कश्मीर में फिर जहर घोलना चाहता है गुपकार, 370 पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें कांग्रेस नेतृत्व- शिवराज सिंह चौहान

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 20, 2020   18:37
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कश्मीर में फिर जहर घोलना चाहता है गुपकार, 370 पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें कांग्रेस नेतृत्व- शिवराज सिंह चौहान
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उन्होंने कहा कि ऐसे में कांग्रेस पार्टी को देश की जनता के सामने गुपकार अलायंस से अपने रिश्ते स्पष्ट करना चाहिए। उसे बताना चाहिए कि वह क्यों 370 हटाने के विरोध में है, क्यों कश्मीर में जहर घोलना चाहती है, क्यों उसके नेताओं के बयान और उसका दृष्टिकोण आतंकियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं।

भोपाल। कश्मीर में आठ दलों ने एक होकर गुपकार संगठन या एलायंस बनाया है। लेकिन यह समझ नहीं आता कि इसे गुपकार एलायंस कहें, एंटी नेशनल एलायंस कहें या एंटी पीपुल्स एलायंस कहें। इस एलायंस में जितने भी नेता शामिल हैं, वे सब राष्ट्रविरोधी बयानबाजी करते हैं। नेशनल कांफ्रेस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला 11 अक्टूबर को एक टीवी समाचार चैनल से बात करते हुए कहते है कि हम चीन की मदद से कश्मीर में धारा 370 की वापसी करायेंगे। 23 अक्टूबर को महबूबा मुफ्ती कहती हैं कि हम उस वक्त तक तिरंगा नहीं उठायेंगे और न ही किसी को उठाने देंगे जब तक हमारे कश्मीर का झंडा हमें वापस नहीं मिल जाता। कांग्रेस के राहुल गांधी भी इनके सुर में सुर मिलाते हैं। गुपकार एलायंस और कांग्रेस कश्मीर के माहौल में एक बार जहर घोलना चाहते हैं, उसे अंधेरे में धकेलना चाहते हैं। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कही। 

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लूट पर रोक लगी, इसलिए साथ आए अब्दुल्ला, मुफ्ती और गांधी परिवार

चौहान ने कहा कि आज अगर कांग्रेस का गांधी परिवार कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार, मुफ्ती परिवार के साथ एकजुट दिखाई दे रहा है, तो उसकी वजह यह है कि मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटाकर इनकी लूट पर रोक लगा दी है। चौहान ने कहा कि इन परिवारों ने रोशनी एक्ट की आड़ में 25000 करोड़ से अधिक की जमीन हड़प ली, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। ये वही नेता हैं, जिनके बच्चे विदेशों में पढ़ते रहे और ये कश्मीरी बच्चों के हाथों में पत्थर थमाते रहे। इन्होंने ही कश्मीर को अंधेरे में धकेला। जब सीबीआई जांच की आंच इन नेताओं तक पहुंचने लगी, तो उन्होंने इससे बचने के लिए ही गुपकार अलायंस बनाया और कांग्रेस भी उनमें शामिल हो गई। चौहान ने कहा धारा 370 हटने के बाद कश्मीर खुली हवा में सांस ले रहा है। जहां कभी खून के निशान दिखाई देते थे, वहां अब प्राकृतिक सौंदर्य की सौंधी महक आने लगी है। लेकिन अब उसी कश्मीर में फिर से जहर घोलने के प्रयास हो रहे हैं, जिसमें कांग्रेस पार्टी भी शामिल है।

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एक ही सुर में बोलते रहे हैं कांग्रेस और गुपकार अलायंस

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हाल ही में फारुक अब्दुल्ला ने जो राष्ट्रविरोधी बयान दिया है, वह पहली बार नहीं है। उन्हीं के साथ कांग्रेस पार्टी के पी. चिदम्बरम और गुलाम नबी आजाद जैसे नेता धारा 370 की बहाली की बात करते रहे हैं। कश्मीर के कांग्रेसी नेता जहांजेब ने तो अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन से दोबारा धारा 370 लागू कराने की बात कही है। श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस पहले भी गुपकार अलायंस के नेताओं के साथ थी और आज भी है। गुपकार अलायंस की बैठकों में कांग्रेस पार्टी के नेता शामिल होते रहे हैं। कांग्रेस गुपकार अलायंस के साथ मिलकर कश्मीर में जिला पंचायत के चुनाव लड़ रही है। गुपकार अलायंस की सूची में तीन उम्मीदवार कांग्रेस के भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में कांग्रेस पार्टी को देश की जनता के सामने गुपकार अलायंस से अपने रिश्ते स्पष्ट करना चाहिए। उसे बताना चाहिए कि वह क्यों 370 हटाने के विरोध में है, क्यों कश्मीर में जहर घोलना चाहती है, क्यों उसके नेताओं के बयान और उसका दृष्टिकोण आतंकियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं।

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अलगाववादी मानसिकता से उबरी नहीं कांग्रेस

चौहान ने कहा कि पं. नेहरू ने जल्दी सत्ता हासिल करने के प्रयास में देश का विभाजन स्वीकार किया। उन्होंने धारा 370 लागू करके कश्मीर में एक निशान, दो विधान, दो प्रधान की व्यवस्था स्थापित की और कश्मीर को भारत के साथ समरस नहीं होने दिया। कश्मीर का विलय हमारा आंतरिक मामला था, लेकिन पं. नेहरू उसे संयुक्त राष्ट्रसंघ में ले गए और वहां जनमत संग्रह तक की बातें कही। चौहान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज भी उस अलगाववादी मानसिकता से उबरी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस गुपकार अलायंस के सुर में कांग्रेस सुर मिला रही है, उसे गुप्तचर संगठन कहा जाए तो उचित होगा। इस संगठन के लोग चीन और पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहे हैं।

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दोमुंही बातें करने वाली कांग्रेस बताए, आतंकियों से उसके क्या रिश्ते हैं

चौहान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसकी अध्यक्ष सोनिया जी को देश को यह बताना चाहिए कि धारा 370 और 35 ए को लेकर कांग्रेस की क्या सोच है? क्या वह अलगाववादी मानसिकता वाले लोगों के साथ है, क्या वह धारा 370 और 35 को हटाने के पक्ष में है, कांग्रेस पार्टी और उसके नेता कश्मीर पर दोमुंही बातें क्यों करते हैं। देश की जनता यह जानना चाहती है कि आतंकवादियों से कांग्रेस के क्या रिश्ते हैं? बटाला हाऊस एनकाउंटर के बाद सोनिया जी ने आंसू क्यों बहाए थे और दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेस के नेता आतंकियों के साथ खड़े क्यों दिखाई देते हैं?





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


सरकार ने कसी Ola-Uber पर नकेल, नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया

  •  अभिनय आकाश
  •  नवंबर 28, 2020   19:37
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सरकार ने कसी Ola-Uber पर नकेल, नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया
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ओला उबर सबसे बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियां हैं। पीक आवर्स में ऐसी कंपनियां किराया कई गुणा बढ़ाकर वसूलती हैं। एग्रीगेटर्स को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए।

आपको जब सवेरे ऑफिस जाना हो या शाम परिवार के साथ घूमने तभी कैब एग्रीग्रेटर कंपनियां पीक आवर्स के नाम पर मनचाहा किराया वसूलती हैं। लेकिन अब भारत सरकार कैब कंपनियों पर नए नियम लाई है। सरकार का यह कदम अहम हो जाता है, क्योंकि लोग कैब सेवाएं देने वाली कंपनियों के अधिकतम किराये पर लगाम लगाने की लंबे समय से मांग कर रहे थे। 

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बेस फेयर से 50% कम चार्ज करने की अनुमति

ओला ऊबर सबसे बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियां हैं। पीक आवर्स में ऐसी कंपनियां किराया कई गुणा बढ़ाकर वसूलती हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा शुक्रवार को जारी मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 के अनुसार, ‘‘एग्रीगेटर कंपनियों को मूल किराये के 50 प्रतिशत तक न्यूनतम किराये और डेढ़ गुने तक अधिकतम किराये वसूलने की मंजूरी दी जाती है।’’ मंत्रालय ने कहा कि यह संसाधनों के इस्तेमाल को सुलभ करेगा और बढ़ावा देगा, जो कि परिवहन एग्रीगेशन के सिद्धांत का मूल है। यह गतिशील किराये के सिद्धांत को प्रमाणिक बनायेगा, जो मांग व आपूर्ति के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने में प्रासंगिक है। नये दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक सवारी (राइड) पर लागू किराये का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा एग्रीगेटर के साथ जुड़े वाहन के चालक को मिलेगा। शेष हिस्सा एग्रीगेटर कंपनियां रख सकती हैं। मंत्रालय ने कहा कि जिन राज्यों में शहरी टैक्सी का किराया राज्य सरकार ने निर्धारित नहीं किया है, वहां किराया विनियमन के लिये 25-30 रुपये को मूल किराया माना जायेगा। राज्य सरकारें एग्रीगेटर द्वारा जोड़े गये अन्य वाहनों के लिये इसी तरह से किराया निर्धारित कर सकती हैं।

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डेटा की सुरक्षा के लिए बनाया नियम

एग्रीगेटर्स को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए, जिस दिन डेटा जेनरेट किया गया था। डेटा को भारत सरकार के कानून के अनुसार सुलभ बनाना होगा लेकिन ग्राहकों के डेटा को यूजर्स की सहमति के बिना शेयर नहीं किया जाएगा। कैब एग्रीगेटर्स को एक 24X7 कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा और सभी ड्राइवरों को अनिवार्य रूप से हर समय कंट्रोल रूम से जुड़ा होना होगा





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PM के संयंत्र में आने से समाधानों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता मजबूत होगी: भारत बायोटेक

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   19:34
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PM के संयंत्र में आने से समाधानों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता मजबूत होगी: भारत बायोटेक
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प्रधानमंत्री मोदी ने भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वायरस के संभावित टीके कोवैक्सीन की प्रगति की समीक्षा करने के लिये जीनोम घाटी में स्थित उसके संयंत्र की यात्रा की।

नयी दिल्ली। दवा बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने शनिवार को कहा कि हैदराबाद में जीनोम घाटी में स्थित उसके संयंत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से वैज्ञानिक खोज और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं को सुलझाने की प्रतिबद्धता मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वायरस के संभावित टीके कोवैक्सीन की प्रगति की समीक्षा करने के लिये जीनोम घाटी में स्थित उसके संयंत्र की यात्रा की। 

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कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री की यात्रा से हमें टीके के लिए प्रेरणा मिली है। इससे वैज्ञानिक खोज, सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के निराकरण तथा कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई के प्रति हमारी प्रतिबद्धता मजबूत होती है।’’ कंपनी अभी कोवैक्सीन का तीसरे चरण का नैदानिक परीक्षण कर रही है।





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मेघालय में कोरोना के 71 नये मामले, एक और मरीज की जान गयी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   19:25
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मेघालय में कोरोना के 71 नये मामले, एक और मरीज की जान गयी
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राज्य में अबतक 111 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पूर्वी खासी पहाड़ी जिले में सबसे अधिक 53 नये मरीज सामने आये हैं जबकि पश्चिमी गारो पहाड़ी जिले में नौ और रि-भोई में तीन नये मामले सामने आये।

शिलांग। मेघालय में 71 और लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने के बाद शनिवार को राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 11,704 हो गयी। स्वास्थ्य सेवा निदेशक अमन वार ने बताया कि कोविड-19 से एक और मरीज की मौत हो जाने से राज्य में अबतक 111 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पूर्वी खासी पहाड़ी जिले में सबसे अधिक 53 नये मरीज सामने आये हैं जबकि पश्चिमी गारो पहाड़ी जिले में नौ और रि-भोई में तीन नये मामले सामने आये। 

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वार के मुताबिक, मेघालय में फिलहाल कोविड-19 के 858 मरीज उपचाराधीन हैं। उनके अनुसार शनिवार को 129 और मरीजों के स्वस्थ होने के साथ ही अबतक 10,735 लोग संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में अबतक कोविड-19 के लिये 2.39 लाख नमूनों की जांच हुई है।





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