Ilaiyaraaja vs Saregama Copyright War: दिल्ली हाई कोर्ट ने गानों के इस्तेमाल पर लगाई अंतरिम रोक

संगीतकार इलैयाराजा और सारेगामा इंडिया के बीच 130 फिल्मों के गीतों पर कॉपीराइट विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया निर्माता के साथ हुए समझौतों और कॉपीराइट एक्ट 1957 का हवाला देते हुए इलैयाराजा को इन गीतों के इस्तेमाल या लाइसेंस देने से प्रतिबंधित कर दिया है।
दिल्ली की एक अदालत में इन दिनों संगीत जगत से जुड़ा एक बड़ा कानूनी विवाद चर्चा में है। मशहूर संगीतकार इलैयाराजा और रिकॉर्ड कंपनी के बीच कॉपीराइट को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश पारित किया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सारेगामा इंडिया लिमिटेड ने दायर याचिका में दावा किया है कि कई चर्चित गीत और साउंड रिकॉर्डिंग उसके कैटलॉग का हिस्सा हैं, जिन पर स्वामित्व का अधिकार कंपनी के पास है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संगीतकार इलैयाराजा को इन गीतों और रिकॉर्डिंग का उपयोग करने, लाइसेंस देने या उन पर स्वामित्व का दावा करने से फिलहाल रोक दिया है। साथ ही उनके सहयोगियों, एजेंटों और साझेदारों को भी किसी तीसरे पक्ष को अधिकार सौंपने से प्रतिबंधित किया गया है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया मामला कंपनी के पक्ष में मजबूत प्रतीत होता है और यदि अंतरिम राहत नहीं दी जाती तो कंपनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है। अदालत ने संगीतकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि अगली विस्तृत सुनवाई अप्रैल में प्रस्तावित है।
बताया गया कि विवाद तब और तेज हो गया जब कंपनी ने अदालत को सूचित किया कि फरवरी 2026 की शुरुआत में कुछ विवादित गीत अमेज़न म्यूज़िक, आईट्यून्स और जियोसावन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए, जहां स्वामित्व का दावा संगीतकार की ओर से किया गया था। दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अदालत ने 1976 से 2001 के बीच फिल्म निर्माताओं के साथ हुए कई असाइनमेंट समझौतों का हवाला दिया, जिनमें साउंड रिकॉर्डिंग और संगीत व साहित्यिक कृतियों के कॉपीराइट कंपनी को हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख है।
गौरतलब है कि अदालत ने कॉपीराइट एक्ट 1957 का भी संदर्भ दिया, जिसके अनुसार सामान्यतः फिल्म निर्माता को कॉपीराइट का प्रथम स्वामी माना जाता है, जब तक कि किसी अनुबंध में अन्यथा न कहा गया हो। इसी आधार पर अदालत ने कहा कि इस चरण पर कंपनी के अधिकारों की सुरक्षा आवश्यक है।
यह विवाद 130 से अधिक फिल्मों के संगीत से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनमें तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी भाषाओं की फिल्में शामिल हैं। फिल्म और संगीत उद्योग के जानकारों का मानना है कि यह मामला रचनात्मक अधिकारों और व्यावसायिक स्वामित्व के संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
अदालत ने आगे की प्रक्रिया के तहत निर्देश दिया है कि पहले मामला संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष आएगा और उसके बाद उच्च न्यायालय में विस्तृत बहस होगी। इस अंतरिम आदेश के बाद से मनोरंजन उद्योग में कॉपीराइट और लाइसेंसिंग अधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
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