Delhi के Seemapuri में इमारत गिरने से 3 की मौत, मलबे से 11 लोग निकाले गए

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शाहदरा के सीमापुरी इलाके में बुधवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत गिर गई, जिसमें एक गर्भवती महिला और बच्चे सहित तीन लोगों की जान चली गई। राहत दलों ने मलबे से आठ घायलों को सुरक्षित निकालकर राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया है। प्रशासन और स्थानीय निवासी मिलकर मलबा हटाने का काम जारी रखे हुए हैं।

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार को चार मंजिला एक इमारत के ढहने से डेढ़ साल के बच्चे और गर्भवती महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन-वर्षीय एक बच्चे समेत आठ अन्य घायल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। शाहदरा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि मलबे से अबतक 11 लोगों को निकाला गया है और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि इनमें से एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हैं और उनका इलाज किया जा रहा है। आधिकारियों को संदेह है कि मंगलवार शाम को उत्तराखंड में आए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में आई दरारें इस घटना का कारण रही होंगी। स्थानीय लोगों ने कहा कि वे मलबे में फंसे लोगों की आवाज सुन सकते हैं।

इमारत ढहने का वास्तविक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अनुसार, पड़ोसियों ने दावा किया है कि भूकंप के बाद इमारत में दरारें आ गईं और इमारत का मालिक इसे खाली करने की प्रक्रिया में था। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने कहा कि घटना के संबंध में अपराह्न 3.30 बजे सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की गाड़ियों के साथ एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बताया कि दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), एमसीडी और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) की टीमों ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, चार मंजिला इमारत लगभग 25 वर्ग गज के भूखंड पर बनाई गई थी। हालांकि, एमसीडी ने बताया कि यह ईदगाह मछली मंडी के पास डीयूएसआईबी क्षेत्र में लगभग 22 वर्ग गज में बनी तीन मंजिला इमारत थी।

यह झुग्गी झोपड़ी क्षेत्र में आती है। डीसीपी मीणा ने बताया कि तीन मृतकों में पहचान सिर्फ चार महीने की गर्भवती 21 वर्षीय गुलफशा की हुई है जबकि 12 वर्षीय एक लड़की और एक बच्चे की पहचान नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि घायलों में मोमिन मिर्जा (56), अबदान (3), अब्दुल रहमान (28), देवरुद्दीन (28), सलमा (50), छोटे (34), सकीना (35) और समद (30) हैं।

अधिकारी ने बताया कि बचाव और राहत कार्य जारी है तथा अधिक जानकारी का पता लगाया जा रहा है। इस बीच सीएमओ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाए रखने, बचाव कार्य में तेजी लाने तथा प्रभावित लोगों को हर जरूरी सहायता और देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।” इसमें कहा गया है कि मलबे में फंसे लोगों को सकुशल निकालने और घायलों को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

वहीं, एमसीडी ने कहा कि इमारत लगभग 20-25 साल पुरानी थी और घटना के समय इसमें लोग रह रहे थे। निगम ने कहा, इमारत के अलावा, बगल की एक इमारत की दीवारें गिर गईं, जबकि घटना के प्रभाव से पास की एक मस्जिद की चारदीवारी का एक हिस्सा भी ढह गया। एमसीडी ने कहा कि स्थानीय लोगों से पूछताछ के अनुसार, कूड़ा बीनने वाले परिवार इलाके में थे और उनमें से कुछ प्लास्टिक और अन्य सामग्री इकट्ठा कर रहे थे, जब वे इमारत ढहने के बाद मलबे के नीचे दब गए।

एमसीडी ने कहा कि डीएफएस, दिल्ली पुलिस, एमसीडी, डीडीएमए, एनडीआरएफ और डीयूएसआईबी की आपातकालीन टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। निगम ने कहा कि एनडीआरएफ, एमसीडी, डीएफएस, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए की संयुक्त टीमें मलबा हटाने में लगी हुई हैं। पुलिस और एमसीडी द्वारा जारी किए गए शुरुआती बयानों में मलबे से निकाले गए लोगों की संख्या में विसंगति है।

घटनास्थल के दृश्यों में दिख रहा है कि स्थानीय निवासी बचाव कार्य में लगे हुए हैं और अपने हाथों से मलबा हटा रहे हैं। उन्हें ढही हुई इमरात की ईंटें और मलबा हटाते और फंसे हुए लोगों को निकालने में मदद करते देखा गया। एक वीडियो में, लोगों के एक समूह को एक महिला को मलबे से बाहर निकालते और उसे उठाकर ले जाते देखा जा सकता है।

बचाव अभियान में तेजी आने के साथ ही मलबे और पत्थरों के बड़े ढेर को हटाने के लिए जेसीबी मशीनों सहित भारी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि कई लोगों को स्थानीय निवासियों ने निकाला और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली यातायात पुलिस ने एक परामर्श जारी कर लोगों से सीमापुरी क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़कों का उपयोग नहीं करने को कहा है, क्योंकि सीमापुरी गोल चक्कर, डीएलएफ भोपुरा और आसपास की सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है।

पिछले महीने छह सितंबर को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत ढहने से सात लोगों की मौत हो गई थी और 12 अन्य घायल हो गए थे।

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