Prabhasakshi NewsRoom: लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बने Himanta Biswa Sarma

देखा जाये तो उत्तर-पूर्व का राज्य असम कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता थ लेकिन अब यह भगवा किले में तब्दील हो चुका है। इस बार के विधानसभा चुनावों में राजग लगातार तीसरी बार दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आया, जिसमें अकेले भाजपा को 82 सीटें मिलीं।
हिमंत बिस्व सरमा ने आज एक बार फिर असम की कमान संभाल ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने खानापारा क्षेत्र के वेटरनरी मैदान में 11 बजकर 40 मिनट पर हिमंत बिस्व सरमा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। सरमा के साथ चार अन्य विधायकों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। हिमंत का राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में यह लगातार दूसरा कार्यकाल है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तथा कई केंद्रीय मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय व राज्य पदाधिकारी तथा एनडीए के तमाम नेता उपस्थित थे। शपथ समारोह में कई शीर्ष उद्योगपति, सत्राधिकार (वैष्णव मठों के प्रमुख) और अन्य गणमान्य व्यक्ति, भाजपा कार्यकर्ता और बूथ समिति अध्यक्ष भी शामिल हुए।
57 वर्षीय हिमंत बिस्व सरमा असम में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। सरमा के साथ शपथ लेने वाले चार विधायकों में भाजपा के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, सहयोगी दल असम गण परिषद (अगप) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो शामिल हैं। अंजता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो इससे पहले भी सरमा के पहले मंत्रिमंडल में सदस्य थे, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्य की राजनीति में फिर से वापसी की है। यह राज्य में एनडीए गठबंधन की तीसरी सरकार है। एनडीए पहली बार 2016 में सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सत्ता में आया था जो अब केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
इसे भी पढ़ें: Assam में BJP की हैट्रिक पर बोलीं दर्शना जारदोश- PM Modi के नेतृत्व में पूरी होंगी उम्मीदें
देखा जाये तो उत्तर-पूर्व का राज्य असम कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता थ लेकिन अब यह भगवा किले में तब्दील हो चुका है। इस बार के चुनावों में राजग लगातार तीसरी बार दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आया, जिसमें अकेले भाजपा को 82 सीटें मिलीं। उसके सहयोगी, अगप और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 126 सदस्यों वाली विधानसभा में 10-10 सीटें मिलीं। दूसरी ओर, कांग्रेस सिर्फ 19 सीटें जीत सकी। कांग्रेस 1978 तक राज्य में सबसे बड़ी ताकत थी, जब जनता पार्टी ने इसे पहली बार सत्ता से बाहर कर दिया था।
हालांकि, जनता पार्टी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। 1979 से 1985 तक के राजनीतिक रूप से उतार-चढ़ाव वाले समय में घुसपैठ के खिलाफ असम आंदोलन हुआ, जिसमें सत्ता कांग्रेस और राष्ट्रपति शासन के बीच झूलती रही। आंदोलन से उपजी अगप ने 1985 में अपनी पहली जीत में और फिर 1996 में सत्ता हासिल की। कांग्रेस ने 2001 में फिर सरकार बनाई 2011 के चुनावों में लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर उसने अपनी स्थिति मजबूत की, जब उसने अपने दम पर 78 सीट हासिल की थीं। कांग्रेस के अंतिम कार्यकाल में विधानसभा में सिर्फ पांच विधायक वाली भाजपा ने 2016 में ज़बरदस्त बढ़त हासिल की, 60 सीटें जीतीं और अगप तथा बीपीएफ के साथ अपने गठबंधन को कुल 86 सीटों तक पहुंचाया। साल 2021 के चुनाव में भी भाजपा ने 60 सीटों पर जीत हासिल की और राजग को 75 सीट मिलीं। हालांकि, इस चुनाव में उनकी सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, जो कांग्रेस को छोड़कर किसी भी पार्टी की अब तक की सबसे अधिक सीटें हैं, जबकि राजग गठबंधन के खाते में 102 विधायक आए।
हम आपको याद दिला दें कि हिमंत बिस्व सरमा ने सर्वानंद सोनोवाल से असम में दूसरी राजग सरकार का नेतृत्व संभाला था। अगप के प्रफुल्ल कुमार महंत के बाद, वह दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता होंगे। महंत पांच साल के अंतराल के बाद सत्ता में लौटे थे, वहीं सरमा लगातार दूसरी बार सरकार की कमान संभाल रहे हैं। यह उपलब्धि अब तक सिर्फ कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के नाम थी।
अन्य न्यूज़















