मवेशियों में एलएसडी के प्रसार पर केंद्र की नजर, ​​गुजरात, राजस्थान भेजी गईं टीमें

Animal Husbandry
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देश में पिछले कुछ समय से यह बीमारी मवेशियों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि मवेशियों में बीमारी को नियंत्रित करने और रोकने के लिए कुछ प्रोटोकॉल निर्धारित हैं।

नयी दिल्ली|  केंद्र गुजरात में लगभग 1,000 गाय-भैंसों की मौत के बीच मवेशियों में ढेलेदार त्वचा रोग (लंपी स्किन डिजीज) के प्रसार की बारीकी से निगरानी कर रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

ढेलेदार त्वचा रोग (एलएसडी) की स्थिति और नियंत्रण के लिए किए गए उपायों की समीक्षा के लिए केंद्र द्वारा गुजरात और राजस्थान के लिए विशेष दल भेजे गए हैं। इन दोनों राज्यों में मवेशियों की आबादी में एलएसडी फैलने की खबरें आई हैं।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने पीटीआई-को बताया, ‘‘लगभग 33,000 मवेशी संक्रमित हैं, अकेले गुजरात में इस बीमारी से 900 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई है। इसकी उपस्थिति राजस्थान में भी पाई गई है।’’ उन्होंने कहा कि इस बीमारी को फैलने से रोकने और नियंत्रित करने के लिए एक केंद्रीय दल गुजरात भेजा गया है।

मवेशियों में चर्म रोग को फैलने से रोकने के उपायों पर मंत्री ने कहा कि वर्तमान में मवेशियों को अलग-थलग किया जा रहा है और यहां तक कि टीकाकरण भी पूरी गति से चल रहा है। उन्होंने कहा कि मवेशियों में इस बीमारी को लेकर सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया गया है। पशुपालन और डेयरी सचिव अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि यह मूल रूप से एक संक्रमण है जो मवेशियों की त्वचा को प्रभावित करता है।

देश में पिछले कुछ समय से यह बीमारी मवेशियों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि मवेशियों में बीमारी को नियंत्रित करने और रोकने के लिए कुछ प्रोटोकॉल निर्धारित हैं। मंत्रालय ने इन दो राज्यों में मवेशियों में एलएसडी की रोकथाम के कार्य की समीक्षा के लिए राजस्थान और गुजरात का दौरा करने के लिए केंद्रीय टीमों को भेजा है।

ये दल सोमवार से दौरे पर हैं। गुजरात सरकार ने रविवार को कहा था कि इस बीमारी से राज्य में कुल 999 मवेशियों, खासकर गाय और भैंस की मौत हुई है। ढेलेदार त्वचा एक वायरल बीमारी है जो मच्छरों, मक्खियों, जूँ और ततैया द्वारा मवेशियों के सीधे संपर्क में आने और दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलती है।

जानवरों में बुखार, आंखों और नाक से स्राव, मुंह से लार आना, पूरे शरीर में गांठ जैसे नरम छाले, दूध उत्पादन कम होना और खाने में कठिनाई इसके मुख्य लक्षण हैं, जो कभी-कभी जानवर की मौत का कारण बनते हैं।

अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) विभिन्न राज्यों में बीमारी की स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। एलएसडी की शुरुआत सितंबर, 2019 में ओडिशा में हुई थी।

तब से यह बीमारी 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों.... छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, असम, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, गोवा, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, राजस्थान और हाल ही में पंजाब में सामने आई है।

विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशानिर्देशों के साथ नियमित और बार-बार सलाह जारी की है। एलएसडी को नियंत्रित करने के लिए तत्काल और सक्रिय कदम राज्यों और नैदानिक ​​प्रयोगशालाओं को सुझाए गए हैं।

राज्यों को बैठकें और वेबिनार आयोजित करके बीमारी की रोकथाम और इसे नियंत्रित करने के लिए बरती जाने वाली सावधानियों और कार्यों से अवगत कराया गया है।

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