West Bengal में स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी, Shyama Prasad Mukherjee पर शामिल होगा पाठ

पश्चिम बंगाल सरकार की विशेषज्ञ समिति ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को शामिल करने और सिंगूर आंदोलन को हटाने की सिफारिश की है। समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने बताया कि यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा बांग्ला साहित्य में रवींद्रनाथ टैगोर की कविता 'अफ्रीका' की जगह 'शिवाजी उत्सव' को शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है।
कोलकाता, एक अक्टूबर कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी की अध्यक्षता वाली पश्चिम बंगाल सरकार की पाठ्यक्रम-सह-पाठ्यचर्या समिति ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर पाठ शामिल करना तथा आठवीं कक्षा के इतिहास के पाठ्यक्रम से सिंगूर आंदोलन के संदर्भ हटाना शामिल है। चटर्जी ने बुधवार को एक बांग्ला टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि पाठ्यक्रम और कक्षा एक से 12वीं तक की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन की प्रक्रिया के तहत इन सिफारिशों को मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया है।
समिति का गठन जुलाई में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और नवीनतम राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखाओं के अनुरूप मौजूदा पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए किया गया था। चटर्जी ने कहा कि सिफारिशों के तहत सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में मुखर्जी के जीवन और योगदान पर एक खंड शामिल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य मौजूदा पाठ्यक्रम में पूरी तरह बदलाव करने के बजाय आवश्यक संशोधन और सुधार करना है।
समिति ने कक्षा आठवीं के इतिहास के पाठ्यक्रम से सिंगूर आंदोलन को हटाने का भी प्रस्ताव दिया है। यह आंदोलन तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था। चटर्जी ने कहा कि बांग्ला साहित्य में रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ को हटाने और उसकी जगह ‘शिवाजी उत्सव’ को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है।
चटर्जी के अनुसार, 2027 के शैक्षणिक सत्र के लिए संशोधित पुस्तकें दो जनवरी तक स्कूलों में पहुंचने की उम्मीद है।
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