भोपाल में शुरू हुई पहली म्यूजिक लाइब्रेरी, 20 से ज्यादा वाद्ययंत्र है मौजूद

भोपाल में शुरू हुई पहली म्यूजिक लाइब्रेरी, 20 से ज्यादा वाद्ययंत्र है मौजूद

इस लाइब्रेरी में 100 साल से भी ज्यादा पुराना ‘इसराज’ मौजूद है, जो सितार और सारंगी का ही रूपांतर है। संगीत प्रेमी यहां आकर इन वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल कर अपने टैलेंट को निखार सकते हैं।

भोपाल। राजधानी भोपाल में बने पहली म्यूजिक लाइब्रेरी के बारे में। बैठक- द आर्ट हाउस में हाल ही में ‘रियाज- द म्यूजिक लाइब्रेरी’ का उद्घाटन हुआ है। इस लाइब्रेरी की सबसे खास बात ये है कि यहां 20 से भी ज्यादा वाद्य यंत्र मौजूद हैं। जिनमें इनमें रुद्रवीना, विचित्रवीना, सुरबहार,सरस्वती वीणा जैसे कई वाद्ययंत्र मौजूद है।

दरअसल इसके साथ ही इस लाइब्रेरी में 100 साल से भी ज्यादा पुराना ‘इसराज’ मौजूद है, जो सितार और सारंगी का ही रूपांतर है। संगीत प्रेमी यहां आकर इन वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल कर अपने टैलेंट को निखार सकते हैं। इन इंस्ट्रूमेंट्स को इस्तेमाल करने के लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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वहीं संस्थान के संस्थापक राजेंद्र विश्वरूप ने कहा कि आमतौर पर लोग इन वाद्य यंत्रों को खरीद नहीं पाते हैं क्योंकि बाजार में इनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है। और इसी कारण उन्हें इस लाइब्रेरी को शुरू करने का ख्याल आया। इनमें से अधिकांश संगीत वाद्ययंत्र खरीदे गए हैं। जबकि कई वाद्ययंत्र संगीत प्रेमियों से ही दान में मिले हैं।

आपको बता दें कि ये अनोखी लाइब्रेरी इसलिए है क्यू की ये देश की पहली म्यूज़िक इंस्ट्रुमेंट लाइब्रेरी है। इस लाइब्रेरी में गिटार , हारमोनियम , सितार , वीणा, वायोलिन , तबला , बांसुरी के साथ साथ कई तरह के म्यूज़िक इंस्ट्रुमेंट रखे गए है।

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लाइब्रेरी संचालन कर्ता का कहना है की इसका मूल उद्देश्य ही यही है कि जिनके पास पैसे नहीं है। जो महंगे म्यूज़िक इंस्ट्रुमेंट नहीं खरीद पाते तो यहां आकर वे सब सिख सकते है। इसके साथ ही कुछ स्टूडेंट्स भी इस म्यूज़िक इंस्ट्रुमेंट लाइब्रेरी से काफी प्रभावित है।





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