इंदिरा के चहेते और CM को भी हराने वाले रामकृष्ण आखिर क्यों हुए कांग्रेस से निष्कासित

इंदिरा के चहेते और CM को भी हराने वाले रामकृष्ण आखिर क्यों हुए कांग्रेस से निष्कासित

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की मणिराम सीट से उपचुनाव लड़ने वाले राम कृष्ण द्विवेदी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह को मात दी थी।

नयी दिल्ली। लोकसभा चुनाव के दरमियां सियासी राज्य उत्तर प्रदेश में एक नारा बहुत ज्यादा गूंजा था, वो नारा था प्रियंका नहीं आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी हैं। जिसके बाद से यह कहा जाने लगा कि प्रियंका सुस्त पड़ी पार्टी में एक नई जान डाल देंगी और वह पार्टी के लोगों को फिर से एकजुट करेंगी और चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को मात देंगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ, बुरी तरह से कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मात खाई। यहां तक कि उन्हें अपनी परम्परागत सीट अमेठी भी गंवानी पड़ी।

लेकिन किसी ने इस स्लोगन पर ध्यान दिया- प्रियंका नहीं आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी हैं। इस स्लोगन के जरिए यह बताने का प्रयास किया जा रहा था कि इंदिरा गांधी की वापसी हुई है वो भी अपनी पोती प्रियंका के तौर पर। तो क्या प्रियंका इंदिरा की ही भांति अपने लोगों पर भरोसा कर जता सकती हैं या फिर इंदिरा गांधी के भरोसेमंद लोगों के साथ खड़ी हो सकती हैं ? यह सवाल बेहद अहम है क्योंकि हम आपको एक ऐसे व्यक्ति से रूबरू कराने जा रहे हैं जो इंदिरा गांधी के बेहद करीबी और खास थे, जिनका कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने अपमान किया है।

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अनुशासनहीनता के आरोप में कांग्रेस ने पार्टी के 10 वरिष्ठ नेताओं निष्कासित कर दिया। निष्कासित किए गए इन नेताओं में राम कृष्ण द्विवेदी भी शामिल थे। जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं, उस वक्त राम कृष्ण द्विवेदी उनके चहेते और सबसे ज्यादा विश्वासपात्र हुआ करते थे। इतना ही नहीं राम कृष्ण द्विवेदी ने तो 1971 में हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री टीएन सिंह को मात दे दी थी। ये वहीं टीएन सिंह हैं जिन्हें त्रिभुवन नारायण सिंह के नाम से जाना जाता है और वे 18 अक्टूबर 1970 से लेकर 3 मार्च 1971 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं।

कौन हैं राम कृष्ण द्विवेदी

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की मणिराम सीट से उपचुनाव लड़ने वाले राम कृष्ण द्विवेदी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह को मात दी थी। चुनाव लड़ने से पहले राम कृष्ण द्विवेदी अमर उजाला में संवाददाता थे। बाद में उन्होंने युवा कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया था। फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उम्मीदवार के तौर पर टीएन सिंह को मात दी थी, जिन्हें उत्तर प्रदेश की सियासत के सबसे ताकतवर नेता चंद्रभानु गुप्ता का समर्थन प्राप्त था। भारतीय राजनीति में यह पहली दफा हुआ था जब कोई मुख्यमंत्री उपचुनाव हारा हो।  मुख्यमंत्री को हराने वाले राम कृष्ण द्विवेदी का कद अचानक से बढ़ गया। बाद में उन्हें प्रदेश का गृह मंत्री भी बनाया गया था। 

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पार्टी से नाराज दिखे निष्कासित नेता

पार्टी से निकाले गए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अपने निष्कासन को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर आए बाहरी तत्व इस घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं। सभी निष्कासित नेताओं का कहना है कि वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं लिहाजा प्रदेश कांग्रेस कमेटी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।

प्रियंका को लेकर नाराज नहीं दिखे राम कृष्ण द्विवेदी

प्रेस कांफ्रेंस में 87 वर्षीय राम कृष्ण द्विवेदी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस की विचारधारा पर दृढ़ विश्वास है और वह पार्टी से निकाले जाने से बेहद दुखी हैं। ऐसा लगता है कि इसमें गहरी साजिश है और पार्टी में बाहर से आये तत्वों ने इसे अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील करेंगे, ताकि गुनहगार को सजा मिल सके।

हालांकि प्रियंका गांधी की भूमिका को लेकर जब निष्कासित नेताओं से सवाल पूछा गया तो राम कृष्ण द्विवेदी ने कहा कि पार्टी महासचिव भी अनुशासन समिति के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं। कांग्रेस संविधान से चलेगी। 

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उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हम न तो पार्टी की नीतियों का विरोध कर रहे हैं और न ही हम प्रियंका के फैसले से नाराज हैं। वो हमारी नेता हैं।

आपको बता दें कि प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व गृह मंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व विधान परिषद सदस्य सिराज मेंहदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्र, विनोद चौधरी और नेक चन्द्र पाण्डेय तथा युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वयं प्रकाश गोस्वामी और वरिष्ठ नेता संजीव सिंह तथा राजेन्द्र सिंह सोलंकी को अनुशासनहीनता के आरोप में रविवार को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।





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