बड़े नेता बनने की कोशिश कर रहे थे दानिश अली, मायावती ने दिया जोर का झटका

By अंकित सिंह | Publish Date: Aug 8 2019 4:01PM
बड़े नेता बनने की कोशिश कर रहे थे दानिश अली, मायावती ने दिया जोर का झटका
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कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि दानिश अली ने हाल में ही बसपा में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें लोकसभा में नेता बना दिया। पार्टी का फैसला पुराने नेताओं को रास नहीं आया। पार्टी में टूट की आशंका को मद्यनजर मायावती ने दानिश अली को लोकसभा में पार्टी नेता के पद से हटा दिया।

मायावती ने अपनी पार्टी के संगठन में अचानक कई बदलाव कर दिए हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली को पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है और वहीं लोकसभा में पार्टी के नेता दानिश अली को हटा कर उनके स्थान पर श्याम सिंह यादव को नियुक्त किया है। रितेश पाण्डेय को लोकसभा में उप नेता बनाया गया है जबकि गिरीश चन्द्र जाटव पार्टी के ‘‘मुख्य सचेतक’’ बने रहेंगे। बसपा के इस फेरबदल में एक चौंकाने वाला फैसला किया गया है। दानिश अली जो अब तक लोकसभा में पार्टी के नेता थे उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। यही नहीं उन्हें कोई भी नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च 2019 में जनता दल (एस) के महासचिव दानिश अली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल हो गए थे। पार्टी के इस कदम के बाद दानिश अली के भविष्य को लेकर कई तरह के अटकलें लगने लगी हैं। 



कहा जा रहा है कि मायावती ने अपने इस कदम से दानिश अली को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि मायावती ने ऐसा क्यों किया, इस पर कोई कुछ भी खुलकर नहीं कह पा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले का बसपा ने समर्थन किया था पर दानिश अली पार्टी से अलग राय रख रहे थे। यह भी कहा जा रहा है कि लोकसभा में वोटिंग के दौरान दानिश अली ने वॉकआउट किया था। पार्टी को यह बात नागवार गुजरी। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि कर्नाटक के एक मात्र बसपा विधायक को दानिश अली साथ नहीं रख पाए और बहुमत परिक्षण के दौरान वह अनुपस्थित रहा जिससे भाजपा को मदद मिली। दानिश अली कर्नाटक की राजनीति में अच्छी पकड़ रखते हैं। 
हालांकि बसपा को नजदीक से जानने वाले यह मान रहे हैं कि आने वाले समय में यूपी में 13 सीटों पर उपचुनाव हैं और बसपा इस बार यह चुनाव लड़ रही है। ऐसे में मुस्लिम वोट को ध्यान में रखते हुए पार्टी राज्य में किसी मुस्लिम चेहरे को आगे करना चाहती थी और इसी के तहत मुनकाद अली को राज्य की कमान सौंपी गई। वहीं यादव वोट के मध्य नजर रखते हुए लोकसभा में श्याम सिंह यादव को नेता बना दिया गया। कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि दानिश अली ने हाल में ही बसपा में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें लोकसभा में नेता बना दिया। पार्टी का फैसला पुराने नेताओं को रास नहीं आया। पार्टी में टूट की आशंका को मद्यनजर मायावती ने दानिश अली को लोकसभा में पार्टी नेता के पद से हटा दिया। 


इन सब के अलावा यह भी कहा जा रहा है कि दानिश अली तीन तलाक के मद्दे पर लोकसभा में पार्टी का पक्ष मजबूती से नहीं रख पाए जिससे मायावती नाराज हो गई। कारण जो भी हो पर एक बात तो साफ है कि दानिश अली के लिए पार्टी का यह कदम किसी झटके से कम नहीं है। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा के साथ साये की तरह रहने वाले दानिश अली कर्नाटक में सरकार गठन में कांग्रेस और जेडीएस के साथ गठबंधन वार्ता में शामिल थे। बाद में लोकसभा चुनाव 2019 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर दानिश अली उत्तर प्रदेश की अमरोहा सीट से चुनाव जीते थे और भाजपा के कंवर सिंह तंवर को करीब 63 हजार वोटों से हराया था।  


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