोल में जुट गया। ट्वीटर पर पोस्ट डालकर और अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर व्हाट्सएप लोगों को समझा रहा है कि आपकी चैट अभी भी सुरक्षित हैं। 

व्हाट्सएप के विज्ञापन के अनुसार उनकी पाॅलिसी में बदलाव आपकी निजी चैट को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करते हैं। ये अपडेट सिर्फ बिजनेस अकाउंट से बात करने को लेकर है और वो भी वैकल्पिक है। आप चाहे तो व्हाट्सएप पर किसी भी बिजनेस से बात न करे और अगर ऐसा करते हैं तो व्हाट्सएप इस बातचीत को फेसबुक से साझा कर सकता है। फिर इसे आपकी जानकारी से जोड़कर आपके हिसाब से विज्ञापन दिखा सकता है। व्हाट्सएप का कहना है कि बाकी सारी चीजें पहले जैसी हैं। व्हाट्सएप ने ट्वीटर और विज्ञापन के जरिये ये बाते भी कहीं। व्हाट्सएप और फेसबुक न तो आपके प्राइवेट मैसेज देख सकता है न ही आपकी काॅल सुन सकते हैं। व्हाट्सएप इस बात रिकाॅर्ड नहीं रखता कि आप किसी चैट या काॅल कर रहे हैं। आप व्हाट्सएप पर जो लोकेशन दूसरे के साथ साझा करते हैं उसे न तो व्हाट्सएप देख सकता है और न ही फेसबुक। व्हाट्सएप आपको फोन में मौजूद कांट्रैक्ट्स को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करता है। व्हाट्सएप पर बने हुए ग्रुप प्राइवेट ही रहेंगे।

अब आते हैं प्राइवेट पाॅलिसी पर। व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम तीनों का प्रभुत्व मार्क जुकरबर्ग के पास है। वहीं उसके प्रतियोगी कहे या प्रतिद्वंद्वी गूगल के ही लोकेशन,क्लाउड, ड्राइव, जीमेल, यूट्यूब, गूगल एडसेंस हैं। गूगल को टक्कर देने या उसे पछाड़ने के लिए फेसबुक के द्वारा इस तरह की कवायदों को किया जा रहा है। साल 2009 में जब व्हाट्सएप मार्केट में आई तो उस वक्त किसी को भी टेक्सट मैसेज भेजने के लिए कम से कम एक रुपये की शुल्क देनी होती थी। उस वक्त फ्री मैसेज की सुविधा के साथ व्हाट्सएप आया। जिसकी मैसेज और काॅल को कोई रिकार्ड भी नहीं कर सकता तो प्राइवेसी के मामले में भी सही था। साल 2014 में फेसबुक ने 9 बिलियन डाॅलर में व्हाट्सएप को खरीद लिया। लेकिन जिस प्लानिंग के तहत व्हाट्सएप को फेसबुक ने खरीदा था वो मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद व्हाट्सएप और फेसबुक का ये पाॅलिसी वाला चक्कर सामने आया। 

यूट्यूब में विज्ञापन के जरिये जो भी पैसा आता है वो गूगल एडसेंस के जरिये। फेसबुक की भी चाहत इसी तरह के तरीके को अपनाने की है। मतलब विज्ञापन फेसबुक पर चलेगा लेकिन यूजर को व्हाट्सएप के जरिये लाया जाएगा। यूट्यूब पर कैटेगराइजेशन ज्य़ादा बेहतर है। जिस पर फेसबुक के रिसर्च किया।  यूट्यूब ने टाइटल, डिस्क्रिप्शन, टैग, थंबनेल आदि के माध्यम से पहले ही वीडियो से संबंधित सारी जानकारी पा ली। फिर ये डेटा के आधार पर गूगल एड सेंस कौन सा विज्ञापन दिखाना है तय करती है। ऐसी ही कुछ सोच फेसबुक की भी है। आप जो भी व्हाट्सएप पर कर रहे हैं वो इसकी जानकारी फेसबुक को देगा और फिर फेसबुक उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाएगा। ताकि फेसबुक का विज्ञापन भी रिलेवेंट हो सके।

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यूजर्स के विरोध पर फैसला टला

व्हाट्सएप के पाॅलिसी अपडेट से जुड़े फैसले के बाद लोग इसका भारी विरोध देखने को मिला। जिसके बाद व्हाट्सएप ने अपनी अपडेट पाॅलिसी को मई तक पोस्टपोन करने का फैसला किया। व्हाट्सएप का कहना है कि इससे यूजर्स को पाॅलिसी को समझने, इससे जुड़े कन्फ्यूजन दूर करने और इसे स्वीकार करने का मौका मिलेगा। कंपनी की तरफ से ब्लाॅग पोस्ट में यह बात कही गई। 

व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर हाईकोर्ट 

व्हाट्सएप की प्राइवेट पाॅलिसी को लेकर याचिकाकर्ता द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की गई। याचिका में कहा गया कि पाॅलिसी पर सरकार को एक्शम लेना चाहिए। साथ ही याचिकाकर्ता ने इसे निजता का उल्लंघन बताया। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर विस्तृत सुनवाई की बात करे हुई कोई नोटिस जारी नहीं किया। इसके साथ ही हाईकोर्टने कहा कि व्हाट्सएप एक प्राइवेट एप है। अगर आपकी निजता प्रभावित हो रही है तो आप इसे डिलीट कर दें। कोर्ट ने कहा क्या आप मैप या ब्राउजर इस्तेमाल करते है? उसमें भी आपका डाटा शेयर किया जाता है। 

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गूगल सर्च में व्हाट्सएप यूजर्स के नंबर 

तमाम तरह के विवाद चल ही रहे थे कि व्हाट्सएप को लेकर एक और विवाद सामने आया। कहा जा रहा है कि व्हाट्सएप यूजर्स के फोन नंबर इंडेक्सिंग के जरिये गूगल सर्च पर एक्सपोज कर दिए हैं। इससे पहले एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि व्हाट्सएप ग्रुप के लिंक भी गूगल पर सर्च किए गए थे। समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार गूगल सर्च में व्हाट्सएप यूजर्स के नंबर देखे गए हैं। गौरतलब है कि व्हाट्सएप को मोबाइल के अलावा लैपटाॅप और कंप्यूटर पर भी चलाया जाता है। यूजर्स के नंबर व्हाट्सएप वेब के जरिये लीक हुए हैं। मतलब साफ है कि अगर आप व्हाट्सएप को कंप्यूटर या लैपटाॅप पर इस्तेमाल करते हैं तो आपका कान्टैक्ट पब्लिकली गूगल सर्च स्क्राॅल में आ सकता है। जिससे यूजर्स के स्पैम और साइबर अटैक जैले जोखिम हो जाते हैं। 

कोरोड़ों की संख्या में भारतीय फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी प्लेटफार्म्स का यूज करते हैं। अगर ऐसे में अगर ऐसे ही चलता रहा तो लोगों का भरोसा व्हाट्सएप से घटता दिखाई देगा। प्राइवेसी वाले मसले के बाद तो कई लोगों ने व्हाट्सएर छोड़ टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एप्स का भी रुख किया था। बीते कुछ दिनों से जो भी हुआ उससे साफ प्रतीत होता है कि यूजर्स ने व्हाट्सएप को ये बता दिया कि आपकी मोनोपाॅली नहीं चलेगी। - अभिनय आकाश







नीरव मोदी प्रत्यर्पण: क्या है अब तक की कहानी, भारत वापसी में क्या रोड़ा?

  •  अभिनय आकाश
  •  फरवरी 27, 2021   18:30
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नीरव मोदी प्रत्यर्पण: क्या है अब तक की कहानी, भारत वापसी में क्या रोड़ा?

भारत के भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की अदालत से तगड़ा झटका लगा है।वेस्ट विंसर की कोर्टने नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने भारत में न्याय नहीं मिलने और सेहत के आधार पर नीरव मोदी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।

25 फरवरी को वो तारीख जब लंदन की कोर्ट ने वो बात कह दिया जो हम कोहिनूर के लिए बरसों से सुनना चाहते थे। मतलब, इसे भारत को लौटा दो। नीरव मोदी और माल्या के लिए भी हम ऐसा ही कुछ सुनना चाहते थे। हमारे देश का भगौड़ा नीरव मोदी कब आएगा? कितने किंतु-परंतु हैं उसके आने में लेकिन 25 फरवरी 2021 ब्रिटेन से खबर आई नीरव मोदी से जुड़ी की कोर्ट ने कह दिया है अपनी इसे ले जाओ। उसके बाद तो ऐसा हल्ला मचा कि मानों रात होते-होते नीरव मोदी को कॉलर पकड़कर भारत की जेल में ठूस दिया जाएगा। लेकिन जानकारों ने बताया इतना उत्तेजित होने की आवश्यकता नहीं है। अभी बहुत समय लगने वाला है। तो आइए मामला समझते हैं। 

पहला सवाल- लेटेस्ट क्या हुआ जो विपक्षी दलों की धराधड़ प्रतिक्रिया आने लगी?

कांग्रेस के नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने सवाल किया कि यह भारतीय एजेंसियों की सफलता है या ब्रिटेन के कानून की। उन्होंने कहा कि हम इसका स्वागत करते हैं। यूके कानून बधाई का पात्र है। वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता मीम अफजल ने कहा कि खबर के अनुसार ऐसा लग रहा है कि जैसे बहुत बड़ी कामयाबी भारत सरकार को मिल गई है और वो बहुत जल्द उसको वापस ले आएंगे। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि ये खबर ठीक नहीं है। 

जवाब- नीरव मोदी भाग गया भारत से 2018 में तब से बातें चल रही थी सरकार वापस लाएगी। नीरव मोदी वापस आएगा। किसरे नीरव मोदी की करीबी हैं नीरव मोदी ने किसके राज में पैसा बनाया है आदि इत्यादि। फिर मोदी जी ने नया नियम बनाया। दिवालिया कानूननका बहुत ही शानदार नियम और इसी के तहत नीरव मोदी भगोड़ा घोषित किया गया। फिर हमारी सरकार ने अंग्रेजों की सरकार से कहा नीरव मोदी हमारा मुजरिम है, हमें सौंप दो। मामला ब्रिटेन की कोर्ट पहुंचा। वहां भारत के भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की अदालत से तगड़ा झटका लगा है।वेस्ट विंसर की कोर्टने नीरव मोदी के भारत प्रतर्पण को मंजूरी दे  दी है। कोर्ट ने भारत में न्याय नहीं मिलने और सेहत के आधार पर नीरव मोदी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने माना की भारत में नीरव मोदी की कई मामलों में जवाबदेही है। 

फैसला सुनाते हुए लंदन की कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से संतृष्ट हैं कि नीरव मोदी को दोषी ठहराए जाने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं। 

शानो-शौकत वाले हीरा व्यापारी से लेकर भगोड़े तक का सफर

 25 फरवरी को भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में ब्रिटेन की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को जब निर्णय सुनाया तो वह अपने विरोधाभासों से भरे जीवन के 50 साल पूरे करने से महज दो दिन दूर था। गुजरात के एक हीरा कारोबारी का सदस्य नीरव मोदी यूरोप के आभूषणों के केंद्र बेल्जियम के एंटवर्प में बड़ा हुआ था पहले उसकी बड़ी बड़ी हस्तियों के साथ जान पहचान थी और उसके हीरों के डिजायन संबंधी कार्यक्रम में बड़े बड़े सितारे शामिल होते थे। पिछले साल प्रत्यर्पण सुनवाई के दौरान बड़े फ्रांसीसी ज्वैलरी विशेषज्ञ थीरी फ्रिटस्क ने कहा, ‘‘ मैं (भारत में) कार्यशाला में शिल्पकारिता से बहुत प्रभावित था।..’’ अदालत में सुनवाई के दौरान नीरव मोदी के वकीलों ने उसके अवसाद और मानसिक स्थिति को लेकर भी तमाम दलीलें दीं।

क्या-क्या आरोप हैं

हीरा व्यापारी नीरव मोदी पर आरोप  है कि उसने पंजाब नेशनल बैंक के साथ लगभग 11 हजार 345 करोड़ रुपये का घोटाला किया। इसके अलावा उसके खिलाफ भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के भी केस पेंडिंग हैं। भारत लगभग दो साल से नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा है। नीरव मोदी इस प्रत्यर्पण के खिलाफ ब्रिटेन में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। 2018 में भारत से भागने के बाद नीरव कई अज्ञात स्थानों पर रहा है। बाद में पता चला कि वो ब्रिटेन में है। उसे मार्च 2019 में प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया गया। ब्रिटेन में निचली अदालत या उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त करने के उसके प्रयास विफल रहे। इस वक्त वो लंदन की एक जेल में है। लंदन की कोर्ट ने नीरव मोदी की सभी दलीलें खारिज कर दी।  नीरव मोदी ने बैंक पीएनबी के साथ इस तरह के लेन-देन किए।

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कोर्ट यहां तो कोर्ट कचहरी वहां क्यों?

साल 2018 में भारत से भागने के बाद नीरव मोदी के ब्रिटेन में होने की खबर आई। ब्रिटेन की स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने 13 मार्च 2019 को लंदन से उसे गिरफ्तार किया। मध्य लंदन में एक बैंक की शाखा से 19 मार्च 2019 को एक प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया गया था। वह उस समय बैंक शाखा में नया खाता खुलवाने का प्रयास कर रहा था। वह लंदन में सेंटर प्वाइंट के पेंटहाउस इलाके में रह रहा था। वह नियमित रूप से अपने कुत्ते के साथ समीप की एक नयी ज्वैलरी दुकान में जाता था। बाद में सामने आया कि लंदन में वेस्टमिनिस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में हिरासत सुनवाई के दौरान उसने बुटिक लॉ एलएलपी की सेवा ली थी। तब से वह साउथ वेस्ट लंदन की वैंड्यवर्थ जेल में बंद है। नीरव ने अपने खिलाफ आए प्रत्यर्पण आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। हमारे यहां से एक आदमी बैंकों का इतना पैसा लेकर भागा है इसे पकड़कर हमें दे दीजिए। टेक्निकल शब्दों में इसे ही प्रत्यर्पण कहा जाता है। दो साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद डिस्टि्किट जज सैम्यूल गूजी ने फैसला सुनाया कि नीरव के खिलाफ कानूनी मामला है, जिसमें उसे भारतीय अदालत में पेश होना होगा। 

अब आगे क्या

यूके की कोर्ट के इस फैसले से ही नीरव मोदी को भारत वापस लाया जा सकेगा? जवाब है नहीं। कई कानूनी पेंचीदगियां अभी बाकी हैं। मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला अंतिम फैसला नहीं होगा। वेस्ट मिनस्टर कोर्ट के फैसले के बाद प्रत्यर्पण की फाइल को अब ब्रिटेन की गृह मंत्री के पास भेजा जाएगा। प्रत्यर्पण के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। वहीं नीरव मोदी के पास प्रत्यर्पण के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का अधिकारभी है। इन सब में कई महीने लग सकते हैं और हर जगह से हार चुकने के बाद भी वो विजय माल्या की तरह असायलम यानी शरण के लिए आवेदन कर सकता है ताकी उसे और समय मिल जाए। इन असायलम वाली याचिका पर निर्णय आने में कई महीने लग जाते हैं। इसका सीधा अर्थ है कि इस पूरी प्रक्रिया में अभी एक से दो साल और लग सकते हैंष अगर नीरव मोदी इस फैसले को चुनौती नहीं देता है को उसे एक महीने के भीतर ही भारत लाया जा सकेगा। 

सब हो जाएगा और नीरव मोदी को भारत लाया जाएगा तो क्या होगा। पंजीरी तो खिलाएंगे नहीं जेल भेजेंएंगे। मुंबई की प्रिवेंसन ऑफ मनी लॉऩ्ड्रिंग एक्ट के हिसाब से भगोड़ा नीरव मोदी, बैकों को 11 हजार कोरड़ का चूना लगाने वाला नीरव मोदी जिसके पीछे सीबीआई, ईडी जैसी देश की प्रमुख एजेंसियां पड़ी हैं। एक बार इनको भारत आने तो दीजिए इतने मुकदमें चलेंगे कि शानो शौकत में जिंदगी बिताने वाले हीरा कारोबारी को देश की बैंकों का पैसा लेकर फरार होने का इल्म हो जाएगा। 

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चलते-चलते आपको नीरव मोदी केस से जुड़ी और एक दिलचस्प जानकारी देते हैं। दरअसल, 

यूकी के जज ने भारत के सेवानिवृत जज अभय थिप्से और मार्केंडेय काटजू की तरफ से भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के समर्थन में एक्सपर्ट के रूप में राय को पूरी तरह से खारिज कर दिया। यूके जज ने मार्कडेय काटजू की गवाही पर भी सवाल खड़े किए। बता दें कि काटजू ने वेस्टमिंस्टर कोर्ट में एक्सपर्ट के रूप में नीरव मोदी के पक्ष में बाते कही थीं। उन्होंने कहा था कि भारत के जूडिशरी का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जांच एजेंसिया सरकार की ओर झुकाव रखती हैं। लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। जिसके बाद बारी थी यूके के जज गूजी के बोलने की और उन्होंने न केवल काटजू की टिप्पणी को अनुचित और हैरान करने वाला बताया बल्कि कहा कि मेरी नजर में उनकी राय निष्पक्ष और विश्वसनीय नहीं थी। यूके जज ने कहा कि काटजू ने भारतीय जूडिशरी में इतने ऊंचे ओहदे पद पर काम किया है। इसके बावजूद उनकी पहचान ऐसे मुखर आलोचक के रूप में रही है जिनका अपना एजेंडा होता है। मुझे उनके सबूत के साथ ही उनका व्यवहार भी सवालों के घेरे में लगा। 

बहरहाल, नीरव मोदी को लेकर ब्रिटेन की कोर्ट का फैसला आ गया और इसको लेकर देश में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। लेकिन इन सब के बीच नीरव मोदी के लिए भारत में जेल भी तैयार रखा गया है। 

आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के पक्ष में एक ब्रिटिश अदालत का फैसला आ जाने के साथ ही मुम्बई की आर्थर रोड जेल ने उसे रखने के लिए एक विशेष कोठरी तैयार कर ली है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। जेल अधिकारी ने बताया कि नीरव मोदी को यहां लाये जाने के बाद उसे अतिसुरक्षा वाले बैरक नंबर 12 की तीन कोठरियों में से एक में रखा जाएगा। -अभिनय आकाश







NSA डोभाल की अगुवाई में हुई प्लानिंग और बन गयी सहमति, जानें पाक के साथ बैक-डोर डिप्लोमेसी की कहानी

  •  अभिनय आकाश
  •  फरवरी 26, 2021   17:51
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NSA डोभाल की अगुवाई में हुई प्लानिंग और बन गयी सहमति, जानें पाक के साथ बैक-डोर डिप्लोमेसी की कहानी

चीन के बाद पाकिस्तान के साथ शांति की एक पहल दिखाई दे रही है। ये साउथ ईस्ट एशिया ही नहीं बल्कि एशिया पेसेफिक के लिए भी बड़ी बात है। लेकिन क्या हो गया आखिर ऐसा कि दोनों देशों के बीच इतनी आसानी से सहमति बन गई।

भारत और पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी नहीं करने पर राजी हो गए हैं। दोनों देशों के बीच साल 2003 का युद्ध विराम समझौता अब सख्ती के साथ लागू होगा। दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बात हुई और युद्ध विराम पर नए सिरे से सहमति बनी। युद्ध विराम का समझौता दोनों देश मानेंगे। चीन के बाद पाकिस्तान के साथ शांति की एक पहल दिखाई दे रही है। ये साउथ ईस्ट एशिया ही नहीं बल्कि एशिया पेसेफिक के लिए भी बड़ी बात है। लेकिन क्या हो गया आखिर ऐसा कि दोनों देशों के बीच इतनी आसानी से सहमति बन गई। एक रिपोर्ट की मानें तो इस्लामाबाद में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके समकक्ष ने सीमाओं पर शांति सुनिश्चित करने के लिए बैक-चैनल बातचीत करने के एक महीने बाद भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच बैठक में संघर्षविराम को लेकर फैसला किया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एनएसए डोभाल और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के नेशनल सिक्योरिटी डिविजन के स्पेशल असिस्टेंट मोईद सईद सीधे या फिर इंटेलिजेंस के वार्ताकारों के माध्यम से संपर्क में रहे हैं। दोनों देशों के डीएमआरओ के संयुक्त बयान इन वार्तालापों का पहला परिणाम है जिसमें किसी तीसरे देश में कम से कम आमने-सामने की बैठक भी शामिल थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित सरकार के शीर्ष नेताओं को ही केवल इस बात की जानकारी थी। पहला संकेत जो कि बैक-चैनल वार्ता के ट्रैक पर होने का पहला संकेत इस महीने की शुरुआत में आया था, 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने भारत के खिलाफ अपने कड़े बोल जारी रखे थे। लेकिन अचानक से 2 फरवीर को जनरल बाजवा ने भारत के साथ शांति का राग छेड़ दिया। जनरल बाजवा ने कहा कि पाकिस्तान और भारत को कश्मीर मुद्दे को गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहिए। इसके साथ ही हाल के हफ्तों में जम्मू और कश्मीर में सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन में कमी आई है।

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जिसके बाद ये समझौता सामने आया। दोनों देशों की सेना के एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों ही पक्ष नियंत्रण रेखा और दूसरे सेक्टर्स में सभी समझौतों, आपसी समझ और संघर्ष विराम का 24-25 फरवरी की मध्यरात्रि से सख्ती से पालन करेंगे। भारत और पाकिस्तान के डॉयरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के बीच 2003 के बीच भी सीजफायर को लेकर सहमचि बनी थी। साल 2018 में इसी तरह के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते की बड़ी बातें आपको बताते हैं। 

पाकिस्तान और भारत नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम, सभी समझौते, सहमति का कड़ाई से पालन करने और मौजूदा व्यवस्था के जरिए किसी भी ‘‘अप्रत्याशित स्थिति का समाधान करने या गलतफहमी को दूर करने’’ पर राजी हुए हैं। 

दोनों पक्ष बुधवार मध्यरात्रि से सभी समझौते, सहमति और एलओसी तथा अन्य क्षेत्रों में संघर्षविराम का कड़ाई से पालन करने पर सहमत हुए।

 दोनों पक्ष ने दोहराया कि ‘‘किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने या गलतफहमी दूर करने के लिए’’ हॉटलाइन संपर्क और ‘फ्लैग मीटिंग’ व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा। 

‘डॉन’ अखबार ने पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार के हवाले से कहा है, ‘‘1987 से ही भारत और पाकिस्तान के बीच हॉटलाइन स्तर पर संपर्क हो रहा है। इस स्थापित तंत्र के जरिए दोनों देशों के डीजीएमओ संपर्क में रहते हैं।’’ 

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अब एलओसी पर नहीं चलेगी गोली

  • पिछले साल पाकिस्तान ने 5133 बार युद्ध विराम का उल्लंघन किया था।
  • पिछले वर्ष पाकिस्तानी गोलीबारी में 21 नागरिकों की मौत हुई थी।
  • पिछले वर्ष की पाकिस्तानी गोलीबारी में 71 नागरिक घायल हुए थे। 
  • 2020 से सीमा पार से गोलीबारी में सुरक्षाबलों के 24 जवान शहीद हुए। 
  • 2020 में सीमा पार से गोलीबारी में 126 जवान घायल हुए। 

जम्मू कश्मीर में सीजफायर उल्लंघन

2018                   2019              2020

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2003 में मुशर्रफ और वाजपेयी के बीच हुआ था समझौता

90 के दशक में कश्मीर आतंकवाद के दौर से गुजर रहा था और पाकिस्तान इसका खुलकर समर्थन भी कर रहा था। पीओके और भारतीय सीमा से सटे पाकिस्तानी इलाकों में पाक सेना खुद आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चला रही थी। इसी दौरान भारत और पाक सेनाओं के बीच लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाएं सामने आ रही थी। साल 2002 का दौर था  भारत और पाकिस्तान कारगिल के बाद एक और जंग की ओर बढ़ रहे थे। इसकी वजह थी दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला। भारत ने पाकिस्तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई पर हमले की साजिश का आरोप लगाया था। जुलाई 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी और परवेज मुशर्रफ आगरा सम्मेलन के दौरान मिले। इस सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच तनाव में कुछ कमी देखने को मिली। आगरा समिट के बाद हुए संसद हमले के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी की पहल के बाद भारत और पाकिस्तान ने साल 2003 में एलओसी पर एक औपचारिक युद्धविराम का ऐलान किया था। भारत और पाकिस्तान के बीच 25 नवंबर 2003 की आधी रात से युद्धविराम लागू हुआ था। हालांकि सीजफायर की इन बढ़ती घटनाओं के बीच बीते 5 सालों में इसका कोई खास महत्व नहीं रह गया था। 25 नवंबर 2003 की आधी रात से भारत और पाकिस्तान के बीच लागू हुए युद्धविराम का मकसद एलओसी पर 90 के दशक से जारी गोलीबारी को बंद करना था। ये समझौता 450 मील लंबी एलओसी, इंटरनेशनल बॉर्डर और सियाचिन ग्लेशियर पर भी लागू हुआ। इस समझौते से दो दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मीर जफरुल्ला खान जमाली ने ईद के मौके पर युद्ध विराम की पेशकश की थी। युद्ध विराम के बाद ईद की मिठाईयां भी बांटी गई थी। नवंबर 2003 में वाजपेयी की पहल पर भारत ने जो सीबीएम पेश किए थे उनमें हवाई, रेल और समुद्री संपर्क के अलावा खेल-कूद संबंध जिनमें क्रिकेट श्रृंखला भी शामिल थे। दिल्ली और लाहौर के बीच ज्यादा बसें और श्रीनगर से पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद तक बस सेवा शुरू करना शामिल था। जनवरी 2004 को अटल बिहारी वाजपेयी सार्क की बैठक के लिए पाकिस्तान गए और दोनों देशों ने मिलकर एक साझा बयान भी जारी किया था। लेकिन पाकिस्तान की तरफ से लगातार इसका उल्लंघन होता रहा। अब एक बार फिर से बातचीत के बाद ये ठोस सहमति बनी है। 

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चीन से पेंगोंग पर समझौता

भारत और चीन के बीच एलएसी पर चले आ रहे गतिरोध के बाद बीते दिनों पेंगोंगे लेकर को लेकर सहमति बन गई। चीन की सेनाों पिछले साल की स्थिति में लौट गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में इस समझौते का ऐलान करते हुए कहा था कि दुनिया जान चुकी है कि हथियार की भाषा अब नहीं चलेगी। पेंगोंग में समझौते के बाद रिचीन ला और बाकी पोस्ट्स को लेकर भी भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स के बीच बातचीत हो रही है ताकि सेनाओं को पिछले साल के हालात में लौटाया जा सके और तनाव कम किया जा सके। 

घुसपैठ से बाज आएगा पाकिस्तान

डीजीएमओ लेवल की बातचीत के बावजूद भारत को सीमा पर चौकन्ना रहना होगा क्योंकि पीठ में खंजर घोपने और धोखबाजी की पाकिस्तान की पुरानी आदत है। अब भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या छल और धोखे के अपने पुराने इतिहास को क्या पाकिस्तान फिर दोहराएगा?- अभिनय आकाश







दिल्ली दंगों के 1 साल: हे भगवान ऐसी फरवरी कभी न आए!

  •  अभिनय आकाश
  •  फरवरी 25, 2021   17:12
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दिल्ली दंगों के 1 साल: हे भगवान ऐसी फरवरी कभी न आए!

दिल्ली दंगों को एक बरस पूरे हो गए। लेकिन आज भी उस दिन की बर्बरता और दहशत दिल्लीवालों के जेहन से गई नहीं। आग किसने लगाई और लगाई तो क्यों लगाई? किसकी दुकान में लगाई, किसकी छत से पत्थर बरसे। किसके घर से चली गोलियां।

कितनी मामूली हसरतें होती है एक साधारण आदमी की। मेहनत के पसीने से बरक्कत की दो रोटियां, गुजारे लायक छत, बच्चों को तालीम मिल जाए और सोते हुए खिड़कियों के कांच का टूट जाने का अंदेशा ना हो। डर न लगे घर से बाहर निकलते हुए। ईश्वर और अल्लाह के नाम पर उठाई हुई दीवार चकनाचूड़ ना कर दे आदमी होने का भ्रम। 23 फरवरी एक तारीख नहीं बल्कि एक सबक है जिससे ये साबित होता है कि हिंसा की आग मजहब नहीं देखती। अपनों को खोने का गम हर तबके का एक जैसा ही होता है। दिल्ली दंगों को एक बरस पूरे हो गए। लेकिन आज भी उस दिन की बर्बरता और दहशत दिल्लीवालों के जेहन से गई नहीं। दिल्ली में ऐसी नौबत क्यों आई? किसकी गलती थी? किसने शुरुआत की, किसके बयान ने भड़काया? सड़क बंद करने की वजह से दंगा हुआ। या सड़क खोलने की कोशिश में दंगा हुआ। आग किसने लगाई और लगाई तो क्यों लगाई? किसकी दुकान में लगाई, किसकी छत से पत्थर बरसे। किसके घर से चली गोलियां। ये तो बस सवाल हैं और इनके जवाब किसी को जिंदा नहीं कर सकते हैं। इनके जवाब राख से जीवन को वापस खड़ा नहीं कर सकते हैं। इनके जवाब नहीं हटा सकते वो गांठे जो दिलों में पड़ चुके हैं। लेकिन आखिर हुआ क्या ऐसा कि दिल्ली का दिल एक दूसरे की सलामती के लिए धड़कना बंद हो गया। दंगा भड़काने वाले सलाखों के पीछे पहुंचे जरूर हैं लेकिन नेताओं की जुबानी राजनीति के अखाड़े अब भी जारी हैं। पिछले एक बरस में जांच-पड़ताल जितनी आगे बढ़ी उतनी तेजी से दोनों तरफ के दिए गए बयानों पर सियासत भी जमकर हुई। यहीं वजह है कि दंगे के एक साल के बाद भी जख्म भरे नहीं है। 

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दिल्ली में कहां-कहां हुई थी हिंसा?

  • जाफराबाद
  • करावलनगर
  • भजनपुरा
  • चांदबाग
  • गोकुलपुरी
  • कर्दमपुरी
  • मौजपुर
  • बाबरपुर
  • यमुना विहार
  • खजूरी खास

पुलिस की जांच में क्या सामने आया

  • सीएए-एनआरसी के नाम पर विरोध के भड़कने वाले दंगों में 53 लोगों की जान गई। 
  • 400 से ज्यादा लोग घायल हुए।
  • 327 दुकानें जलकर खाक हुई।
  • 25 हजार करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई।
  • दिल्ली पुलिस ने 755 एफआईआर दर्ज किए।
  • 349 मामलों में चार्जशीट दायर हो चुकी है।
  • 406 केस में जांच चल रही है।
  • 755 मामलों में से 62 की जांच दिल्ली पुलिस की एसआईटी कर रही है और एक केस की स्पेशल सेल।
  • इसी केस में दंगों की सुनोयोजित साजिश की जांच में उमर खालिद जैसे लोगों की गिरफ्तारी हुई।
  • 1825 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 

23 फरवरी 2020 को गुजरात के अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी। एक दिन बाद अमेरिका राष्ट्रपति भारत आने वाले थे। पिछलेलकई हफ्तों से दिल्ली के शाहीन बाग में धरना चल रहा था। ऐसा ही धरना दिल्ली के मौजपुर में शुरू हुआ। मेट्रो लाइन के पास प्रदर्शनकारी बैठ गए। 22-23 फरवरी के दरमियान रात को जाफराबाद मेट्पो स्टेशन के पास भी रास्ता रोककर प्रदर्शन शुरू हो गए थे। सीएए आंदोलन के वक्त प्रदर्शन बनाम प्रदर्शन का दौर चला। सीएए के विरोध में भी रैलियां हो रही थी और पक्ष में भी। इसी तरह धरने का जवाब भी धरने से दिया जा रहा था। जाफराबाद मेट्रो के नीचे सीएए के विरोध में धरना और मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे रास्ता खुलवाने की मांग वाला प्रदर्शन जिसकी अगुवाई बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा कर रहे थे।

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 इसी दिन सीएए समर्थकों और विरोधियों में पत्थरबाजी शुरू हुई। पहले दिन पुलिसवालों समते कई जख्मी हुए लेकिन बात सिर्फ पत्थरबाजी तक सीमित नहीं रही। अगले दिन अहमदाबाद में ट्रंप की मेहमानवाजी चल रही थी और इसके बीच देश की राजधानी में पत्थरबाजी, आगजनी और गोलियां चल रहीथीष दंगा हो रहा था। पुलिस की गाड़ियों में आग लगाई जा रही थी, पेट्रोल पंप जलाए जा रहे थे और एक दूसरे का कत्ल होरहा था। मौजपुर और जाफराबाद के अलावा दिल्ली के भजनपुरा, चांद बाद और गोकुलपुरी जैसे इलाकों में हिंसा हुई। हालात पूरी तरह से काबू करने में एक हफ्ते का वक्त लगा। 26 फरवरी को शाम के साढे चार बज रहे थे। दिल्ली के सबसे ज्यादा हिंसा प्रभावित क्षेत्र में आंखों पर काला चश्मा, काले कोट और रौबदार अंदाज में सुरक्षाकर्मियों से घिरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की एंट्री होती है। डोभाल गाड़ी से नीचे उतरकर इलाकों में पैदल चलकर यहां के रहवासियों से मिलकर बात की उन्हें ये समझाने की कोशिश की कि सरकार हालात सामान्य करने की कोशिश में लगी है। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए उन्होंने कमान अपने हाथों में ले ली है। पुलिस ने हालात को अपनी मुट्ठी में लिया और यूं कहे कि काबू में ले लिया और ये कब हुआ जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उन हिंसाग्रस्त इलाकों में गए और फिर अगले दिन मौजपुरा इलाके में जाकर लोगों से बातचीत की और पूरी रिपोर्ट गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाई। 

दंगों के पीछे पीएफआई की भूमिका

उत्तर पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी से 26 फरवरी के बीच हुए दंगों में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में डो प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश की थी, उसमें इस बात का जिक्र  था कि दंगे में पीएउआई का भी हाथ था। इसके साथ ही पुलिस की स्पेशल सेल ने पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सक्रिय सदस्य मोहम्मद दानिश को गिरफ्तार किया और दिल्ली हिंसा में सुनियोजित होने की बात सामने आई। गिरफ्तारी के बाद दानिश ने कई खुलासे भी किए और बताया कि कैसे वह बाहर से लोगों को लेकर आया दिल्ली में दंगे कराए। दिल्ली की हिंसा में भूमिका निभाने वाला दानिश शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों को खाना बांटता था। इसके साथ ही जांच में प्रदर्शनकारियों के बीच पैसा भी बांटने का खुलासा हुआ। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पीएफआई के अध्यक्ष परवेज और सेक्रेटरी इलियास को भी गिरफ्तार किया। इन पर दिल्ली दंगों में फंडिंग करना का आरोप लगा। 

ताहिर हुसैन को भला कौन भूल सकता है

दिल्ली का खजूरी खास इलाका जहां ताहिर हुसैन का घर है। उन दिनों उसका घर दंगाईयों का अड्डा बन गया था। दिल्ली दंगों का उसे मास्टरमाइंड माना जाता है। इस वक्त वो जेल की सलाखों के पीछे है। उसके घर से पेट्रोल बम, बड़े-बड़े पत्थर, पत्थर फेंकने वाली बड़ी गुलेल मिले थे। पुलिस की चार्जशीट में ताहिर पर आरोप है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में 1.1 करोड़ रुपये शेल कंपनियों में ट्रांसफर करवाए फिर बाद में उन पैसों को कैश में ले लिया। ताहिर ने दंगे सिर्फ एक दिन पहले खजूरी खास थाने में जमा अपनी पिस्टल निकलवाई थी। ऐसा क्यों किया इसका ताहिर के पास जवाब नहीं मिला। पुलिस का दावा है कि खजूरी खास इलाके में रहने वाले ताहिर नॉर्थ ईस्ट दंगों के मास्टरमाइंड में से एक है। 

रतन लाल ड्यूटी पर थे और अंकित शर्मा ड्यूटी से लौट रहे थे...

तत्कालीन विंग कमांडर अभिनन्दन की तरह मूँछें रखने वाले हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल को पीट-पीट कर मार डाला गया था। रतनलाल को उन्मादी भीड़ द्वारा उस समय बेरहमी से मारा गया था, जब वह चाँद बाग के वजीराबाद रोड पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे। हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की पत्नी पूनम फिलहाल अपने तीन बच्चों के साथ जयपुर में रह रही हैं। बीबीसी ने उनसे बात की जिसमें रतन लाल की पत्नी ने घटना वाले दिन को याद करते हुए कहा कि उस समय बच्चों की परीक्षा चल रही थी तो बच्चे जल्दी उठकर तैयार हो गए थे। पूनम बताती हैं कि वो सोमवार का दिन था तो उनका व्रत भी था, सेब काटकर दिये और वो सिर्फ सेब खाकर ही ड्यूटी पर चल गए। बाद में पूनम को रतनलाल के मारे जाने की खबर पड़ोसियों से लगी। 

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जब-जब फरवरी आएगी, आएंगे तीज-त्यौहार अपने बेटे को याद कर अंकित की मां रोएंगी। क्योंकि उनका बेटा हाथों से एक झटके में पिसल गया। कहकर गया था कि अभी लौट आऊंगा। लेकिन लौटा नहीं। लौटी तो वो खबर जो जिंदगी भर टीस बनकर सीनों में उभरती रहेगी। नौजवान की ऐसी नृशंस हत्या के लिए कहां से आई इतनी नफरत की अंकित के जिस्म को चाकुओँ से इतनी बार गोदा गया कि दरिंदगी की सारी हदें पार हो गईं। अंकित का परिवार छह महीने पहले खजूरी खास से गाजियाबाद इलाके में शिफ्ट हो चुका है। बीबीसी से बात करते हुए अंकित के भाई अंकुर शर्मा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता है कि कैसा लगता था जब हम घर से बाहर निकलते थे और वो नाला पार करते थे। हर बार अंकित याद आता था। 

कितना बदला इलाका

पत्थर जिस्मों पर ज्यादा पड़े या अक्ल पर, आग दुकानों में ज्यादा लगे या दिलों पर। नुकसान संपत्ति का ज्यादा हुआ या भाई चारे का। जख्म जिस्मों पर ज्यादा लगे या मुल्क की रूह पर। दंगों की हिंसा के निशान तो शायद वक्त के साथ मिट भी जाएं लेकिन कलंक के वो दाग कैसे मिटेंगे जो दंगाईयों ने दिल्ली के माथे पर लगा दिए। पटरी से उतरी जिंदगी धीरे-धीरे वापस पटरी पर लौट रही है। लेकिन ये जवाब कौन देगा कि क्या वो लोग भी वापस घरों को लौटेंगे जो इन दंगों की भेंट चढ़ गए। 

सामानों से बाजार फिर सज जाएंगे, त्यौहार आएंगे तो रौनकों चहल पहल से गलियां फिर गुलजार हो जाएगी। लेकिन जिन लोगों की मौत दंगों में हुई उनके परिवार के जख्म एक साल बाद भी नहीं भर पाए। ज्यादातर के परिवार वालों ने वह जगह छोड़ दी है। वहीं एक साल बाद भी नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में एक साल बाद भी गलियों में हल्का सा शोर सुनाई देने पर लोगों के चेहरों पर दहशत की रेखाएं आज भी देखी जा सकती है। सबसे अधिक शिव विहार में ही मकानों और दुकानों को दंगाइयों ने आग के हवाले किया। यहां कि स्थिति ऐसी है कि लोग तो लौट आएं लेकिन काफी लोग हमेशा के लिए अपना मकान ही छोड़कर चले गए। भजनपुरा, मौजपुर, मुस्तफाबाद आदि इलाकों में अब लोहे के गेटों से लैस हो गई है। 

अंदेशों के अंधेरों से निकलर लोग तलाश रहे हैं सुरंग पार की रोशनी और देखने की कोशिश कर रहे हैं नए ख्वाब। मिटी हुई लकीरों पर फिर से विश्वास के महल खड़े करने को कोशिशें जारी हैं। लेकिन जो गुजरी है उसके अहसास के गुजरने में बरसों लगेंगे। कहने को कुछ भी कह ले हम और कुछ भी कह ले आप लेकिन वक्त लगेगा। जो बीता है उसे भरने में अभी लंबा वक्त लगेगा...अभिनय आकाश







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