प्रधानमंत्री की आदर्श ग्राम योजना में मध्यप्रदेश के सांसदों को नहीं है रूचि

प्रधानमंत्री की आदर्श ग्राम योजना में मध्यप्रदेश के सांसदों को नहीं है रूचि

योजना से गांव में बुनियादी सुविधाओं के साथ खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग, रोजगार आदि पर ध्यान दिया जाना है। इसमें तीन बातों पर जोर दिया गया है। गांव के लिए जो भी योजना बनाई जाए, वह मांग पर आधारित हो, समाज द्वारा प्रेरित हो और उसमें जनता की भागीदारी हो। योजना का मुख्य उद्देश्य सांसदों की देखरेख में चुनी गईं ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री की यह महत्वकांक्षी योजनाओं में शामिल होने के बावजूद भी सांसदों की इसमें रूचि नहीं है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 28 पर भाजपा सांसद चुने जाने के छह महिने बीत जाने के बाद भी प्रधानमंत्री की इस योजना पर किसी भी सांसद का रूचि नहीं है।

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मध्यप्रदेश में जबलपुर से एक मात्र सांसद राकेश सिंह जो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी है ने एक गाँव चुना है। जिसका प्रस्ताव उन्होनें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजा है। बाकी 28 सांसद अभी तक यह निर्णय करने में असमर्थ है कि उन्हें प्रधानमंत्री की आदर्श ग्राम योजना के लिए गाँव का चयन करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं में शामिल सांसद आदर्श ग्राम" (Member of Parliament Adarsh Gram Yojana) योजना में मध्य प्रदेश के सांसदों की रुचि नहीं दिखाई दे रही है। यही कारण है कि छह माह के कार्यकाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह को छोड़कर प्रदेश के शेष सांसद अपने ही संसदीय क्षेत्र में एक ऐसा गांव तलाश नहीं कर पाए हैं,जिसे तमाम सुविधाएं पहुंचाकर आदर्श बनाया जा सके।

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मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल का कहना है कि सिर्फ नाम देने से कोई गांव आदर्श नहीं हो जाता है। योजना के लिए केंद्र सरकार ने न तो कोई वित्तीय प्रावधान किया है और न ही सांसद अपनी निधि से अलग से राशि इन गांवों के लिए दे रहे हैं। पिछले समय में भी जो गांव आदर्श गांव के तौर पर चुने गए थे, उनमें भी कोई विशेष काम नहीं हुए हैं। राज्य सरकार अपने स्तर से प्रदेश के सभी गांवों के विकास के लिए रोड मेप तैयार कर रही है। वित्तीय उपलब्धता के हिसाब से प्राथमिकता तय कर विकास कार्य कराए जाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रत्येक सांसद को पांच गांव की जिम्मेदारी लेने को कहा है। इस बार प्रधानमंत्री ने प्रत्येक सांसद को पांच गांव गोद लेकर अपने कार्यकाल में उन्हें आदर्श ग्राम में बदलने को कहा है। यह निर्देश मई 2019 में दिए गए थे, लेकिन प्रदेश से संसद पहुँचे सांसदों की कान पर जू तक नहीं रेंग रही और प्रधानमंत्री के निर्देशों का असर देखने को नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अभी तक मात्र एक सांसद राकेश सिंह का प्रस्ताव पहुंचा। इसके अलावा किसी भी सांसद ने अभी तक विभाग को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है। जबकि मध्य प्रदेश की 29 संसदीय सीटों में से 28 सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी जीते हैं। सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने जबलपुर के ग्राम घाना को आदर्श ग्राम बनाने के लिए चुना है।

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अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के सांसदों से अपने संसदीय क्षेत्र में एक गांव चुनने और उन्हें तकनीकी, सांस्कृतिक रूप से आदर्श बनाने के निर्देश दिए थे। इस बार प्रधानमंत्री ने प्रत्येक सांसद को पांच गांव गोद लेकर अपने कार्यकाल में उन्हें आदर्श ग्राम में बदलने को कहा है। योजना से गांव में बुनियादी सुविधाओं के साथ खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग, रोजगार आदि पर ध्यान दिया जाना है। इसमें तीन बातों पर जोर दिया गया है। गांव के लिए जो भी योजना बनाई जाए, वह मांग पर आधारित हो, समाज द्वारा प्रेरित हो और उसमें जनता की भागीदारी हो। योजना का मुख्य उद्देश्य सांसदों की देखरेख में चुनी गईं ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इस योजना के तहत ग्रामों के विकास के लिए इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास योजना और मनरेगा से फंडिंग की जाती है।

यही नहीं योजना से सांसदों की बेरुखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल जिन सांसदों ने गांव गोद लिए थे। वे भी पूरी तरह से विकास कार्य नहीं करा सके। जबकि उन्हें दो साल में गांव को पूरी तरह से तस्वीर बदलना थी।





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