'सिर्फ विरोध-प्रदर्शन होने पर नहीं कर सकते लाठीचार्ज', Supreme Court की तल्ख टिप्पणी, निष्पक्ष जांच की बात कही

Supreme Court
ANI
रेनू तिवारी । Jul 27 2026 11:38AM

हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों को लेकर चल रही बहस के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि सिर्फ़ विरोध-प्रदर्शन होने की वजह से लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता।

हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों को लेकर चल रही बहस के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि सिर्फ़ विरोध-प्रदर्शन होने की वजह से लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता।भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के मामलों से जुड़ी नई याचिकाओं का ज़िक्र उनके सामने किया गया। इनमें से एक याचिका छात्रों के एक समूह ने दायर की है, जिनका दावा है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी पिटाई की गई थी।

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 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनुशासन और प्रोटोकॉल में एकरूपता जरूरी'

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने मौखिक रूप से कहा: "संविधान के तहत शांतिपूर्ण और कानूनी विरोध-प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है। जब तक विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, सिर्फ इसलिए कि विरोध हो रहा है, ज्यादती नहीं की जा सकती... अगर ज्यादती हुई है, तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। यह सिर्फ दिल्ली का मामला नहीं है। पूरे देश में पुलिस प्रोटोकॉल में एकरूपता जरूरी है। सिर्फ विरोध-प्रदर्शन होने का मतलब लाठीचार्ज नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनुशासन अहम है।"

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याचिकाओं में गंभीर आरोप: सिवान में AK-47 के इस्तेमाल का दावा

अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में छात्रों के एक समूह ने दावा किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा उन पर बर्बरता से हमला किया गया और उनकी पिटाई की गई। इसके अलावा, एक बेहद चौंकाने वाली याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा AK-47 राइफलों तक का इस्तेमाल किया गया। कोर्ट ने इन दावों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पुलिस द्वारा अंधाधुंध बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

'पुलिसकर्मी और छात्र दोनों की सुरक्षा समान चिंता का विषय'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील को भी कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी।

मामले पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि चोट चाहे छात्र को लगे या किसी पुलिस जवान को, दोनों ही अदालत के लिए समान रूप से चिंता का विषय हैं। उन्होंने राज्य सरकारों की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा: "किसी व्यक्ति को चोट लगना, चाहे वह पुलिसकर्मी हो या छात्र, समान चिंता का विषय है। हम राज्यों से यह जवाब मांग सकते हैं कि ऐसी उग्र स्थितियों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को हेलमेट और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण क्यों मुहैया नहीं कराए गए?"

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