District Magistrate को सीमावर्ती जिलों में नागरिकता देने का अधिकार मिला

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमों में संशोधन करते हुए गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिलाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में पात्र आवेदकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का अधिकार दे दिया है। अधिसूचना के अनुसार अब ये अधिकारी पूर्व की अधिकार-प्राप्त समितियों का स्थान लेंगे और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त आवेदनों पर कार्रवाई करेंगे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत निष्ठा की शपथ लेने और योग्यता सिद्ध होने के बाद योग्य व्यक्तियों को सीधे नागरिकता दी जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा (आदिवासी इलाकों को छोड़कर) तथा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के जिलाधिकारियों को इन इलाकों में आम तौर पर रहने वाले ‘पात्र और उपयुक्त’ आवेदकों को नैसर्गिक नागरिकता देने की मंजूरी दे दी। सरकार ने बुधवार को नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम 2026 अधिसूचित किए, जिनके तहत इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों को ‘पंजीकरण या प्राकृतिकरण’ के जरिए नागरिकता पाने के आवेदनों पर कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। अधिसूचित नियमावली में कहा गया, ‘‘जब जिलाधिकारी आश्वस्त हो जाएंगे कि आवेदक पंजीकरण या प्राकृतिकरण (जैसा भी मामला हो) के लिए सही और उपयुक्त व्यक्ति है, तो वह उसे भारत की नागरिकता दे देंगे।’’ अधिसूचना के मुताबिक इन राज्यों में जिलाधिकारी उन ‘अधिकार-प्राप्त समितियों’ और ‘नामित अधिकारियों’ का स्थान लेंगे, जिनके पास पूर्व में ये अधिकार थे।

गृह मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना में इन इलाकों के जिलाधिकारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार ऐसे आवेदनों को ‘‘ स्वीकार करने, उनकी जांच करने और उनका निस्तारण करने’’ का अधिकार दिया है। नए नियम उन आवेदकों पर लागू होंगे हैं जो नागरिकता पाना चाहते हैं और आम तौर पर गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेशों में रहते हैं। असम और त्रिपुरा में, इन नियमों में जनजातीय इलाकों को विशेष तौर पर शामिल नहीं किया गया है।

नए नियमों के तहत, पंजीकण या प्राकृतिकरण के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक’ तरीके से अनुरोध स्वीकार करने के लिए जिलाधिकारी को ‘सक्षम प्राधिकार’ बनाया गया है। सरकार ने अधिसूचित क्षेत्रों की उन समितियों या जिला-स्तरीय समितियों को सभी लंबित आवेदन तत्काल संबंधित जिलाधिकारी को भेजने के निर्देश दिये हैं। नागरिकता के लिए आवेदन करने पर प्रणाली स्वत: एक पावती जारी करेगी।

इसके बाद जिलाधिकारी सभी जमा किये गए दस्तावेजों की जांच करेंगे और आवेदक की योग्यता तय करने के लिए आवश्यक पूछताछ करेंगे। अधिसूचना में कहा गया, ‘‘जिलाधिकारी, आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेजों की जांच करेंगे, आवेदक की उपयुक्तता का पता लगाने के लिए जरूरी पूछताछ करेंगे, कानून की दूसरी अनुसूची में बताई गई निष्ठा की शपथ दिलाएंगे और धारा 6बी के तहत आवेदक की पात्रता के बारे में स्वयं को संतुष्ट करेंगे।’’ अधिसूचना के मुताबिक अगर जिलाधिकारी को यह यकीन हो जाता है कि आवेदक ‘योग्य और उपयुक्त व्यक्ति’ है, तो उन्हें सीधे भारतीय नागरिकता देने का अधिकार है। आखिरी कदमों के तौर पर, जिलाधिकारी को कानून के मुताबिक निष्ठा की शपथ दिलानी होती है।

हालांकि, नए नियमों में आवेदकों के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्य आवश्यकताएं बरकरार रखी गई हैं। अधिसूचित नियमावली में कहा गया, ‘‘अगर कोई आवेदक उचित मौके दिए जाने के बावजूद आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है, तो जिलाधिकारी आवेदन को खारिज कर सकते हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़