भूकंप के झटकों से कितनी तैयार है राजधानी दिल्ली, जानिए क्या कहते है एक्सपर्ट?

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निधि अविनाश । Dec 19 2020 7:01PM

नैशनल सेंटर ऑफ सिस्मेलॉजी के मुताबिक, दिल्ली में ऐसे भूकंप सन 1700 से लेकर साल 2020 तक 4 या 6 बार महसूस किए जा चुके हैं। गौरतलब है कि 27 अगस्त 1960 को फरीदाबाद में 6 की तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था वहीं साल 1803 में मथुरा में 6.8 की तीव्रता के भूकंप के झटके आए थे।

दिल्ली-एनसीआर में अप्रैल महीनें से लेकर अब-तक 15 से अधिक बार भूकंप के झटके महसूस कर लिए गए है। हाल-फिलहाल 17 दिसंबर को दिल्ली में आए भूकंप के झटके ने फिर से दिल्ली को हिला दिया। बता दें कि इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 दर्ज की गई। एक्सपर्ट कहते है कि, ऐसे बार-बार भूकंप का आने का मतलब दिल्ली-एनसीआर के फॉल्ट इस समय एक्टिव हैं जिसकी तीव्रता 6.5 तक भी रह सकती है। दिल्ली में ऐसे भूकंप के झटके आते ही रहेंगे लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली इन भूकंप के झटकों के लिए तैयार है भी या नहीं?

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नैशनल सेंटर ऑफ सिस्मेलॉजी के मुताबिक, दिल्ली में ऐसे भूकंप सन 1700 से लेकर साल 2020 तक 4 या 6 बार महसूस किए जा चुके हैं। गौरतलब है कि 27 अगस्त 1960 को फरीदाबाद में 6 की तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था वहीं साल 1803 में मथुरा में 6.8 की तीव्रता के भूकंप के झटके आए थे। एक्सपर्ट का कहना है कि दिल्ली के हालात को देखते हुए अगर  6.5 तीव्रता का भूकंप आता है तो इससे दिल्ली-एनसीआर को काफी नुकसान पहुंच सकता है। एनसीएस के पूर्व हेड डॉ. ए. के. शुक्ला के अनुसार, दिल्ली को  हिमालय बेल्ट से काफी खतरा है क्योंकि अगर भूकंप आता है तो इसकी तीव्रता 8 तक भी हो सकती है। 

 

कितनी तैयार है दिल्ली?

 बता दें कि सालों से दिल्ली-एनसीआर में बड़ा भूकंप नहीं आया है और अगर ऐसा होता है तो दिल्ली इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। इसका कारण है दिल्ली में 32 लाख से अधिक बिल्डिंग्स का होना। बता दें कि दिल्ली में इंजीनियरों की कमी है औऱ रेट्रोफिटिंग काफी कम समय में होना असंभव है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर इलाका भूकंप को लेकर जोन-4 में है और  एनआईएस की एक स्टडी के मुताबिक दिल्ली का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा जोन-5 में है जो भूकंप को लेकर काफी संवेदनशील माना जाता है। पूरानी बिल्डिंग्स को मरम्मत की जरूरत है क्योंकि 2 सालों में दिल्ली रीजन में कम से कम 64 झटके महसूस किए गए है जिनकी तीव्रता 4 से 4.9 के बीच रही है।

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आबादी का तेजी से बढ़ना और ऐसे में अगर भूकंप आता है तो इससे काफी नुकसना पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली की इमारतें इतने मजबूत नहीं है कि वह भूकंप के तेज झटकों को सह सके। वल्नेरेबिलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि दिल्ली के 91.7 प्रतिशत मकानों की दीवार पक्की ईंटो से तैयार हुए है वहीं कच्ची ईंटों से 3.7 प्रतिशत मकानों की दीवारें बनी हैं जिससे भूकंप के दौरान काफी समस्या आ सकती है। 

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