लोकसभा अध्यक्ष ने की हाउस पैनल प्रणाली की समीक्षा की मांग, 1993 में में हुई थी शुरुआत

लोकसभा अध्यक्ष ने की हाउस पैनल प्रणाली की समीक्षा की मांग, 1993 में में हुई थी शुरुआत

बिरला ने कहा, “यह फैसला किया गया था कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सभी समितियों के गठन की समीक्षा की जाएगी और इसकी जांच की जाएगी कि लोकसभा की समितियों की समग्र प्रणाली में बदलाव की जरूरत है या नहीं।”

1993 में पहली बार पेश किए जाने के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बजट प्रस्तावों और महत्वपूर्ण सरकारी नीतियों की जांच करने वाली समिति प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने के लिए कहा और एक राय मांगी कि क्या पैनल संचालन के तरीके में बदलाव की आवश्यकता है? 

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यह निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि 17 विभागों से संबंधित स्टैंडिंग कमेटी के तत्कालीन स्पीकर शिवराज पाटिल के दौरान लाया जाना एक महत्वपूर्ण प्रयोग था, जिसके कारण संसदीय स्क्रूटनी बढ़ गयी और परिणाम स्वरूप सांसदों को विधायिकी और किसी विशेष के महत्वपूर्ण फैसलों को परीक्षित करने में बड़ा रोल मिला। हालांकि, रिपोर्ट तैयार करने में देरी और अनुपस्थिति की चिंता से प्रभावित हुई है, जिसे दिसंबर में राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू द्वारा उल्लेखित किया गया था।

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बिरला ने कहा, “यह फैसला किया गया था कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सभी समितियों के गठन की समीक्षा की जाएगी और इसकी जांच की जाएगी कि लोकसभा की समितियों की समग्र प्रणाली में बदलाव की जरूरत है या नहीं।” लोकसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों से उन प्रस्तावों का परीक्षण करने के लिए कहा जिनके माध्यम से संयुक्त समितियों का गठन किया गया था। उन्होंने सांसदों का एक रिकॉर्ड भी मांगा है, जिन्होंने भौतिक और डिजिटल रूप से पुस्तकालय तक पहुंच बनाई है।





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