Shiv Sena (UBT) में फूट पर बोले Chandrashekhar Bawankule: BJP को क्यों घसीटा जा रहा है?

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना (UBT) में फूट के आरोपों पर बीजेपी का बचाव किया है। उन्होंने जोर दिया कि उद्धव ठाकरे को अपने सांसदों के पाला बदलने के कारणों का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, क्योंकि यह उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है और बीजेपी को इसमें बेवजह घसीटा जा रहा है।
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 17 जून को उन आरोपों को खारिज कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में नेताओं के पाला बदलने को बढ़ावा दे रही है। नागपुर में बोलते हुए बावनकुले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के सांसद कहां जा रहे हैं, इससे BJP का कोई लेना-देना नहीं है। उद्धव ठाकरे को यह पता होना चाहिए कि उनके सांसद या विधायक उन्हें क्यों छोड़ रहे हैं। अगर वे एकनाथ शिंदे के पास जा रहे हैं, तो यह मामला उनसे जुड़ा है। न तो हमारे मुख्यमंत्री और न ही हमारे किसी नेता का इससे कोई संबंध है। BJP को इसमें क्यों घसीटा जा रहा है?
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उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब यह अटकलें तेज़ हो गई हैं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी छोड़कर अलग गुट बना सकते हैं। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के इन आरोपों पर कि बीजेपी सांसदों को पाला बदलने के लिए पैसे की पेशकश कर रही है, बावनकुले ने कहा कि पार्टी इसमें शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सांसदों और विधायकों पर ऐसे आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। यह कहना सही नहीं है कि कोई सांसद या विधायक पैसे के लिए अपना रुख बदलता है। इस बात की जांच होनी चाहिए कि कोई विधायक या सांसद पार्टी क्यों छोड़ता है। बीजेपी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
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16 जून को राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र के सांसदों को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने के लिए 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है। उन्होंने X पर पोस्ट किया कि अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाली और घिनौनी बात है कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए आज रात 15 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही है। महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर के नाम से हलचल बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक, UBT के नौ में से सात सांसद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। 2022 में, शिंदे और कई विधायक उद्धव ठाकरे के गुट से अलग हो गए थे, जिससे पार्टी दो गुटों में बंट गई थी।
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