मॉस्को में तय होगा खाड़ी युद्ध का भविष्य, पुतिन का मास्टरस्ट्रोक

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अभिनय आकाश । Apr 3 2026 1:53PM

ईरान की जो युद्ध लड़ने की कला है अब ड्रोन पे की गई है। वर्टिकल युद्ध ईरान ने शुरू कर दिया है। उसके बाद कहा जा रहा है कि ट्रंप और पुतिन के बीच में जो है उनके दूतों के माध्यम से बातचीत हुई है और पुतिन ने कुछ शर्तें रखी हैं।

मिडिल ईस्ट में जो जंग जारी है उसमें भले तीन देश उलझे हुए हैं। ईरान, इजराइल और अमेरिका। साथ ही साथ खारी के देश भी उलझे हुए हैं। लेकिन इसका सबसे बड़ा विनर सबसे बड़ा बाजीकर्ता जो कहते हैं यानी बाजीगर वो रूस है। उसके सबसे बड़ा फायदा जो है व्लादमीर पुतिन को मिल रहा है। व्लादमीर पुतिन जो चार से पांच साल से यूक्रेन में जंग लड़ रहे हैं और जो धैर्य दिखा रहे थे युद्ध खत्म नहीं हो रहा था। अमेरिका यूक्रेन की मदद कर रहा था। अब ऐसा लग रहा है कि बदला लेने की बारी जो है पुतिन की है। यानी क्या पुतिन तय करेंगे कि ईरान, इजराइल जंग किस ओर जाएगा और ट्रंप क्या करेंगे? यानी कि जो दूसरा विश्व युद्ध या तीसरा विश्व युद्ध कहा जा रहा था या जिसे तीसरा शीत युद्ध कहा जा रहा था उसके बाजीगर जो है पुतिन है। अब वो नियम डिसाइड करेंगे कि किधर जाने वाला है और ट्रंप का भविष्य क्या होगा। ट्रंप के सामने पुतिन ने वह शर्त रखी है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि ट्रंप के लिए मना करना मुश्किल है और ट्रंप शायद वह मान भी गए हैं। हालांकि इतनी जल्दी वो नहीं मानेंगे समय लगेगा लेकिन उन्हें आखिरकार ट्रंप की वो बात माननी ही होगी जो पिछले हफ्ते पुतिन ने अपने दूत के हवाले से दिया था।  ट्रंप ईरान में हमले करके या जंग छेड़ के बुरी तरीके से फंस गए हैं। उनको बाहर निकलने का मौका नहीं मिल रहा है। एक फेस सेविंग नहीं मिल रही है कि कैसे इस जंग से बाहर निकले। वो सत्ता में जब दूसरी बार आए थे तो अपने कैंपेन में अपने मेगा सपोर्टर्स को यह कह करके आए थे कि वो दूसरी जंग या कोई नई जंग की शुरुआत नहीं करेंगे। लेकिन जिस तरीके से इजराइल के कहने पर ईरान पे हम उन्होंने हमले किए और उसके बाद जब स्टेट ऑफ हार्मोस बंद हुआ लगातार उनकी जो आपूर्ति गोला बारूद की है मिसाइल की है उनके जो सहयोगी देश है खारी के उन पे हमले शुरू हुए चीखें निकली तो इससे निकलने का मौका नहीं मिल रहा है आखिर बूट्स ऑन द ग्राउंड करेंगे तो उसके भी बॉडी बैग्स तो आएंगे जो इराक में हुआ था अफगानिस्तान में हुआ था। 

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ईरान जंग रुकवाने को रूस तैयार

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने गुरुवार को कहा कि रूस ईरान संघर्ष के समाधान में योगदान देने के लिए तैयार है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत जारी रखे हुए हैं। पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति इन संपर्कों को जारी रखे हुए हैं, और यदि किसी भी तरह हमारी सेवाओं की आवश्यकता होती है, तो हम निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करने में अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं कि सैन्य स्थिति जल्द से जल्द शांतिपूर्ण मार्ग पर अग्रसर हो। पेस्कोव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान युद्ध पर राष्ट्र के नाम दिए गए भाषण और नाटो से अमेरिका को बाहर निकालने पर विचार करने संबंधी उनके अलग बयान के बारे में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।

पेस्कोव ने कहा कि रूस नाटो को एक शत्रुतापूर्ण गठबंधन के रूप में देखता है।

पुतिन की क्या शर्ते हैं

ईरान की जो युद्ध लड़ने की कला है अब ड्रोन पे की गई है। वर्टिकल युद्ध ईरान ने शुरू कर दिया है। उसके बाद कहा जा रहा है कि ट्रंप और पुतिन के बीच में जो है उनके दूतों के माध्यम से बातचीत हुई है और पुतिन ने कुछ शर्तें रखी हैं। पुतिन ने क्विट प्रोक वाली नीति अपनाई है। यह वो नीति है जिसके तहत एक हाथ दो दूसरे हाथ लो। यानी कि कुछ तुम दो कुछ हम दें। इसके तहत ईरान में जो रूस मदद कर रहा है ईरान को वह मदद मदद बंद कर देगा। अगर ट्रंप  यूक्रेन की मदद करना बंद कर देते हैं। यानी कि पुतिन ने कहा कि आप यूक्रेन जंग से हाथ पीछे खीचेंगे। फंडिंग-हथियार देना बंद करेंगे। तो हम भी ईरान को मदद करना बंद करेंगे।  ईरान की जो सैन्य ताकत है बहुत हद तक खत्म हो गई है। जिस तरीके से ईरान इजराइली अमेरिकी जहाज फाइटर जेट्स धरले से जाते हैं बिना रडार की नजर में आए हुए बमबारी करते हैं और वापस चले जाते हैं। ईरान को पता तक नहीं चलता क्योंकि उसका एयर डिफेंस सिस्टम पहले ही जून में खत्म हो गया था। इस बार भी पहले ही दिन खत्म हो गया 28 फरवरी को। 

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रूस कैसे कर रहा ईरान की मदद

वलोडिमिर ज़ेलेंस्की का कहना है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि रूस ने ईरान को मिसाइल या ड्रोन हमले के लिए उस विमान के सटीक निर्देशांक मुहैया कराए थे, ग्रॉसफेल्ड ने यह बात बताई। ज़ेलेंस्की ने एनबीसी न्यूज़ को राफ सांचेज़ के साथ एक वीडियो इंटरव्यू में बताया कि ईरान द्वारा हमले से कुछ दिन पहले रूस ने सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान बेस की तीन बार सैटेलाइट तस्वीरें ली थीं। लंदन के किंग्स कॉलेज में रूस द्वारा पश्चिम के खिलाफ चलाए जा रहे गुप्त युद्ध और विश्वव्यापी खुफिया अभियानों की एक प्रमुख विशेषज्ञ एलेना ग्रॉसफेल्ड कई प्रभावशाली लेख लिखे हैं, का कहना है कि रूस के इमेजिंग सैटेलाइट AWACS पर ईरानी हमले के लिए सटीक निर्देशांक प्रदान कर सकते थे। चार हफ्ते पहले सऊदी अरब के Prince Sultan Air Base पर हुए एक हमले में अमेरिकी सेना के 26 वर्षीय जवान बेंजामिन पेनिंगटन की मौत हो गई। वे U.S. Army Space and Missile Defense Command में तैनात थे और 1 मार्च को हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके एक सप्ताह बाद उनका निधन हो गया। पेनिंगटन को Global War on Terrorism Service Medal से सम्मानित किया गया था और वे 10 जून 2025 को 1st Space Battalion, 1st Space Brigade में नियुक्त हुए थे।

स्पेसएक्स-स्टारलिंक सिस्टम निशाने पर

विशेषज्ञ ग्रॉसफेल्ड के अनुसार रूस और ईरान के बीच रक्षा और हथियार तकनीक को लेकर कई दशकों से सहयोग रहा है, खासकर ईरान के मिसाइल विकास कार्यक्रम में। हालांकि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि रूसी विशेषज्ञ ईरान को ICBM या एंटी-सैटेलाइट मिसाइल बनाने में सीधे मदद कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका सरकार इन बढ़ते रक्षा संबंधों पर नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के हमलों के बाद ईरान ने रूस को ड्रोन, गाइडेड बम, तोपखाने का गोला-बारूद और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें भेजीं, जिसके बदले रूस ने ईरान को मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयर डिफेंस तकनीक में अभूतपूर्व सहयोग देना शुरू किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस और ईरान मिलकर ऐसे हथियार प्लेटफॉर्म विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं जो SpaceX Starlink सैटेलाइट सिस्टम को निशाना बना सकें।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक

ईरान में अवैध रूप से तस्करी करके लाए गए स्टारलिंक टर्मिनल रखने या इस्तेमाल करने वालों को कड़ी सजा, यहां तक कि मौत की सजा तक का सामना करना पड़ सकता है। ये टर्मिनल उन लोगों के लिए इंटरनेट का जरिया बन रहे हैं जो सरकार द्वारा लगाए गए इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद दुनिया से जुड़ना चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने ईरान की मदद की है ऐसे ड्रोन विकसित करने में जो छतों पर छिपाए गए Starlink उपकरणों का पता लगा सकें, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक भी दी है जिससे सैटेलाइट और जमीन पर मौजूद रिसीवर के बीच सिग्नल को जाम किया जा सके। विशेषज्ञ ग्रॉसफेल्ड का मानना है कि अगर ईरान इस तकनीक में सफल होता है, तो रूस भी यूक्रेन में अपने युद्ध के दौरान Starlink सिस्टम को निशाना बनाने के लिए इन्हीं तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है।

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