आंसुओं के दरवाजे पर बैठा ईरान का गब्बर, इस तुरुप के इक्के से घबरा गया अमेरिका, Bab al-Mandeb बंद हुआ तब तो मंदी छा जाएगी…

ट्रंप की दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। बेंजामिन नेतन्याहू के अलावा कोई साथ आ नहीं रहा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रंप से पूछेंगे कि ऑब्जेक्टिव क्या है? कारण जाने बिना ऑस्ट्रेलिया हाथ नहीं जलाना चाहता। यही काम नेटो ने भी ट्रंप के साथ किया है। सीधे मना करने की हिम्मत उनमें नहीं है। लेकिन वो भी फिगर आउट ही कर रहे हैं कि ट्रंप करना क्या चाहते हैं।
साल 1987 का दौर जब ट्रंप जब अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बल्कि एक अमीर बिजनेसमैन हुआ करते थे। उस दौरान वो ईरान पर हमले की बात करते नजर आए। ट्रंप ने कहा कि हमें ईरान पर हमला करके उनके ऑयल रिजर्व्स पर कब्जा करना चाहिए। जब इंटरव्यू कर रही महिला पत्रकार उनसे पूछती हैं कि आप ये करेंगे कैसे? क्या सीधा हमला होगा? इस पर ट्रंप कहते हैं हां हमला होगा। मिडिल ईस्ट में एक जंग छिड़ेगी और अमेरिका को ना केवल ईरान के ऑयल रिजर्व पर कब्जा करना है बल्कि उस कब्जे को बनाकर भी रखना है ताकि उससे वसूली किया जा सके। उस नुकसान की वसूली जो ईरान ने अमेरिका का किया। यानी इससे साफ होता है कि ट्रंप के दिल में ईरान पर चढ़ाई का विचार हमेशा से था। अब जब वो राष्ट्रपति बन गए हैं तो जैसा पैसा आने पर आदमी बचपन के सपने पूरे करने की कोशिश करता है। गैर जरूरी चीजें भी खरीदता है कि बचपन में नहीं ले पाया अब खरीदूंगा पैसा है। वैसे ही ट्रंप भी ट्राई कर रहे हैं क्योंकि अब पावर है।
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जंग में कौन उतरा, अमेरिका घबराया
ट्रंप की दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। बेंजामिन नेतन्याहू के अलावा कोई साथ आ नहीं रहा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रंप से पूछेंगे कि ऑब्जेक्टिव क्या है? कारण जाने बिना ऑस्ट्रेलिया हाथ नहीं जलाना चाहता। यही काम नेटो ने भी ट्रंप के साथ किया है। सीधे मना करने की हिम्मत उनमें नहीं है। लेकिन वो भी फिगर आउट ही कर रहे हैं कि ट्रंप करना क्या चाहते हैं। तो एक तरफ ट्रंप की टीम में कोई आ नहीं रहा और दूसरी तरफ ईरान की टीम में उस खिलाड़ी की एंट्री हो चुकी है जिसका ईरान को इंतजार था। 29 मार्च को यमन की हूती सरकार जंग में शरीक हो गई। उसने इजराइल पर मिसाइलें दागना शुरू कर दिया। 29 मार्च को इस सरकार के प्रवक्ता याया सरी ने जंग में आधिकारिक तौर पर शामिल होने की घोषणा की। यह भी बताया कि उन्होंने इजराइल पर क्रूज मिसाइल से हमला किया है और आने वाले दिनों में हमले जारी रहेंगे।
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ईरान का एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस
हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया समुदाय ज़दी के हथियारबंद लड़ाके का एक गुट है। 1990 में यह गुट बना था। 2014 में हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। जिसके बाद वहां की सरकार को देश छोड़कर भागना पड़ा। तब से यमन में गृह युद्ध जारी है। आज के समय में यमन के बड़े हिस्से में हूती विद्रोहियों का कब्जा है। इसमें मुख्य तौर पर पश्चिमी इलाके हैं। इन हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है। ईरान इनके जरिए यमन में प्रॉक्सी वॉर भी लड़ता आया है। ईरान ने हूती विद्रोहियों की तरह पूरे पश्चिमी एशिया में ऐसे घुटों का एक नेटवर्क खड़ा कर रखा है। इसे एक्सेस ऑफ रेजिस्टेंस कहा जाता है। हूतियों के अलावा फिलिस्तीन का हमास और लेबनान का हिजबुल्ला इसमें शामिल है। ईरान की तरह ही इन तीनों गुटों का मुख्य दुश्मन इजराइल और अमेरिका है। अब इस वक्त इजराइल ने ईरान के साथ लिबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ भी जंग झेल रखी है। लगातार उसके ठिकानों पर हमला कर रहा है। वहीं 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजराइल ने हमास के खिलाफ जो मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था, उसमें हमास की लगभग पूरी लीडरशिप को खत्म किया जा चुका है। गजा में उसके नेटवर्क को तबाह कर दिया गया था। इस दौरान इसराइल ने हूतियों को भी नुकसान पहुंचाया। उनके प्रधानमंत्री से लेकर चीफ ऑफ स्टाफ तक को खत्म कर दिया गया। लेकिन इजराइल हूतियों के प्रमुख अब्दुल मलिक अलूती को अब तक ढूंढ नहीं पाया है।
ईरान की इस नई चाल से दुनिया के सामने संकट क्यों खड़ा हो सकता है?
ईरान अमेरिका के बीच 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में अब तक हूती नहीं उतरे थे। ईरान ने खुद मोर्चा संभाल रखा था। उधर हिजबुल्ला और इजराइल भिड़े हुए हैं। लेकिन पहली बार 29 मार्च को इस जंग में हूतियों ने एंट्री मारी। इजराइल पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। नेपोलियन बोनापार्ट ने कहा था पॉलिसी ऑफ़ अ स्टेट लाइफ इन इट्स ज्योग्राफी। यानी किसी राज्य की नीति उसकी ज्योग्राफी से तय होती है। ईरान के मामले में यह बात एकदम सटीक बैठती है। ईरान की मिलिट्री ताकत से कहीं ज्यादा है उसकी ज्योग्राफी की ताकत। यह बात उसने स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस को बंद करके साबित भी कर दी है। जहां उसने केवल कुछ माइंस और ड्रोंस के जरिए दुनिया के सबसे क्रिटिकल शिपिंग रूट को एक महीने से बंद कर रखा है। अब इसी ज्योग्राफी के कारण ईरान समर्थित हुती विद्रोही पूरी दुनिया पर इससे भी बड़ा संकट खड़ा कर सकते हैं।
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क्यों कहा जाता है आंसुओं का दरवाजा
असली कहानी जो है इन मिसाइल से बहुत बड़ी है क्योंकि हूतियों के पास एक ऐसा हथियार है जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। बाबल मंदप आंसुओं का दरवाजा। यह दुनिया का सबसे अहम ट्रेड रूट है। लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यूरोप से एशिया का वही शॉर्टकट है जिस पर सुएस कैनाल है इजिप्ट में। बाब अल-मंदब एक अरबी नाम है, जिसका मतलब होता है “आंसुओं का दरवाजा”। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग (स्ट्रेट) है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। लगभग 100 किलोमीटर लंबा और 30 किलोमीटर चौड़ा यह जलमार्ग यमन को अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के देशों जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है। एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों को स्वेज नहर तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है, इसलिए इसका रणनीतिक और आर्थिक महत्व बहुत अधिक है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग 10–12% शिपमेंट इसी मार्ग से गुजरते हैं। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार का करीब 12% हिस्सा और स्वेज नहर से गुजरने वाले लगभग 40% कंटेनर ट्रैफिक भी इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर करता है। इसी वजह से बाब अल-मंदब को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है।
बाबल मंदब में ब्लॉकेट कैसा होगा?
हूतियों के पास यमन की सेना के वॉर रिजर्व्स का बड़ा हिस्सा है। इन्हीं के दम पर उन्होंने गजा पर इजराइली हमले के दौरान बाबल मंदिर में इंटरनेशनल शिपिंग को टारगेट किया था। तब रास्ता पूरी तरह बंद बिल्कुल नहीं हुआ था। लेकिन ढेर सारा ट्रैफिक अफ्रीका घूम कर जा रहा था। हफ्ते भर में एक जहाज पर एक मिसाइल दागनी है हूतियों को या समंदर में माइन बिछानी है, ड्रोन से अटैक करना है। इतना काफी होगा पूरी शिपिंग को पैरालाइज करने के लिए क्योंकि एक के साथ होगा तो कोई दूसरी कंपनी रिस्क नहीं लेना चाहेगी और जैसे ही शिपिंग अफेक्ट होगी वैश्विक व्यापार के एक बड़ी नस पे प्रेशर पड़ जाएगा। जैसे ईरान के लिए तुरप का पत्ता हॉर्मूज है, वैसे ही हूतियों के लिए बाबेल मंदब है और तुरप का पत्ता ऐसे ही नहीं चला जाता है। अगर ट्रंप वाकई हॉर्मूज के आइलैंड्स पर खून बहाने का रिस्क लेंगे और अगर वह खार्ग पर कब्जा ही कर लेंगे तब एक बारगेनिंग चिप की जरूरत ईरान को पड़ेगी। वरना ईरान को बिना किसी रिजल्ट के पीछे हटना होगा। ईरान और हुती जब तक बहुत जरूरी नहीं होगा। बाबल मंदब को एक तरह की धमकी तरह इस्तेमाल करेंगे ब्लॉकेज उनका लास्ट ऑप्शन होगा।
भारत के लिए कितना अहम है बाब अल-मंदब
बाब अल-मंदब भारत के लिए बेहद रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, और तेल-गैस की बड़ी खेप इसी रास्ते से होकर आती है। अगर इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट या तनाव पैदा होता है, तो ईंधन की सप्लाई में देरी हो सकती है, आयात महंगा हो सकता है और इसका सीधा असर उद्योगों, परिवहन लागत और आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है। इसके अलावा, यूरोप के साथ भारत का व्यापार भी काफी हद तक इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर करता है। यह मार्ग एशिया और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी का अहम हिस्सा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
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