77th Republic Day: क्यों खास है मुख्य अतिथि की भूमिका और भारत की कूटनीति

77th Republic Day
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Ankit Jaiswal । Jan 27 2026 8:55PM

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि की परंपरा देश की विदेश नीति की दिशा को दर्शाती है, जिसकी शुरुआत 1950 में हुई थी। इस बार यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित करना यह संकेत देता है कि भारत अपने व्यापारिक और रणनीतिक हितों के लिए वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों को गहरा कर रहा है।

देशभक्ति के माहौल के बीच भारत 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। बता दें कि यही वह दिन है, जब भारत ने अपना संविधान लागू किया और औपचारिक रूप से एक संप्रभु गणराज्य बना हैं। इस अवसर पर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन होगा, जहां सेना की टुकड़ियां कदमताल करेंगी, टैंक और हथियार प्रणालियां गुजरेंगी और आसमान में वायुसेना के लड़ाकू विमान करतब दिखाएंगे।

गौरतलब है कि परेड जितनी अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है, उतनी ही चर्चा उस खास मेहमान की भी होती है, जो राष्ट्रपति के ठीक बगल में बैठता है। इस साल भारत ने यूरोपीय संघ को विशेष महत्व देते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया हैं। यह कदम भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में बढ़ती नजदीकी का संकेत माना जा रहा है।

गणतंत्र दिवस परेड की परंपरा 1950 से चली आ रही है, जब पहले मुख्य अतिथि के तौर पर इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो शामिल हुए थे। शुरुआती वर्षों में भारत ने नवस्वतंत्र देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी, जो उस समय के अतिथियों की सूची में साफ झलकता है। समय के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और पड़ोसी देशों के शीर्ष नेता भी इस आयोजन का हिस्सा बनते रहे हैं।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्य अतिथि का चयन केवल शिष्टाचार नहीं होता, बल्कि यह भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है। पूर्व राजनयिकों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय संभावित नामों की सूची तैयार करता है, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय अंतिम फैसला लेता है। इसमें रणनीतिक हित, क्षेत्रीय संतुलन और उस नेता की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।

जानकारों का कहना है कि इस बार यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी यह बताती है कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारों के साथ रिश्तों को और मज़बूत करना चाहता है। ऐसे समय में, जब भारत अमेरिका और यूरोप दोनों के साथ व्यापार वार्ताओं में शामिल है, यह संदेश काफी अहम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत का गणतंत्र दिवस दुनिया के अन्य देशों के सैन्य परेड से अलग पहचान रखता है। जहां कई देश युद्ध में मिली जीत को याद करते हैं, वहीं भारत अपने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का उत्सव मनाता है। यही वजह है कि इस परेड में सैन्य शक्ति के साथ-साथ सांस्कृतिक झांकियां और राज्यों की विविधता भी देखने को मिलती है।

पूर्व अधिकारियों का अनुभव बताता है कि यह आयोजन विदेशी मेहमानों पर गहरी छाप छोड़ता है। कई नेता भारत की सैन्य परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों को लंबे समय तक याद रखते हैं।

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