कांग्रेस नेता कमलनाथ को दहेज में मिली है छिंदवाड़ा की राजनीति

By रेनू तिवारी | Publish Date: Aug 8 2018 3:13PM
कांग्रेस नेता कमलनाथ को दहेज में मिली है छिंदवाड़ा की राजनीति
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छिंदवाड़ा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ की ताजपोशी मध्यप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी ने की। 2018 साल के अंत में मध्यप्रदेश में लोकसभा के चुनाव होने वाले है।

छिंदवाड़ा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ की ताजपोशी मध्यप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी ने की। 2018 साल के अंत में मध्यप्रदेश में लोकसभा के चुनाव होने वाले है ऐसे में कमलनाथ के दम पर कांग्रेस एमपी में सत्ता हासिल करने का ख्वाब देख रही है, अब ये ख्वाब उसका पूरा होता है या नहीं, ये तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन आइये जानते है कमलनाथ के बारे में जिसको इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है वो कौन है और कांग्रेस में उनकी क्या भूमिका हैं। कांग्रेस के सीनियर मोस्ट नेताओं में से एक कमलनाथ ज़मीन से जुड़े नेता हैं। कमलनाथ छिंदवाड़ा से नौ बार चुनाव जीत कर लोकसभा में पहुंचे है। कमलनाथ इस समय लोकसभा में कांग्रेस के एक बड़े नेता के रूप में अपना प्रतिनिधित्व रखते हैं। यूपीए सरकार में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने मोदी की लहर के बाद भी चुनाव जीता। 

भाजपा को जिताए

प्रारंभिक जीवन

कमलनाथ का जन्म 18 नवम्बर 1946 को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में श्री महेन्द्रनाथ के घर में हुआ था। देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई करने के बाद कमलनाथ ने कोलकाता के सेंट ज़ेवियर कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की। 34 साल की उम्र में 1980 के चुनाव में सांसद बनकर दिल्ली पहुंचे थे।

सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान के लिए कमलनाथ को 2006 में जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। 2007 में FDI मैगज़ीन और फ़ाइनेंशियल टाइम्स बिज़नेस नेउन्हें FDI पर्सनैलिटी ऑफ़ द ईयर से नवाज़ा। ये सम्मान उन्हें विदेशी व्यापरियों को हिंदुस्तान की तरफ़ खींचने, निर्यात और निवेश को बढ़ावा देने के लिए दिया गया।



राजनीतिक सफर का ओर

कमलनाथ मध्यप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष है। कांग्रेस के कमलनाथ ने छिंदवाड़ा से जीत दर्ज करके नौंवी बार लोकसभा चुनाव में जीतने वाले सांसद हैं और 16वीं लोकसभा में नाथ सबसे अधिक बार चुन कर आने वाले सदस्य मे से एक है। कमलनाथ के इससे पहले आठ बार सांसद चुने गए थे। 11वीं लोकसभा को छोड़कर नाथ 7वीं, 8वीं, 9वीं, 10वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा के सदस्य रहे।

कमलनाथ पहली बार 1991 में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने। उसके बाद उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा। उसके बाद वे कपड़ा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), केंद्रीय उद्योग मंत्री, परिवहन व सडक़ निर्माण मंत्री, शहरी विकास, संसदीय कार्य मंत्री बने। उन्होंने संगठन में भी महासचिव जैसे पद की जिम्मेदारी निभाई।

कांग्रेस नेता की पारिवारिक स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि वे 27 जनवरी, 1973 को अलका नाथ के साथ परिणय सूत्र में बंधे। उनके दो बेटे हैं। कमलनाथ की गिनती कभी संजय गांधी और फिर राजीव गांधी के करीबियों में होती रही है। उसके बाद उनका सोनिया गांधी और राहुल गांधी से अच्छा तालमेल है।

कमलनाथ थे संजय गांधी के बेस्ट फ्रेंड



वैसे कमलनाथ का मध्यप्रदेश से सिर्फ राजनीतिक रिश्ता है। वह रहने वाले पश्चिम बंगाल के हैं। उनकी असली ताकत गांधी परिवार से उनकी पुरानी मित्रता है। संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्ती के किस्से आज भी राजनीतिक गलियारों के हॉट टॉपिक्स में से एक हैं। कहा जाता है कि दोनों की मित्रता दून स्कूल से प्रारंभ हुई थी जो कि संजय गांधी के मौत के बाद ही खत्म हुई लेकिन संजय गांधी की दोस्ती ने उन्हें गांधी परिवार के बेहद करीब ला दिया।

जब आपातकाल का दौर बना कमलनाथ की पैसा कमाने की मशीनरी

कहते है आपातकाल के दौर में जहां एक और प्रशासनिक मशीनरी जनता पर कहर ढा रही थी तो कुछ लोग इस दौरान अपना हित साधने में नहीं चूक रहे थे। आपातकाल से पहले तक कमलनाथ की कंपनी ईएमसी लिमिटेड जमकर घाटे में चल रही थी। कहा जाता है कि कंपनी को अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं थे। आपातकाल के बाद कंपनी जमकर मुनाफे में आ गई। आपातकाल में देश में होने वाले ज्यादातर कामों के ठेके कमलनाथ की ही कंपनी को ही मिले। दिसंबर 1975 से जुलाई 1976 के बीच ही इनकी कंपनी को चार करोड़ 73 लाख रुपए के ठेके दिए गए। कंपनी ने ठेके तो लिए और काम का भुगतान भी ले लिया पर काम कुछ भी नहीं किया। बाद में ईएमसी कंपनी को ठेके देने के मामले की जांच के लिए आयोग बनाया गया। इस आयोग की अपनी बैठक जनवरी 1978 में हुई थी। इसके बाद कुछ नहीं हुआ। बाद के सालों में आयोग का क्या हुआ यह भी पता नहीं चला।

देश के पांच सबसे अमीर सांसदों में एक कमलनाथ



कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं में से एक कमलनाथ की गिनती देश के सबसे रईस नेताओं में की जाती है। 2014 में हुए चुनाव के दौरान कमलनाथ के द्वारा दिए गए हलफनामे में उनकी संपत्ति का ब्यौरा काफी चौंकाने वाला था। कमलनाथ और उनके परिवार से जुड़ी 23 कंपनियां हैं। देश के पांच सबसे अमीर सांसदों में जगह रखने वाले कमलनाथ पिछले चुनाव में मोदी लहर के बावजूद अपना कद बनाए रखने में कामयाब रहे थे।  छिंदवाड़ा में कमलनाथ की अलीशान कोठी 10 एकड़ में फैली हुई है। उनका सारा कारोबार उनके दोनों बेटे बकुलनाथ और नकुलनाथ संभालते हैं। चुनावी हलफनामे में कमलनाथ ने जिक्र किया था कि कमलनाथ ने अपनी बीवी को 4.6 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है। कमलनाथ की पत्नी अलका के नाम 10.4 करोड़ की प्रॉपर्टी है। देश के दिग्गज कारोबारियों से मधुर रिश्ते रखने वाले कमलनाथ भाजपा नेताओं से भी बढ़िया तालमेल बनाते आए हैं। कहा जाता है कि मप्र के सीएम शिवराज सिंह को भी कमलनाथ ने अपने कुछ कारोबारी मित्रों से मदद दिलवाई थी।

कमलनाथ को दहेज में मिला है एमपी का छिंदवाड़ा

कहते है कि भाजपा ने शुरू से ही कांग्रेस नेता कमलनाथ को मध्यप्रदेश की सीट छिंदवाड़ा दहेद में जे रखी है। कहते है कि कमलनाथ के ससुर एक समय में RSS के प्रचारक थे और उनके भाजपा के बड़े नेताओं के साथ अच्छे संबंध भी थे। कमलनाथ के रिश्ते गांधी परिवार से बहुत ही अच्छे थे इंदिरा गांधी कमल को अपना तीसरा बेटा मानती थी। कमल के रिश्ते भाजपा और कांग्रेस दोनों से ही हमेशा मधुर रहे है इस लिए छिंदवाड़ा में लोग कमलनाथ को काफी पसंद करते है या एक कहावत के तौर पर कहेस तो कमलनाथ को छिंदवाड़ा की जनता अपना दमाद मानती है। 

साफ-सुथरे नेता की छवि

कांग्रेस के कई नेताओं की छवि काफी साफ-सुथरी है उनमें से ही एक है पूर्व केबिनेट मंत्री कमलनाथ। अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत से ही कमल विवादों से दूर रहै। वो लगातार चुनाव लड़े लेकिन हवाला कांड में नाम आने की वजह से उन्हें 1996 में आम चुनाव नहीं लड़ पाए थे, तब पार्टी ने उनकी जगह उनकी पत्नी अलका को टिकट दिया था जो कि भारी मतों से विजयी हुई थीं। लेकिन जब एक साल बाद वो इस कांड में बरी हुए थे तो उनकी पत्नी ने छिंदवाड़ा की सीट से इस्तीफा दे दिया और कमलनाथ ने वापस वहां से चुनाव लड़ा लेकिन वो बीजेपी के सुंदरलाल पटवा से हार गए। हालांकि उनका नाम साल 1984 के पंजाबी दंगों में भी उछला था लेकिन कोई भी अपराध उनका सिद्ध नहीं हो पाया।

 

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