Population पर Mohan Bhagwat का बड़ा बयान, बोले- देश के संतुलन के लिए जरूरी हैं 3 बच्चे

Mohan Bhagwat
ANI
एकता । Feb 8 2026 3:06PM

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताते हुए तीन बच्चों की नीति का समर्थन किया और देश की सुरक्षा के लिए नागरिकों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीडीपी ही देश की खुशहाली का एकमात्र पैमाना नहीं है और आरएसएस सरकार को पीछे से नियंत्रित नहीं करता है।

आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को देश के कई जरूरी मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि भारत को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम जनता और समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा।

परिवार को लेकर क्या सलाह दी?

जनसंख्या के मुद्दे पर मोहन भागवत ने कहा कि समाज को संतुलित रखने के लिए परिवारों में तीन बच्चों का होना जरूरी है। उन्होंने इसके पीछे पुराने अनुभवों और सेहत से जुड़े कारणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शादी सिर्फ दो लोगों का मामला नहीं है, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी भी है। भागवत जी ने आबादी के बिगड़ते संतुलन के तीन बड़े कारण बताए, जिनमें बच्चों के जन्म की दर, धर्म परिवर्तन और बाहर से आने वाले घुसपैठिए शामिल हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखे तो तुरंत पुलिस को जानकारी दें।

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सिर्फ जीडीपी से देश अमीर नहीं होता

देश की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ जीडीपी के आंकड़ों को देखकर खुश नहीं होना चाहिए। जीडीपी से सिर्फ सामान के आने-जाने का पता चलता है, लेकिन इससे यह नहीं पता चलता कि हर व्यक्ति कितना खुशहाल है। उन्होंने कहा कि हमारा रुपया तभी मजबूत होगा जब हम अपने देश में बनी चीजों की क्वालिटी और उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देंगे।

क्या आरएसएस सरकार चलाता है?

अक्सर लोग कहते हैं कि आरएसएस पर्दे के पीछे से सरकार को कंट्रोल करता है। इस पर भागवत जी ने साफ किया कि जो लोग सरकार में बैठे हैं, वही उसे चला रहे हैं। हम पीछे से बैठकर ड्राइविंग नहीं करते। हां, जब भी सरकार को देश की भलाई के लिए हमारी जरूरत होगी, हम साथ देने के लिए हमेशा तैयार हैं।

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भागवत ने लोगों से एकता की अपील

हाल ही में दिल्ली में हुए धमाके का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ पुलिस और खुफिया विभाग के भरोसे रहना ठीक नहीं है। आम नागरिकों को भी अपनी आंखें और कान खुले रखने होंगे। उन्होंने कहा कि हमें 'मुझे क्या लेना-देना' वाली सोच छोड़नी होगी। साथ ही, उन्होंने बांग्लादेश के हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि अगर दुनिया भर के हिंदू एक हो जाएं तो वे अपनी समस्याओं का हल खुद निकाल सकते हैं।

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