जहां गिरी थी भारत की ब्रह्मोस, वहां पाकिस्तान ने फिर किया बड़ा कांड

रिपोर्ट्स के मुताबिक ये तस्वीरें अप्रैल 2026 की हैं। पाकिस्तान के बेहद अहम नूर एयर खान बेस पर खड़ा एक ऐसा विमान दिख रहा है जिसका रंग और डिज़ाइन पाकिस्तान एयरफोर्स के बाकी विमानों से बेहद अलग है। विमान पर रेगिस्तानी इलाके में इस्तेमाल होने वाला सैंड कैमोफ्लाज़ पेंट किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान आमतौर पर ग्रे रंग के सैन्य विमान इस्तेमाल करता है। जबकि यही खास पैटर्न ईरान की एयरफोर्स अपने C130 विमानों में इस्तेमाल करती है।
पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को लेकर बड़ा खुलासा अब सामने आया है। जिसने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। चीन की सेटेलाइट तस्वीर कंपनी ने एक ऐसी तस्वीर जारी की है जिसमें एयरबेस पर संदिग्ध C130 हरकुलस विमान दिखाई दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह विमान ईरान का हो सकता है। इस खबर के सामने आते ही अमेरिका सहित कई देशों में बहुत ज्यादा चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये तस्वीरें अप्रैल 2026 की हैं। पाकिस्तान के बेहद अहम नूर एयर खान बेस पर खड़ा एक ऐसा विमान दिख रहा है जिसका रंग और डिज़ाइन पाकिस्तान एयरफोर्स के बाकी विमानों से बेहद अलग है। विमान पर रेगिस्तानी इलाके में इस्तेमाल होने वाला सैंड कैमोफ्लाज़ पेंट किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान आमतौर पर ग्रे रंग के सैन्य विमान इस्तेमाल करता है। जबकि यही खास पैटर्न ईरान की एयरफोर्स अपने C130 विमानों में इस्तेमाल करती है।
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यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान अपने एयरबेस में ईरानी सैन्य विमानों को छिपा कर रख रहा है। कुछ अमेरिकी रिपोर्ट्स में पहले भी आशंका जताई गई थी कि पाकिस्तान गुप्त रूप से ईरान को मदद पहुंचा रहा है और इसके विमानों को सुरक्षित जगह दे रहा है। इस पूरे मामले में इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन के दौरे पर जा रहे हैं। ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति सी जिनपिंग की मुलाकात से पहले इन तस्वीरों का सामने आना बेहद अहम माना जा रहा है।
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माना जा रहा है कि चीन ने जानबूझकर यह तस्वीरें जारी की है ताकि पाकिस्तान की भूमिका दुनिया के सामने लाई जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह साबित हो जाता है कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी तो अमेरिका बेहद नाराज हो सकता है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक और सैन्य मदद के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है। ऐसे में यह खुलासा उसके लिए बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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