परिवारवादी पार्टियों से लड़ रही है भाजपा, जेपी नड्डा बोले- इन पार्टियां का कोई लक्ष्य नहीं होता

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ANI
अंकित सिंह । May 19, 2022 12:37PM
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड में बाबू जी के बुजुर्ग होने के बाद बेटे ने पार्टी संभाल ली। उन्होंने कहा कि उड़ीसा में बीजू जनता दल, आंध्रप्रदेश में YSRCP, तेलंगाना में TRS, तमिलनाडु में करुणानिधि परिवार, महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP ये सब परिवार की पार्टियां हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज एक बार फिर से परिवारवादी पार्टियों पर निशाना साधा है। लोकतांत्रिक शासन के लिए वंशवादी राजनीतिक दलों के खतरे पर नेशनल सेमिनार में बोलते हुए नड्डा ने कहा कि प्रजातंत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दल एक महत्वपूर्ण उपकरण है अगर वह स्वस्थ्य है तो प्रजातंत्रिक स्वस्थ्य और अगर वह अस्वस्थ्य है तो प्रजातंत्रिक अस्वस्थ्य है। उन्होंने कहा कि भाजपा परिवारवादी पार्टियों से लड़ रही है। यूपी में भाजपा समाजवादी पार्टी से लड़ रही है और वह परिवारपार्टी है। ऐसे ही पंजाब में शिरोमणि अकाली दल, जम्मू कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस, बिहार में राजद, प.बंगाल में दीदी की पार्टी, महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी आदि। इन पार्टियां का कोई लक्ष्य नहीं होता है। 

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भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड में बाबू जी के बुजुर्ग होने के बाद बेटे ने पार्टी संभाल ली। उन्होंने कहा कि उड़ीसा में बीजू जनता दल, आंध्रप्रदेश में YSRCP, तेलंगाना में TRS, तमिलनाडु में करुणानिधि परिवार, महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP ये सब परिवार की पार्टियां हैं। कांग्रेस भी अब न तो राष्ट्रीय रह गई है,न भारतीय और न ही प्रजातांत्रिक रह गई है, ये भी भाई-बहन की पार्टी बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी का स्वास्थ्य कैसा है, उसके सिस्टम कैसे हैं, ये सब बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस महत्व को समझते हुए हमें ये ध्यान रखना होगा कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्य क्या हैं, नेताओं के बीच संबंध क्या हैं, संगठन की विचार प्रक्रिया क्या है। 

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नड्डा ने दावा किया कि जो परिवारिक पार्टियों हैं, उनका उद्देश्य सिर्फ सत्ता पाना होता है। इनकी कोई विचारधारा नहीं है। इनके कार्यक्रम भी लक्ष्यविहीन होते हैं। उन्होंने कहा कि रीजनल पार्टियों को किसी भी तरह से सत्ता में आना होता है इसलिए ये धुर्वीकरण करने में भी पीछे नहीं रहते हैं। फिर धुर्वीकरण चाहे जाति के आधार पर करें, या धर्म के। राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को ताक पर रख दिया जाता है और सत्ता को पाने के लिए धुर्वीकरण किया जाता है। नड्डा ने कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों में धीरे धीरे कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। अब उन क्षेत्रीय पार्टियों में विचारधारा किनारे हो गई और परिवार सामने आ गए। इस तरह से क्षेत्रीय पार्टियां, परिवारवादी पार्टियों में बदल गई हैं।

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