Congress ने मांगा CEC Gyanesh Kumar का इस्तीफा, जस्टिस भुइंया की टिप्पणी का दिया हवाला

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइंया की मताधिकार पर की गई हालिया टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि संवैधानिक पद पर रहते हुए निर्वाचन आयोग प्रमुख ने नियमों का उल्लंघन किया है।
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइंया की हालिया टिप्पणियों ने निर्वाचन आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार को ‘‘बेनकाब’’ कर दिया है तथा कुमार के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को ‘एक्स’ पर एक खबर साझा करते हुए दावा किया कि न्यायमूर्ति भुइंया ने मतदान के अधिकार को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा बताते हुए जो टिप्पणी की है, उससे यह निष्कर्ष निकलता है कि संवैधानिक पद पर बैठे कुमार ने संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति भुइंया ने और भी बहुत कुछ कहा है और सीईसी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।’’ रमेश ने आरोप लगाया कि कुमार की ‘‘जी-2 के अवैध आदेशों को लागू करने की क्षमता’’ अब उन्हें देश के लिए एक बोझ बना चुकी है। रमेश जी2 शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए करते हैं। न्यायमूर्ति उज्जल भुइंया ने रविवार को हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय में 19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में कहा था कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है, ‘‘स्वाभाविक रूप से मनमानी’’ होगी और संविधान के तहत स्थापित संवैधानिक व्यवस्था का निषेध होगी।
उन्होंने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग, मताधिकार वाले और मताधिकार से वंचित नहीं बनाता। उनका यह भी कहना था कि बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन है।
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