सिर्फ 1 वोट से जीती थी MLA सीट, अब Madras High Court ने Floor Test में वोटिंग पर लगाई रोक।

पेरियाकरुप्पन ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया था कि चुनाव अधिकारियों ने गलती से डाक मतपत्र को शिवगंगा जिले के बजाय तिरुप्पत्तूर के एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया, जिसके कारण वह वहां खारिज हो गया। पेरियाकरुप्पन मात्र एक वोट के अंतर से 83,374 वोटों से हार गए।
मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक अंतरिम आदेश जारी कर तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तिरुप्पत्तूर निर्वाचन क्षेत्र से विजयी हुए तमिलगा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) के उम्मीदवार सीनिवासा सेतुपति को 13 मई को होने वाले राज्य विधानसभा के सदन परीक्षण और विश्वास प्रस्ताव में भाग लेने से रोक दिया। न्यायमूर्ति एल विक्टोरिया गौरी और एन सेंथिल कुमार की पीठ ने तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र के डाक मतपत्र विवाद के मद्देनजर अंतरिम आदेश में सेतुपति को मतदान करने से रोक दिया। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सोमवार को अदालत को बताया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन की विवादित डाक मतपत्र संबंधी शिकायत पर कार्रवाई करने का अधिकार क्षेत्र चुनाव आयोग के पास नहीं है।
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पेरियाकरुप्पन ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया था कि चुनाव अधिकारियों ने गलती से डाक मतपत्र को शिवगंगा जिले के बजाय तिरुप्पत्तूर के एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया, जिसके कारण वह वहां खारिज हो गया। पेरियाकरुप्पन मात्र एक वोट के अंतर से 83,374 वोटों से हार गए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि मतपत्र वैध होता और उनके पक्ष में गिना जाता, तो चुनाव परिणाम बराबरी पर समाप्त होता। चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील जी राजगोपालन ने याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि पेरियाकरुप्पन ने अपने दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव आयोग की भूमिका समाप्त हो गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि पेरियाकरुप्पन का दावा पूरी तरह से एक चुनाव प्रतिनिधि के बयान पर आधारित है।
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चुनाव आयोग ने डाक मतपत्रों में किसी भी प्रकार की त्रुटि होने के सुझाव का भी खंडन किया और इसे सबूत का मामला बताया। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सेथुपथी को अंतरिम निर्देश जारी करने के लिए प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मंगलवार के निर्देशों को संबंधित सीट के लिए मतों की दोबारा गिनती का आदेश नहीं समझा जाना चाहिए।
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