लम्पी वायरस रोग और गुजरात मॉडलः एक सफल आयोजन, तैयारी और समुचित कार्रवाई का उदाहरण

Raghavji Patel
एलएसडी एक इलाज योग्य बीमारी है और यदि संक्रमण के प्रारंभिक चरण में ही उपचार किया जाए, तो पशु शीघ्र ही स्वस्थ हो जाता है। एलएसडी से ग्रसित होने के बाद पशुओं में दूसरे या तीसरे दिन से लक्षण नजर आने लगते हैं और यदि तत्काल उपचार प्रदान किया जाए, तो पशु एकाध सप्ताह में स्वस्थ हो सकता है।

ओमिक्रोन की लहर शुरू होने के चंद महीनों के बाद ही गुजरात में एक और संक्रामक रोग का प्रकोप फैल गया है। इस बार राज्य का पशुधन लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) यानी लम्पी चर्म रोग वायरस से प्रभावित हुआ है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने वायरस का मूल अफ्रीका को बताया है। यह पाकिस्तान के रास्ते भारत में आया है। यह वायरस सौराष्ट्र में हुई भारी वर्षा के दौरान यहां फैला है। ऐसे मौसम में मवेशी वायरल बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

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हालांकि, एलएसडी एक इलाज योग्य बीमारी है और यदि संक्रमण के प्रारंभिक चरण में ही उपचार किया जाए, तो पशु शीघ्र ही स्वस्थ हो जाता है। एलएसडी से ग्रसित होने के बाद पशुओं में दूसरे या तीसरे दिन से लक्षण नजर आने लगते हैं और यदि तत्काल उपचार प्रदान किया जाए, तो पशु एकाध सप्ताह में स्वस्थ हो सकता है। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने इस संक्रामक रोग को खत्म करने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू करते हुए इसे फैलने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने इस रोग से प्रभावित गांवों के आसपास के 5 किलोमीटर के क्षेत्रों में प्रभावित पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण करने के तत्काल निर्देश दिए। उन्होंने गहन सर्वेक्षण, उपचार और टीकाकरण के लिए 222 वेटरनरी अधिकारियों और 713 पशुधन निरीक्षकों को नियुक्त किया है। जामनगर, देवभूमि द्वारका और बनासकांठा जिलों में फिलहाल राज्य के वेटरनरी कॉलेजों के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी और शिक्षकों सहित कुल 107 सदस्य कार्यरत हैं। कच्छ में टीकाकरण के कार्य में मदद के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय के 175 लोगों को भी भेजा गया है।

कृषि, पशुपालन और गौ संवर्धन मंत्री श्री राघवजी पटेल ने कहा कि, “पशुपालकों को व्यापक पैमाने पर प्रभावित होने से बचाने के लिए मेरा विभाग अभी पूरी मुस्तैदी के साथ कार्यरत है। मुख्यमंत्री की देखरेख में विभाग ने युद्धस्तर पर मवेशियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया है।” उन्होंने कहा कि प्रभावित जिलों में अब तक 10 लाख 6 हजार से अधिक पशुओं को टीके की खुराक दी गई है। टीकाकरण के लिए वैक्सीन की 6 लाख से अधिक डोज उपलब्ध है। यह वायरस अभी 20 जिलों में फैला है और कच्छ इसका केंद्र है। श्री पटेल ने कहा कि राज्य सरकार 1746 गांवों में 50,000 से अधिक प्रभावित पशुओं को उपचार सुविधा मुहैया कराने में सफल रही है। वायरस के प्रसार पर काबू करने के प्रयासों के तहत पशुओं की आवाजाही पर रोक की अधिसूचना जारी की गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने कच्छ के आइसोलेशन सेंटर का दौरा कर जिला प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा की थी।

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अकेले कच्छ में ही 37,840 मवेशी वायरस से प्रभावित हुए हैं। यहां प्रभावित मवेशियों को स्वस्थ पशुओं से अलग करने के लिए जिले की 10 तहसीलों में 26 आइसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं। जिले में 58 वेटरनरी एंबुलेंस कार्यरत है। प्रभावित क्षेत्रों में 269 अतिरिक्त मोबाइल वेटरनरी क्लिनीक और करुणा एंबुलेंस का उपयोग किया जा रहा है। जिला प्रशासन बाकी बचे 3.30 पशुओं को टीका लगाने के लिए रोजाना 20 हजार पशुओं का टीकाकरण कर रहा है। वहीं, पशुपालकों को आवश्यक मार्गदर्शन देने के लिए हेल्पलाइन नं. 1962 चौबीसों घंटे, सातों दिन कार्यरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया का भी उपयोग कर रही है, ताकि इस संबंध में उठाए जा रहे कदमों को लेकर बड़े पैमाने पर लोग और विशेषकर पशुपालक जागरूक रहें। मंत्री श्री राघवजी पटेल ने किसानों और पशुपालकों से जागरूक रहने की अपील करते हुए उनसे अनुरोध किया है कि वे सरकार के प्रयासों में पर्याप्त सहयोग दें। उन्होंने कहा कि हम साथ मिलकर इस बीमारी को दूर करने में सफल होंगे।

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