आजमगढ़ में डमी स्कूल रैकेट की आशंका पर Allahabad HC सख्त, यूपी सरकार को जांच के आदेश

आजमगढ़ में डमी स्कूल रैकेट की आशंका पर Allahabad HC सख्त, यूपी सरकार को जांच के आदेश
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आजमगढ़ में एक ही परिसर से स्कूल और कोचिंग संचालित होने के मामले में राज्य सरकार से विस्तृत जांच मांगी है। अदालत ने अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या छात्रों को उनकी जानकारी के बिना डमी स्कूलों में नामांकित करने की कोई साजिश चल रही है। संबंधित अधिकारियों और संस्थान के प्रबंधन को अगली सुनवाई पर रिपोर्ट और हलफनामे के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आजमगढ़ में एक ही छत के नीचे स्कूल और कोचिंग केंद्र चलाए जाने की जांच का निर्देश देते हुए यह पता लगाने को कहा है कि कहीं ये संस्थान कोई ऐसा रैकेट तो नहीं चला रहे जिसमें विद्यार्थियों को उनकी जानकारी के बगैर एक “डमी स्कूल” में दाखिल दिखाया जा रहा है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने सरकार को उस स्कूल के प्रबंधन की जांच करने और शाहाना इंटरनेशनल स्कूल, जौनपुर के साथ उनके कथित संबंध पर एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। इसी स्कूल में याचिकाकर्ता अबु हुजैफा को सीबीएसई प्रणाली के तहत कक्षा 11 का विद्यार्थी दिखाया गया है, जबकि उसने इस स्कूल में कभी भी दाखिला लेने की बात से इनकार किया है।

अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत हलफनामा के साथ जांच रिपोर्ट दो नवंबर, 2026 तक अवश्य दाखिल करें। उस संस्थान के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को भी अगली तिथि को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है। अदालत अबु हुजैफा द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हुजैफा कभी भी शाहाना इंटरनेशनल स्कूल का विद्यार्थी नहीं था। अपने जवाबी हलफनामा में उसने इस बात पर जोर दिया कि उसने ना तो कभी उस स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया, ना कभी कक्षा में शामिल हुआ और ना ही कभी कोई फीस भरी। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह फडगुडिया में एक छात्रावास में रहता है और पांच जुलाई, 2025 से मार्च, 2026 तक एक अन्य संस्थान में मूल्यांकन के लिए हाजिर हुआ था।

शाहाना इंटरनेशनल स्कूल के रिकॉर्ड में उसकी प्रवेश की तिथि 12 अगस्त, 2025 दिखाई गई है, जबकि उस समय वह अन्य संस्थान में मूल्यांकन के लिए मौजूद था। रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने सात अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि इन सामग्री से पता चलता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी संभवतः एक संस्थान में कोचिंग ले रहे हों और बिना उनकी जानकारी के उन्हें दूसरे स्कूल में दाखिल दिखाया जा रहा हो। इस मामले में अगली सुनवाई दो नवंबर, 2026 को होगी।

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