आंतरिक सर्वे के सहारे इतिहास दोहराने के प्रयास में AAP

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jun 6 2019 5:56PM
आंतरिक सर्वे के सहारे इतिहास दोहराने के प्रयास में AAP
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साल 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आप के सामने पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस चुनाव में चुनौती बढ़ गई है। केंद्र की सत्ता पर दोबारा प्रचंड बहुमत के साथ काबिज भाजपा देश के दिल को जीतने में पूरी जान लगा देगी वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अपनी खोई हुई जमीन और अपने कोर वोटरों को कुछ हद तक आप से वापस छीनने में कामयाबी हासिल की है।

सबसे खतरनाक होता है, मुर्दा शांति से भर जाना। घर से निकलना काम पर और काम से लौटकर घर जाना। सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना। अवतार सिंह पाश की यह कविता दिल वालों की दिल्ली के ऊपर एकदम मुफीद बैठती है। दिल्ली ने पिछले पांच बरस कई सपने देखे इन सपनों के आसरे उम्मीद, भरोसा और शायद राजनीतिक परिवर्तन का भी जिक्र होता था। लेकिन 2020 से पहले दिल्ली का मिजाज क्या कहता है इसे जानने की लालसा में सूबे की तख्त पर बैठी आम आदमी पार्टी ने आंतरिक सर्वे कराने का निर्णय लिया। लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी की सुनामी से दिल्ली दरबार भी अछूता नहीं रहा। दिल्ली की सात सीटों पर भाजपा ने जबरदस्त जीत दर्ज की और सात में से छह सीटों पर तो मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा। सिर्फ उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी दूसरे स्थान पर रही। लेकिन भाजपा उम्मीदवार और आप प्रत्याशी के मतों का फासला साढ़े पांच लाख के लगभग का रहा।


लोकसभा चुनाव में हुई भीषण पराजय के बाद अरमानों और सपनों के सहारे सत्ता पर सवार होने वाली आम आदमी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए खुद को संवारने और संभालने में लग गई है। दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर पराजय झेलने के बाद टीम केजरीवाल फिर से पांच साल राज करने के लिए सियासी तैयारी में जुट गई है। आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले वोटों के आधार पर विधायकों के प्रदर्शन का आकलन करने की बजाए विधायकों की स्थिति जानने के लिए आंतरिक सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसी के आधार पर विधायकों के काम की समीक्षा होगी। इसमें विधायकों द्वारा क्षेत्र के विकास कार्य कराने की तत्परता और जनता के साथ उनके व्यवहार के आधार पर टिकट वितरण किया जाएगा। ऐसे में आप के आधे विधायकों पर टिकट कटने का खतरा मंडरा रहा है। पार्टी ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को यह जिम्मेदारी दी है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के सभी विधायकों को अपने क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशियों को जितवाने के लिए कहा था। लेकिन मोदी तो मोदी हैं और इस प्रचंड सुनामी में आप के प्रत्याशी कहीं भी टिक न पाए। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों पर गौर करें तो 2014 के चुनाव में सभी सीटों पर तीसरे स्थान पर खिसकने वाली कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले अपनी स्थिति को बेहतर किया। नतीजतन आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर खिसक गई। गौरतलब है कि 2014 के चुनाव में भाजपा को 46.40 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे और सूबे की सातों सीटें उनके नाम हो गई थी। वहीं पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने 32.50 प्रतिशत वोट के साथ सीटें तो एक भी हासिल नहीं की लेकिन सभी सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे। साल 2013 में आप के शुरु हुए राजनीतिक सफर में जहां विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत वोटों से शुरुआत करने वाली पार्टी देखते ही देखते 2015 के विस चुनाव के सहारे 54.3 प्रतिशत वोट तक पहुंच गई थी। लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली में कांग्रेस ने 22.5 प्रतिशत मत प्राप्त किए थे और आम आदमी पार्टी का मत प्रतिशत 14.4 प्रतिशत घटकर 18.1 प्रतिशत पर पहुंच गया था।


दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 48 में आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। ऐसे में आम आदमी पार्टी इस फार्मूले को अपनाकर कई विधायकों के टिकट काट सकती है। हालांकि, जिन विधायकों के क्षेत्र में पार्टी ने बढ़त बनाई है, उन्हें विधानसभा चुनाव में इसका लाभ मिलना तय है। लेकिन, जिनके प्रत्याशी हारे हैं, उन्हें लेकर पार्टी पूरी जांच परख के बाद ही कोई फैसला लेगी। आंतरिक सर्वे का कार्य पार्टी के उन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को ही दिया जाएगा जो उस क्षेत्र में रहते हैं।


साल 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आप के सामने पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस चुनाव में चुनौती बढ़ गई है। केंद्र की सत्ता पर दोबारा प्रचंड बहुमत के साथ काबिज भाजपा देश के दिल को जीतने में पूरी जान लगा देगी वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अपनी खोई हुई जमीन और अपने कोर वोटरों को कुछ हद तक आप से वापस छीनने में कामयाबी हासिल की है। ऐसे में आम आदमी पार्टी आंतरिक सर्वे के जरिए विधायकों के आधार की मजबूती भांपने के तहत दो सर्वे करवा रही है। जिसके बाद विधायक मैदान में उतारे जाएंगे, जो चुनावी मैदान में विरोधियों को पटखनी दे सकें। 
 

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