हेलीकॉप्टर हादसे का बीमा दावा खारिज करने पर Oriental Insurance तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

हेलीकॉप्टर हादसे का बीमा दावा खारिज करने पर Oriental Insurance तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट
प्रतिरूप फोटो
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छत्तीसगढ़ सरकार के विमानन निदेशालय ने 2022 के सरकारी हेलीकॉप्टर हादसे के बीमा दावे को लटकाने और फिर खारिज करने पर ओरिएण्टल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर यह सख्त कदम उठाया है। इस हादसे में दो पायलटों की जान चली गई थी और पूरा प्रीमियम चुकाने के बावजूद कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को काली सूची में डालने के बाद भी कानूनी और प्रशासनिक उपायों से बीमा राशि हासिल करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

रायपुर, सात अक्टूबर छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से जुड़े बीमा दावे को चार साल से अधिक समय तक लटकाए रखने के बाद खारिज किए जाने के मामले में ओरिएण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड (ओआईसीएल) को तीन साल के लिए काली सूची में डाल दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार के विमानन निदेशालय ने सरकारी स्वामित्व वाले अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर से जुड़ी दुर्घटना के बीमा दावे के संबंध में यह कार्रवाई की है।

हेलीकॉप्टर मई 2022 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और हादसे में दो पायलटों की मौत हो गई थी। इस संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि चार साल से अधिक समय तक लटकाए रखने के बाद बीमा कंपनी ने अगस्त 2026 में दावा खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद विमानन निदेशालय ने मामले की जांच की और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।

अधिकारी के मुताबिक, ओआईसीएल ने नोटिस के जवाब में अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया। उपलब्ध रिकॉर्ड और कंपनी के जवाब की पड़ताल के बाद विमानन निदेशालय ने आदेश पारित करते हुए कंपनी को तीन साल के लिए काली सूची में डालने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि 12 मई 2022 की रात रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर अभ्यास उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें वरिष्ठ पायलट कैप्टन गोपाल कृष्ण पांडा और दिल्ली से आए डीजीसीए परीक्षक कैप्टन ए. पी. श्रीवास्तव की मौत हो गई थी।

हेलीकॉप्टर का बीमा ओआईसीएल के पास था और बीमा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया जा चुका था। दुर्घटना के बाद बीमा दावा दायर किया गया, लेकिन यह लंबे समय तक लंबित रहा और अंततः अगस्त 2026 में इसे खारिज कर दिया गया। सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘यह सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा मामला है।

बीमा प्रीमियम का भुगतान किए जाने के बाद दावे के निपटारे में लगा समय सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय था। सरकारी संस्थानों के साथ काम करने वाली सेवा प्रदाता कंपनियों से समय पर और जवाबदेही के साथ काम करने की उम्मीद की जाती है।’’ उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में देरी से सरकार पर वित्तीय असर पड़ सकता है और लागू नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कंपनी को काली सूची में डाले जाने से बीमा दावे का मामला अपने आप समाप्त नहीं होता।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लागू नियमों के तहत उपलब्ध प्रशासनिक और कानूनी उपायों के जरिए मामले को आगे बढ़ाएगी तथा राज्य के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

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