INDIA गठबंधन ने President Droupadi Murmu से मांगा मिलने का समय, जवाब का इंतजार

President Murmu
ANI
अंकित सिंह । Oct 8 2026 4:31PM

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। विपक्ष ने 5 अक्टूबर को नेताओं की सूची भेजकर मुलाकात का अनुरोध किया था और वे राष्ट्रपति भवन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को कहा कि INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है और वे राष्ट्रपति भवन से जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहला अनुरोध पत्र 2 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद, राष्ट्रपति भवन कार्यालय ने उन नेताओं के नाम मांगे जो बैठक में शामिल होंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि इसके बाद, हमने 5 अक्टूबर को नामों के साथ फिर से अनुरोध भेजा और 7, 8 या 9 अक्टूबर को मिलने का समय मांगा। उन्होंने कहा कि अब तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है। हम शुक्रवार तक इंतज़ार करेंगे।

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पिछले हफ़्ते, INDIA गठबंधन ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन) के मुद्दे पर रैलियां करने और लोकतंत्र बचाओ मार्च निकालने समेत एक संयुक्त कार्य योजना को अंतिम रूप दिया था। विपक्षी गठबंधन ने अपने नेताओं की साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद यह बात कही। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, TMC प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, RJD के तेजस्वी यादव और NCP(SP) सांसद सुप्रिया सुले शामिल थे।

पत्रकारों को जानकारी देते हुए खड़गे ने कहा था कि INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगने और "वोट चोरी करने वाली सरकार" के ख़िलाफ़ अपनी बात रखने का फ़ैसला किया है। विपक्ष के नेताओं का राष्ट्रपति से मिलने का फ़ैसला 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद आया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी। ये आपत्तियां ज़्यादातर वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) से जुड़े फ़ैसलों और आदेशों को लेकर थीं।

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SIR प्रक्रिया को लेकर अपने दो आयुक्तों की आपत्तियों के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने कहा था कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। साथ ही, आयोग के सभी आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही जारी किए जाते हैं।

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