Hijab Controversy । आरिफ मोहम्मद खान बोले- महिलाओं को काले युग में वापस ले जाने की हो रही कोशिश

आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि 1986 में सरकार कट्टरपंथियों के दबाव में झुक गई थी लेकिन वर्तमान सरकार नहीं झूकेगी। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि आप कक्षा में वापस आए और पढ़ाई पर ध्यान दें।
देश में हिजाब पहनने को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। कर्नाटक के शैक्षिक संस्थानों में हिसाब को लेकर पाबंदी के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इन सब के बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी हिजाब मामले पर प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, हिजाब मामले को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस्लाम में भी महिलाओं के घुंघट पहनने से इनकार के मामले सामने आए हैं। इस्लाम को लेकर अपनी बेबाक राय रखने वाले आरिफ मोहम्मद खान ने साफ तौर पर कहा कि निहित स्वार्थ के लिए महिलाओं को काले युग में वापस ले जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि हिजाब इस्लाम का आंतरिक हिस्सा नहीं है।
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आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि 1986 में सरकार कट्टरपंथियों के दबाव में झुक गई थी लेकिन वर्तमान सरकार नहीं झूकेगी। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि आप कक्षा में वापस आए और पढ़ाई पर ध्यान दें। जीवन को बेहतर करने के लिए सबसे अच्छा वातावरण वही मिलेगा। इसके साथ ही आरिफ मोहम्मद खान ने एक उदाहरण भी बताया। उन्होंने कहा कि एक युवा लड़की जो खुद पैगंबर के घर में पाली बड़ी थी और पवित्र पैगंबर की पत्नी की भतीजी थी। वह काफी सुंदर थी...इतिहास यही कहता है...इसे पढ़िए। कहानी के हवाले से उन्होंने कहा कि मध्यकाल में जब उस महिला का पति कूफा का गवर्नर था तो उसे हिजाब न पहनने के लिए फटकार लगायी गयी थी। उसने तब कहा था कि अल्लाह ने उसे खूबसूरत बनाया और अल्लाह ने उस पर खूबसूरती की मुहर लगा दी थी। खान ने कहा, ‘‘उसने कहा कि मैं चाहती हूं कि लोग मेरी सुंदरता देखे और मेरी सुदंरता में अल्लाह का रहम देखे...और अल्लाह का शुक्रगुजार रहे...इस्लाम की पहली पीढ़ी की महिलाओं की यह सोच थी। मैं यही कहना चाहता हूं।’’
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इस बीच, राज्यपाल ने राज्य के लोकायुक्त कानून में संशोधन के वाम सरकार के अध्यादेश पर हस्ताक्षर पर भी स्पष्टीकरण दिया। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसके लिए उनकी कड़ी आलोचना की है। खान ने कहा कि यह विधेयक तीन सप्ताह से अधिक वक्त तक उनके पास रहा। उन्होंने कहा कि यह निर्वाचित सरकार और उनकी जिम्मेदारी थी। इस मामले पर उनकी अपनी राय हो सकती है लेकिन विधेयक में संविधान के विरुद्ध कुछ भी नहीं मिला और इसलिए उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए।
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