Election Commission निष्पक्ष रहे, ISF सिंबल मामले में Calcutta High Court की तीखी टिप्पणी

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ANI

कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा लिफाफा चुनाव चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के गुट को आवंटित करने के फैसले की आलोचना की है। पहले यह चिह्न आईएसएफ इस्तेमाल करती थी। कोर्ट ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 183 अन्य विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद यही विवादित चिह्न क्यों चुना गया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग के उस फ़ैसले की आलोचना की, जिसमें उसने पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों के लिए 'लिफ़ाफ़ा' चुनाव चिह्न तृणमूल कांग्रेस के ऋतब्रत बनर्जी वाले गुट को आवंटित किया था। यह चिह्न पहले इंडियन सेक्युलर फ़्रंट (ISF) इस्तेमाल करता था। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए और सवाल उठाया कि जब 183 अन्य चिह्न उपलब्ध थे, तो आयोग ने ऋतब्रत गुट के लिए लिफ़ाफ़ा चिह्न ही क्यों चुना। कानूनी वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने कहा अथॉरिटी को निष्पक्ष और सही तरीके से काम करना चाहिए। कुछ महीने पहले ही एक आपत्ति जताई गई थी, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरी पार्टी ने किया और आपके पास 183 सिंबल हैं? उसे क्यों शामिल किया गया? और निष्पक्ष होने के बजाय आप नियम बना रहे हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल की विपक्षी पार्टी ISF की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस याचिका में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग द्वारा रिताब्रता बनर्जी की 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' को 'लिफ़ाफ़ा' (envelope) सिंबल आवंटित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

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लाइव-लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि ISF को पहले लिफ़ाफ़ा (envelope) का चुनाव चिह्न दिया गया था, लेकिन यह चिह्न पार्टी के लिए आरक्षित (reserved) होने के बजाय एक 'फ़्री' चिह्न ही बना रहा। चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि ISF एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, इसलिए वह किसी आरक्षित चुनाव चिह्न पर अपना दावा नहीं कर सकती। कोर्ट ने पूछा कि आपके अधिकारी ऐसा क्यों कर रहे हैं? वे ऐसे विवादों में क्यों पड़ रहे हैं? उनके पास कितने सिंबल हैं? 183? आप लिफ़ाफ़े क्यों रख रहे हैं? हाई कोर्ट ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग की हरकतें राजनीतिक पार्टियों को बेवजह कानूनी लड़ाई में धकेल रही हैं। 

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कोर्ट ने टिप्पणी की, "क्या आपके अधिकारी कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए लोगों को परेशान कर रहे हैं? क्या यही उनके काम करने का तरीका है? कोर्ट ने पूछा कि आपके अधिकारी ऐसा क्यों कर रहे हैं? वे ऐसे विवादों में क्यों पड़ रहे हैं? उनके पास कितने सिंबल हैं? 183? आप लिफ़ाफ़े क्यों रख रहे हैं? हाई कोर्ट ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग की हरकतें राजनीतिक पार्टियों को बेवजह कानूनी लड़ाई में धकेल रही हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की,क्या आपके अधिकारी कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए लोगों को परेशान कर रहे हैं? क्या यही उनके काम करने का तरीका है?

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