जंतर-मंतर हमला मामला: Delhi Court ने Swatantra Bhardwaj की जमानत पर फैसला रखा सुरक्षित

दिल्ली की एक अदालत ने छात्र कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर की अदालत अब इस मामले में 15 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी।
दिल्ली की एक अदालत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले समेत अन्य आरोपों के संबंध में हिंदुत्ववादी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर अपना आदेश 15 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया। सोमवार को सुनवाई के दौरान भारद्वाज के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को ‘‘कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों’’ के बाद गिरफ्तार किया गया था और वास्तव में मौजूदा मामले में शिकायतकर्ता ने जून में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के दौरान भारद्वाज पर हमला किया था। भारद्वाज को सात सितंबर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या घटना के समय भारद्वाज ने जातिसूचक गाली दी थी। इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि जब शुरुआत में शिकायत दर्ज की गई थी, तब उसमें जातिसूचक गाली का कोई उल्लेख नहीं था। बाद में जब दोबारा बयान दर्ज किया गया, तो उसमें जातिसूचक गाली का उल्लेख किया गया और इसी के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम लगाया गया।
भारद्वाज के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ 23 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद 27 जून को पूछताछ के लिए भारद्वाज को पेश होने का नोटिस जारी किया गया था। भारद्वाज के वकील ने अपने मुवक्किल के हवाले से कहा, ‘‘मैं 29 जून को पूछताछ के लिए पेश हुआ। इसके बाद मुझे जाने दिया गया।
फिर कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद चार सितंबर को मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। मेरी गिरफ्तारी के बाद (पॉक्सो अधिनियम के तहत) एक नयी प्राथमिकी दर्ज की गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कॉजपा के प्रदर्शन के दौरान शिकायतकर्ता ने खुद मुझ पर हमला किया था। उसका वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध है।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि मैं गिर गया था और पुलिस ने मुझे बचाया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस को वह वीडियो नजर नहीं आ रहा, जिसमें साफ दिख रहा है कि शिकायतकर्ता ने मुझ पर हमला किया और मैं गिर गया।’’ इसके बाद अदालत ने वीडियो क्लिप चलाकर देखी। शिकायतकर्ता के वकील ने इसके बाद कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी में कोई कानूनी खामी नहीं थी और आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम तथा बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इसके बाद न्यायाधीश ललर ने कहा कि आगे की कार्यवाही बंद कमरे में होगी और फिर अदालत के कर्मचारियों ने मीडिया कर्मियों से अदालत कक्ष से बाहर जाने को कहा।
बाद में अदालत के कर्मचारियों ने बताया कि आदेश सुरक्षित रख लिया गया है और इसे मंगलवार को सुनाया जाएगा। भारद्वाज को चार सितंबर को बुलंदशहर में हिरासत में लिया गया था। इससे कुछ घंटे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर जून में हुए कथित हमले को लेकर भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की थी।
यह कार्रवाई उस साक्षात्कार को लेकर पैदा हुए आक्रोश के बाद की गई थी, जिसमें भारद्वाज ने दावा किया था कि उसने 23 जून के प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता के पिता की ‘‘खोपड़ी फोड़ दी थी’’ और अपने राजनीतिक संबंधों के कारण गिरफ्तारी से बच गया था। अगले दिन भारद्वाज को न्यायाधीश ललर के आवास पर पेश किया गया, जिन्होंने आरोपी से एक दिन की हिरासत में पूछताछ के अनुरोध वाली दिल्ली पुलिस की याचिका को मंजूरी दे दी। इसके अगले दिन मजिस्ट्रेट अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
न्यायाधीश ललर ने पिछले सप्ताह भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी थी।
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