Allahabad HC ने UP के 4 वरिष्ठ IAS अधिकारियों पर तय किए अवमानना आरोप

Allahabad HC ने UP के 4 वरिष्ठ IAS अधिकारियों पर तय किए अवमानना आरोप
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने चार वर्ष पुराने आदेश का अनुपालन न करने पर उत्तर प्रदेश के चार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि अधिकारी आदेश के क्रियान्वयन के प्रति गंभीर नहीं दिखे और कोई संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। सभी संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल कर 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

लखनऊ, पांच अक्टूबर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने चार साल पहले पारित अपने एक आदेश का अनुपालन न करने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए हैं। खंडपीठ ने कहा कि इन अधिकारियों ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि 19 जुलाई 2022 के अदालत के आदेश का आंशिक रूप से भी अनुपालन किया गया है। अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि अधिकारी अदालत के आदेश का पालन करने के इच्छुक नहीं दिख रहे हैं।

न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने यह कार्रवाई सुरेश चंद्र वर्मा के मामले में 2022 में दिए फैसले के अनुपालन से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं पर की। उस फैसले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को लागू शासनादेशों के तहत लाभ देने से संबंधित आदेश निरस्त करते हुए वेतन का पुनर्निर्धारण, बकाया वेतन का भुगतान और संशोधित पेंशन भुगतान आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। चार माह में लाभ न देने पर सात प्रतिशत साधारण ब्याज देने को भी कहा गया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चार साल बीतने के बाद भी अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। जिन अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनमें वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति - लघु सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव, सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू शामिल हैं। इससे पहले, अदालत ने राज्य सरकार की अनुपालन के लिए और समय देने की अर्जी खारिज कर दी।

पीठ ने कहा कि 2022 के आदेश को विशेष अपील में बरकरार रखा गया और 13 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी। राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। पीठ ने 22 मई 2026 को महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा की ओर से दिए गए आठ सप्ताह में आदेश का अनुपालन करने के आश्वासन का भी संज्ञान लिया।

सोमवार को सुनवाई के समय पीठ ने पाया कि पूर्व आश्वासन के बाद भी अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया व उनके सहयोगी अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुनील वाजपेयी आदेश के अनुपालन का कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इस पर पीठ ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद उपरोक्त चारों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय कर दिए। वहीं लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय चौहान के खिलाफ आरोप अगली सुनवाई में तय किए जाएंगे।

सभी आरोपित अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने और 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

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