भूटान से चीन क्या चाहता है? इससे भारत के भू-राजनीतिक हित कैसे होंगे प्रभावित

भूटान से चीन क्या चाहता है? इससे भारत के भू-राजनीतिक हित कैसे होंगे प्रभावित

चीन के बढ़ते इंफ्रांस्ट्क्चर ने भारत की चिताएं बढ़ा दी हैं। दावा किया गया है कि चीन की तरफ से विवादित क्षेत्र में निर्माण कार्य साल 2020-21 में किया गया है। चीन के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक भूटानी जमीन पर सड़कों और सैन्य प्रतिष्ठानों का जाल बुनने में लगा है।

पड़ोसी देश भूटान जो भारत और चीन के बीच एक बफर क्षेत्र की तरह का काम करता है। भारत व भूटान के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर संधि की गई थी, जिसके तहत विदेशी हमले की सूरत में दोनों एक दूसरे का सहयोग करने की बात कही गई है। लेकिन भूटान में चीन की सक्रियता ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन द्वारा भूटान की जमीन पर चार गांवों का निर्माण किया गया है। इलाके में चीन के बढ़ते इंफ्रांस्ट्क्चर ने भारत की चिताएं बढ़ा दी हैं। दावा किया गया है कि चीन की तरफ से विवादित क्षेत्र में निर्माण कार्य साल 2020-21 में किया गया है। चीन के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक भूटानी जमीन पर सड़कों और सैन्य प्रतिष्ठानों का जाल बुनने में लगा है।

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चीन की 22457 किलोमीटर लंबी सीमा 14 देशों से लगी है लेकिन सिर्फ़ भारत और भूटान के साथ ही उसका सीमा विवाद है। चीन और भूटान सीमा पर मुख्य रूप से दो इलाके ऐसे हैं, जिसपर विवाद ज्यादा है। क्षेत्र के डोकलाम में भारतीय इलाके से लगे होने की वजह से चीन की इस गतिविधि ने भारत को परेशान कर दिया है। भूटान के पठार में स्थित डोकलाम को लेकर भारत और चीन के बीच साल 2017 में विवाद देखने को मिला। दरअसल, डोकलाम विवाद की शुरुआत 16 जून, 2017 को उस वक्‍त हुई थी जब भारतीय सैनिकों ने चीन की पीएलए के सैनिकों को इस इलाके में सड़क निर्माण करने से रोका था। चीन जिस क्षेत्र में सड़क निर्माण कर रहा था, वह भूटान का इलाका है। इस दौरान दबाव बढ़ाने के लिए भारत ने ब्रिक्‍स सम्‍मेलन का बहिष्‍कार किया, जिससे अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर चीन की काफी किरकिरी भी हुई। लिहाजा चीन के लिए इस विवाद को सुलझाना बड़ी चुनौती बन गई थी। वहीं इसको लेकर जापान और अमेरिका ने भी भारत का साथ दिया था। कई दौर की वार्ता के बाद 28 अगस्‍त 2017 को चीन के साथ भारत ने भी अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाने का फैसला किया।






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