75 साल बाद मुसलमानों ने सौंपी शारदा मंदिर की जमीन, कश्मीर के टिटवाल में निर्माण कार्य शुरू

75 साल बाद मुसलमानों ने सौंपी शारदा मंदिर की जमीन, कश्मीर के टिटवाल में निर्माण कार्य शुरू

शारदा कमेटी के तत्वाधान में एक पूजा भी आयोजित की गई जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कश्मीरी पंडित शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक पूजा के बाद पानी को भारतीय सेना और पाक सेना द्वारा समान रूप से संचालित होने वाली पुल पर विसर्जित किया गया जो कि एलओसी पर स्थित है।

जम्मू कश्मीर में एलओसी के निकट टिटवाल में प्राचीन शारदा मंदिर का निर्माण कार्य शारदा यात्रा मंदिर समिति में शुरू करवा दिया है। दरअसल, 75 साल बाद मुसलमानों ने कश्मीरी पंडितों को शारदा मंदिर की जमीन हैंड ओवर की है। आपको बता दें कि समिति ने भूमि के सीमांकन के बाद दिसंबर 2021 में इस परियोजना की नींव रखी थी। शारदा कमेटी के तत्वाधान में एक पूजा भी आयोजित की गई जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कश्मीरी पंडित शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक पूजा के बाद पानी को भारतीय सेना और पाक सेना द्वारा समान रूप से संचालित होने वाली पुल पर विसर्जित किया गया जो कि एलओसी पर स्थित है।

इसे भी पढ़ें: कश्मीर के स्प्रिंग फूड फेस्टिवल में पर्यटकों की भीड़ देखकर Tourism Industry से जुड़े लोग खुश

सबसे खास बात यह भी है कि यहां एक मस्जिद के साथ-साथ गुरुद्वारे का भी निर्माण कराया जा रहा है जो कि भाईचारे का प्रतीक होगा। जानकारी के मुताबिक यहां एक धर्मशाला और शारदा यात्रा का आधार शिविर भी बनेगा। आपको बता दें कि 1947 में बंटवारे के बाद प्राचीन शारदा मंदिर और उसके आसपास धार्मिक स्थल क्षतिग्रस्त हो गए थे। तब से यह जमीन वीरान पड़ी हुई है। बहुसंख्यक मुसलमानोंने इस जमीन के टुकड़े को जस का तस रखा। वर्ष 2021 में वार्षिक शारदा पीठ यात्रा और पूजा के लिए नीलम नदी पहुंचने पर ग्रामीणों ने यह जमीन कश्मीरी पंडितों को सौंप दी थी।

इसे भी पढ़ें: इमरान खान ने फिर अलापा कश्मीर राग, कहा- 370 हटने से पहले कभी भारत के खिलाफ नहीं बोला

अब निर्माण कार्य अब शुरू कर दिया गया है। शारदा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए ही सेव शारदा समिति का गठन भी किया गया था। यही समिति फिलहाल मंदिर का निर्माण कार्य देख रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के निर्माण के बाद यह दुनिया भर में धार्मिक पर्यटन को आमंत्रित करेगा। जानकारी यह भी है कि शारदा मंदिर की प्लानिंग और मॉडल को पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है। मंदिर के निर्माण कार्य में जिन ग्रेनाइट पत्थर का इस्तेमाल होगा उस कर्नाटक के बिदादी में उकेरा जा रहा है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।