Mamata Banerjee के वफादारों ने संभाला मोर्चा, TMC के बागी गुट को रोकने के लिए स्पीकर से मिले कीर्ति-सागरिका

TMC
ANI
एकता । Jun 14 2026 6:35PM

टीएमसी में संभावित विभाजन की खबरों के बीच, पार्टी के वफादार सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। सांसदों ने बागी गुट बनाने के प्रयास को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए सांसदों की नैतिक कमजोरी को दर्शाता है।

तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसदों की बगावत की खबरों के बीच, ममता बनर्जी के वफादार सांसदों ने भी दिल्ली में मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष अचानक लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आवास पर पहुंचे। जब मीडिया ने कीर्ति आजाद से पूछा कि क्या उनके पास स्पीकर से मिलने का पहले से समय है, तो उन्होंने कहा, "अगर सर हमें समय देंगे, तो हम अंदर जाएंगे। नहीं तो, हम वापस चले जाएंगे।"

संसद में अलग गुट बनाना संविधान और कानून के खिलाफ

लोकसभा स्पीकर के दफ्तर को पत्र सौंपने के बाद टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने मीडिया से बात करते हुए बागी गुट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "हमने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र दिया है, जिसमें साफ कहा गया है कि टीएमसी एक अटूट और अविभाज्य पार्टी है। आप लोकसभा के भीतर कोई भी अलग गुट नहीं बना सकते। यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। जो लोग टीएमसी को तोड़ना चाहते हैं और संसद के अंदर अलग ग्रुप बनाना चाहते हैं, कानून इसकी इजाजत बिल्कुल नहीं देता।"

बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए सागरिका ने आगे कहा, "यह आपकी नैतिक कमजोरी को दिखाता है कि जब पार्टी चुनाव हारती है, तो आप उस पार्टी, उस नेता और उस चुनाव चिह्न को ही छोड़ देते हैं, जिसके दम पर आप चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।"

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कीर्ति आजाद ने दिया 10वीं अनुसूची का हवाला

पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कानूनी नियमों की बात करते हुए कहा, "यह पूरा मामला बिल्कुल साफ है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने इस पर फैसला दिया है और संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 में भी इसका साफ जिक्र है कि पार्टी के भीतर अब किसी भी तरह का विभाजन मान्य नहीं हो सकता।"

महाराष्ट्र की सियासत का उदाहरण देते हुए उन्होंने आगे कहा, "महाराष्ट्र में जो कुछ भी हुआ था, वह पूरी तरह गलत था। इसलिए, हम इसी मामले को लेकर एक आवेदन के साथ यहां आए हैं और हमने स्पीकर को अपना पत्र सौंप दिया है। हमें पूरा भरोसा है कि लोकसभा स्पीकर नियमों और देश के संविधान के अनुसार ही सही फैसला लेंगे, जैसा कि वे अब तक करते आए हैं।"

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