Prabhasakshi NewsRoom: Noida में उग्र प्रदर्शन पर बोले CM Yogi, 'श्रमिकों को उनका अधिकार मिलना चाहिए मगर अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी'

Noida Protest
ANI

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया है। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं घटनास्थल पर मौजूद हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने कहा है कि वह न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है और श्रमिकों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री श्रमिकों का आंदोलन आज हिंसक रूप ले बैठा, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पिछले कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन ने उस समय उग्र रूप धारण कर लिया जब बड़ी संख्या में एकत्रित श्रमिकों ने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी और पुलिस पर पथराव किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा के फेस-2 क्षेत्र में स्थित कई फैक्ट्रियों के श्रमिक वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ उग्र तत्वों ने पुलिस वाहन को पलट दिया और कई अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और एक वाहन को आग के हवाले कर दिया गया।

यह विरोध प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी है, जिससे प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारी संख्या में श्रमिकों के जुटने और उनके आक्रामक रवैये के कारण हालात नियंत्रण से बाहर होते नजर आए। इसके चलते प्रमुख सड़कों पर यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। सुबह के समय दफ्तर जाते हुए लोग देर तक जाम से जूझते नजर आए।

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स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया है। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं घटनास्थल पर मौजूद हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने कहा है कि वह न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है और श्रमिकों से संयम बरतने की अपील की जा रही है। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की भी अपील की गई है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि नोएडा के सेक्टर 63, सेक्टर 62, सेक्टर 15, फेस-दो औद्योगिक क्षेत्र, सूरजपुर, नॉलेज पार्क क्षेत्र, दादरी क्षेत्र और ईकोटेक- प्रथम के औद्योगिक क्षेत्र में सुबह से ही मजदूरों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि कई जगह पर श्रमिकों ने जाम लगाया और विभिन्न स्थानों पर उनकी पुलिस के साथ नोंक झोंक भी हुई। एक अधिकारी ने बताया कि कई जगहों पर श्रमिकों ने उग्र होकर पुलिस पर पथराव किया और कुछ कारों में आग लगाए जाने तथा कारखानों में तोड़फोड़ की भी खबर है जिसके बाद पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। अधिकारी ने बताया कि श्रमिकों ने एक पुलिस वाहन पर भी हमला किया। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर भारी बल के साथ तैनात हैं, वहीं श्रमिक भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

अपर पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि पुलिस हर स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि श्रमिकों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की कुछ बातें यहां के उद्योगपतियों ने मान ली है और उनसे शांतिपूर्वक आंदोलन समाप्त करने की अपील की जा रही है। राजीव नारायण मिश्र के अनुसार श्रमिक अलग-अलग जगह पर प्रदर्शन कर रहे हैं और कोई इनका नेतृत्व नहीं कर रहा है, इस वजह से श्रमिकों तक प्रशासन को अपनी बात पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि श्रमिकों को उनका उचित अधिकार मिलना चाहिए और उन्हें सम्मानजनक वेतन तथा सुरक्षित कार्य वातावरण मिलना जरूरी है। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों को श्रम कानूनों का पालन करने और श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रमिकों के नाम पर अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, इस आंदोलन की पृष्ठभूमि हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में घोषित न्यूनतम वेतन वृद्धि से जुड़ी हुई है। हरियाणा में अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन लगभग पैंतीस प्रतिशत बढ़ाकर ग्यारह हजार दो सौ चौहत्तर रुपये से पंद्रह हजार दो सौ बीस रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके बाद नोएडा के श्रमिक भी समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश में भी न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं।

श्रमिकों का कहना है कि उन्हें न केवल कम वेतन मिल रहा है बल्कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। इसके अलावा साप्ताहिक अवकाश की कमी, शिकायत निवारण व्यवस्था का अभाव और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी उनके आक्रोश का कारण है।

वहीं एक औद्योगिक संगठन के पदाधिकारी ललित ठुकराल ने आरोप लगाया कि यह धरना प्रदर्शन प्रायोजित है और कुछ बाहरी तत्व श्रमिकों को भड़काकर यह धरना प्रदर्शन करवा रहे हैं। उनके अनुसार श्रमिकों की ज्यादातर मांगे मान ली गई है, इसके बावजूद भी श्रमिक काम पर नहीं लौट रहे हैं।

उधर, गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रुपम ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने औद्योगिक इकाइयों के साथ कई बैठकों के बाद श्रमिक हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें ओवर टाइम का भुगतान दुगुनी दर से करना, प्रत्येक श्रमिक को साप्ताहिक अवकाश देना, रविवार को काम कराने पर दोगुना वेतन देना और वेतन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा सभी फैक्ट्रियों में आंतरिक शिकायत समिति बनाने, प्रत्येक कार्यस्थल पर शिकायत पेटी लगाने और सैलरी स्लिप उपलब्ध कराने जैसे निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने यह भी कहा है कि इन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और नियमित निगरानी की जाएगी। जिलाधिकारी रूपम ने कहा कि उद्योगपतियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के नेताओं के साथ हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि शासन के दिशानिर्देश के अनुसार किसी भी श्रमिक को अनावश्यक रूप से सेवा से नहीं निकाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा तथा किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला प्रशासन ने चौबीस घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है, जहां श्रमिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे श्रमिकों और प्रशासन के बीच संवाद बेहतर होगा और समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सकेगा। बहरहाल, फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन प्रशासन और सरकार दोनों ही स्तर पर इसे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास जारी हैं।

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