संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी OHCHR के बयान को भारत ने बताया अस्वीकार्य हस्तक्षेप

विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की टिप्पणी को पूरी तरह अनुचित बताया है। भारत ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल करार देते हुए एजेंसी के चयनात्मक रुख और दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की गारंटी देता है जो सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के अधीन है।
भारत ने दिल्ली में हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताने वाली संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार एजेंसी की टिप्पणियों को रविवार को खारिज करते हुए उन्हें ‘‘अनुचित’’ और देश के आंतरिक मामलों में ‘‘अस्वीकार्य हस्तक्षेप’’ करार दिया। जिनेवा स्थित मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने शनिवार को अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान किया जाए और इसे सुनिश्चित किया जाए। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘ओएचसीएचआर की चिंताएं अनुचित हैं और भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप हैं।’’ जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भी शनिवार रात इसी तरह का बयान जारी किया था।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच शनिवार को नयी दिल्ली में 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘हम यह भी देखते हैं कि सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के मामले में ओएचसीएचआर बेहद चुनिंदा रुख अपनाता है। हमारे पड़ोसी देशों में विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ हुई हिंसक कार्रवाई पर उसने कोई टिप्पणी नहीं की।
इसी तरह, अपने आसपास के क्षेत्र में कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पर भी उसने चुप्पी साध रखी है।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस तरह के दोहरे मापदंडों से उसकी साख कम होती है और बहुपक्षवाद में भरोसा भी घटता है।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ‘‘दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां हमारे संविधान में शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार की गारंटी दी गई है और मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा स्वतंत्र मीडिया के माध्यम से इसकी रक्षा की जाती है।’’ विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘हर लोकतंत्र की तरह भारत में भी नागरिक सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की शर्तों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमारी कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानून के मुताबिक सख्ती से काम करती हैं और किसी भी शिकायत के निवारण के लिए हमारी अदालतों का दरवाजा सभी के लिए खुला है।
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