नाना पटोले का तीखा हमला, ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा का मोर्चा सिर्फ एक नौटंकी

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सत्ता की लालसा से ग्रस्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने लोगों को श्मशान भूमि भेजने जैसी अहंकारी भाषा का इस्तेमाल किया। ऐसी भाषा का इस्तेमाल सिर्फ भाजपा वाले ही कर सकते हैं। पटोले ने कहा कि जब साल 2017 में ओबीसी आरक्षण खत्म होने लगा तब फडणवीस सरकार ने नागपुर जिला परिषद का चुनाव एक साधारण सर्कुलर जारी कर स्थगित कर दिया।

ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के लिए मंत्रालय पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)  का मोर्चा महज एक नौटंकी से ज्यादा और कुछ नहीं है। भाजपा पर यह तीखा हमला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने किया है। उन्होंने कहा कि जब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दौरान ओबीसी का राजनीतिक आरक्षण खत्म होने के कगार पर था, तब केंद्र की भाजपा सरकार ने इसका समर्थन किया था। यह एक खुला सच है। इसलिए भाजपा को ओबीसी आरक्षण पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। पटोले ने कहा कि देश में आरक्षण खत्म करना भाजपा और उसके मूल संगठन आरएसएस का एजेंडा है और मंत्रालय पर भाजपा का मोर्चा महज एक दिखावा से ज्यादा कुछ नहीं है ।उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नेता चाहते हैं कि ओबीसी को आरक्षण मिले तो उन्हें दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने मोर्चा निकालना चाहिए।

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इस संबंध में आगे बोलते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि मोर्चा के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए बयान बेहद हास्यास्पद और बचकाने थे। सत्ता की लालसा से ग्रस्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने लोगों को श्मशान भूमि भेजने जैसी अहंकारी भाषा का इस्तेमाल किया। ऐसी भाषा का इस्तेमाल सिर्फ भाजपा वाले ही कर सकते हैं। पटोले ने कहा कि जब साल  2017 में ओबीसी आरक्षण खत्म होने लगा तब फडणवीस सरकार ने नागपुर जिला परिषद का चुनाव एक साधारण सर्कुलर जारी कर स्थगित कर दिया। जब इस मामले ने तूल पकड़ लिया तो कोर्ट में जाने के दौरान फडणवीस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को बचाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। फडणवीस सरकार पांच साल से सो रही है और अब ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। 

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नाना पटोले ने कहा कि ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के बिना चुनाव न कराना कांग्रेस पार्टी की भूमिका है और इसके लिए महाविकास आघाड़ी सरकार भी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि  जब मैं विधानसभा का अध्यक्ष था तो मैंने व्यक्तिगत रूप से एक प्रस्ताव पारित किया था कि जाति के आधार पर जनगणना की जानी चाहिए। जातिवार जनगणना होगी तो इस तरह के विवाद नहीं उठेंगे, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार इस पर फैसला नहीं ले रही है। ओबीसी आरक्षण की आज की स्थिति के लिए सिर्फ भाजपा जिम्मेदार है। भाजपा वहीँ पार्टी है जिसने पहली कैबिनेट बैठक में धनगर समुदाय को आरक्षण देने का वादा किया और फिर उन्हें पांच साल तक लटकाए रखा । भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों की भूमिका ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण को फिर से हासिल करने की है । नाना पटोले ने कहा कि भाजपा ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण की असली हत्यारा है और अब आंदोलन कर घड़ियाली आंसू बहा रही है लेकिन राज्य की जनता पूरी सच्चाई को समझ रही है।

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