भारत-चीन संबंधों पर Jairam Ramesh ने PM Modi से पूछे 4 सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात के बाद केंद्र सरकार पर चीन के प्रति सुनियोजित आत्मसमर्पण का आरोप लगाया है। उन्होंने गलवान झड़प के बाद दिए गए बयानों, सीमाई स्थिति और रिकॉर्ड व्यापार घाटे को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। पार्टी ने दावा किया कि इन कदमों से बातचीत में भारत का पक्ष कमजोर हुआ है।
(फाइल फोटो के साथ जारी) नयी दिल्ली, 13 सितंबर कांग्रेस ने भारत-चीन संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रुख पर रविवार को उनसे चार सवाल पूछे और आरोप लगाया कि वह चीन के सामने ‘‘सुनियोजित आत्मसमर्पण’’ की नीति अपना रहे हैं। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की ‘‘कुख्यात क्लीन चिट’’ से भारत कमजोर नहीं हुआ और उन्होंने ‘‘लद्दाख एवं अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त बनाने की अनुमति क्यों दी।’’ इन आरोपों पर सरकार या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। रमेश की इस टिप्पणी से एक दिन पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा था कि भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता रहना बेहद आवश्यक है।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में ‘‘लगातार हो रही प्रगति’’ का स्वागत किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने इस बात को दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक बयान में कहा, ‘‘अब जबकि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ आपकी द्विपक्षीय बैठक समाप्त हो चुकी है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चार ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब देश अब भी जानना चाहता है।
क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई आपकी कुख्यात ‘क्लीन चिट’ ने भारत को कमजोर नहीं किया?’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘15-16 जून 2020 की रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की लड़ाई में हमारे 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और यह 45 वर्ष में सीमा पर इस तरह जान गंवाने की पहली घटना थी।’’ रमेश ने कहा, ‘‘इसके सिर्फ चार दिन बाद 19 जून 2020 को आपने सर्वदलीय बैठक में बिना किसी स्पष्ट कारण के कहा था, ‘न कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है।’ इस बयान को कभी वापस नहीं लिया गया। क्या इससे बाद की बातचीत में हमारी स्थिति काफी कमजोर नहीं हुई?’’ उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री ने ‘‘लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त बनाने की अनुमति क्यों दी।’’ कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि पूर्वी लद्दाख के बड़े हिस्से में ‘‘गश्त और चराई के हमारे परंपरागत अधिकार चुपचाप लेकिन निश्चित रूप से छोड़ दिए गए हैं।’’ रमेश ने दावा किया कि इस बीच अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण की खबरें भी सामने आई हैं जिनमें भारत की कुछ गश्ती चौकियों तक पहुंच खत्म होने और नया गतिरोध पैदा होने की खबरें भी शामिल हैं। कांग्रेस नेता ने बयान में कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन का रुख और सख्त हुआ है।
वह शहरों के नाम बदल रहा है, उस क्षेत्र पर फिर दावा जता रहा है जिसे वह ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है और ब्रह्मपुत्र के ‘ग्रेट बेंड’ पर 60,000 मेगावाट की मेदोग महाबांध परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। यह परियोजना उसे हमारे पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर दबदबा बनाने की स्थिति में ला देती है।’’ रमेश ने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में चीन की भूमिका को लेकर भारत का रुख नरम क्यों पड़ने दिया। उन्होंने कहा, ‘‘चार जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सैन्य प्रतिष्ठान के इस आकलन का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की सहायता करने में चीन की गहरी और महत्वपूर्ण भूमिका थी लेकिन अचानक 25 अगस्त 2026 को पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने वीआईएफ (विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन) में दिए एक व्याख्यान में बिल्कुल अलग रुख अपनाया।’’ कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया कि क्या यह कल की बैठक से पहले माहौल बदलने की किसी रणनीति का हिस्सा था?
रमेश ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने चीन के साथ व्यापार घाटे को रिकॉर्ड स्तर तक क्यों पहुंचने दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया जिससे खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) समेत भारतीय उद्योग के बड़े हिस्से को नुकसान हुआ। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण कच्चे माल, विनिर्माण कलपुर्जों और मध्यवर्ती वस्तुओं के लिए चीन पर निर्भरता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘इंपोर्ट फ्रॉम चाइना’ एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं। इस अस्वीकार्य स्थिति को बदलने का खाका कहां है?’’ रमेश ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, चीन के साथ भारत के संबंधों को सामान्य बनाना एक बात है, लेकिन आपकी ओर से जो दिखाई दे रहा है, वह सुनियोजित आत्मसमर्पण है।
अन्य न्यूज़













