Bangladeshi Infiltrators से पूछताछ में हुआ खुलासा, Tripura बना घुसपैठ का नया रास्ता, Border पर Alert

Bangladeshi Infiltrators
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अगरतला हवाई अड्डा थाना प्रभारी निरीक्षक सुसांत देव के अनुसार पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि चार बांग्लादेशी नागरिक 26 जून को किसी दूसरे राज्य के लिए विमान पकड़ने वाले हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और हवाई अड्डा प्राधिकरण ने संयुक्त अभियान चलाकर चारों को धर दबोचा।

भारत बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा कड़ी होने के बावजूद घुसपैठ की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे पर पुलिस ने दो दिनों तक चले गुप्त अभियान में आठ बांग्लादेशी नागरिकों को दबोच कर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश विरोधी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। देखा जाये तो यह केवल अवैध घुसपैठ का मामला नहीं, बल्कि संगठित अंतरराष्ट्रीय जाल का संकेत है, जिसे समय रहते कुचलना बेहद जरूरी है।

अगरतला हवाई अड्डा थाना प्रभारी निरीक्षक सुसांत देव के अनुसार पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि चार बांग्लादेशी नागरिक 26 जून को किसी दूसरे राज्य के लिए विमान पकड़ने वाले हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और हवाई अड्डा प्राधिकरण ने संयुक्त अभियान चलाकर चारों को धर दबोचा। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर अगले ही दिन हवाई अड्डे के आसपास दूसरे अभियान में चार और बांग्लादेशी पकड़े गए। इस तरह दो दिनों में कुल आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई।

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जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार लोग देश के अलग-अलग शहरों में जाने की तैयारी में थे। उनके पास से मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि इनके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो सीमा पार से घुसपैठ कराने, फर्जी पहचान पत्र बनवाने और देश के भीतर सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने में लगा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार बांग्लादेशियों में से एक ने स्वीकार किया कि वे भारत के रास्ते पुर्तगाल जाने की योजना बना रहे थे और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति ने एक एजेंट को बीस लाख रुपये दिए थे। यह खुलासा केवल मानव तस्करी ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अवैध नेटवर्क की ओर भी इशारा करता है। सवाल यह है कि आखिर भारत की धरती को ऐसे गैरकानूनी रास्तों के लिए सुरक्षित गलियारा बनाने की कोशिश कौन कर रहा है?

हम आपको बता दें कि त्रिपुरा की बांग्लादेश से लगी 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा तीन ओर से घिरी हुई है। सीमा का अधिकांश हिस्सा कंटीले तारों से घेरा जा चुका है, फिर भी घुसपैठ, तस्करी और मानव व्यापार जैसी गतिविधियां लगातार चुनौती बनी हुई हैं। सीमा सुरक्षा बल ने हाल के महीनों में निगरानी और गश्त तेज की है, जिससे घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है। केंद्र सरकार ने त्रिपुरा में स्मार्ट सीमा प्रबंधन योजना भी शुरू की है ताकि आधुनिक तकनीक के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

इसी बीच, भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नया मोड भी देखने को मिला है। भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने ढाका पहुंचते ही बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा सेवा दोबारा शुरू करने की घोषणा की। दो वर्षों से बंद यह सेवा अब फिर चालू की गई है। पेट्रापोल सीमा पर इलाज, व्यापार और पर्यटन के लिए आने वाले कई बांग्लादेशी नागरिकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह दोनों देशों के बीच जनसंपर्क और सहयोग को मजबूत करना चाहता है।

लेकिन इसी नरमी के माहौल के बीच सीमा पर तनाव भी बना हुआ है। सीमा सुरक्षा बल द्वारा बड़ी संख्या में लोगों को बांग्लादेश की ओर वापस भेजा गया। पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी की सरकार बनने के बाद “पहचानो, हटाओ और बाहर करो” अभियान के तहत हजारों लोगों को निष्कासित किया गया है। साथ ही सीमा पर कई बार बांग्लादेश सीमा रक्षक बल और सीमा सुरक्षा बल आमने सामने भी आए। नई दिल्ली में हुई दोनों देशों के महानिदेशक स्तर की बैठक भी किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सकी। भारत यह स्पष्ट कर चुका है कि घुसपैठ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी और घुसपैठ कराने वालों को मुँहतोड़ जवाब दिया जायेगा। इसलिए बांग्लादेशी घुसपैठियों और उनके मददगारों को अब संभल जाना चाहिए। सीमा पर चौकसी बढ़ चुकी है, तकनीक मजबूत हो चुकी है और सुरक्षा एजेंसियां हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। जो लोग चोरी छिपे भारत में घुसकर फर्जी पहचान के सहारे देशभर में फैलने का सपना देख रहे हैं, उन्हें अब कानून के शिकंजे का सामना करना ही पड़ेगा। भारत मेहमानों का सम्मान करता है, लेकिन घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर बख्शने वाला नहीं है।

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