Ghulam Nabi Azad Birthday: J&K के CM से 5 बार राज्यसभा MP तक, जानें Ghulam Nabi का Political Career

Ghulam Nabi Azad Birthday
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भारत की राजनीति में गुलाम नबी आजाद का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आज यानी की 07 मार्च को वह अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। दशकों की राजनीति में गुलाम नबी की राजनीति में कई पड़ाव देखने को मिले।

भारत की राजनीति में गुलाम नबी आजाद का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आज यानी की 07 मार्च को वह अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। दशकों की राजनीति में गुलाम नबी की राजनीति में कई पड़ाव देखने को मिले। 50 साल तक कांग्रेस के साथ वफादारी करने के बाद उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया। साथ ही उन्होंने डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव आजाद पार्टी बनाई। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर गुलाम नबी आजाद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और शिक्षा

जम्मू-कश्मीर राज्य के डोडा जिले के भलेसा में 07 मार्च 1949 को गुलाम नबी आजाद का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद जीजीएम साइंस कॉलेज, जम्मू से स्नातक किया था। इसके बाद उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय से प्राणीशास्त्र में स्नातकोत्तर किया था।

कांग्रेस पार्टी का बड़ा चेहरा

गुलाम नबी आजाद को कई दशकों तक कांग्रेस पार्टी का बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। इसका कारण गुलाम नबी का गांधी परिवार से करीब होना था। लेकिन समय के साथ गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद उन्होंने डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी नाम की जम्मू-कश्मीर में खुद की नई पार्टी बना ली।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री

साल 1973 में गुलाम नबी आजाद सक्रिय राजनीति में आए। कांग्रेस में शामिल होने के बाद वह धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ी चढ़ते चले गए। फिर साल 2005 में वह जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने थे। वहीं अपने 50 साल के राजनीतिक करियर में गुलाम नबी 2 बार लोकसभा सांसद और 5 बार राज्यसभा सांसद रहे। इसके साथ ही वह कांग्रेस के उच्च पदों पर नियुक्त हुए। वहीं साल 1982 से वह कांग्रेस की हर सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। फिर साल 2006 और 2008 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य रहे।

कांग्रेस से इस्तीफा

कांग्रेस में करीब चार दशक बिताने के बाद वह कांग्रेस पार्टी से अलग हो गए थे। कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद की भूमिका विश्वासपात्र से लेकर संकट मोचक और पावर प्लेयर के रूप में थी। वहीं साल 2018 में जब कर्नाटक चुनाव के बाद जब जेडीएस के साथ गठबंधन की बात आई, तो गुलाम नबी ने ही इसमें विशेष भूमिका निभाई थी।

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