फिर से पीएम मैटेरियल बनने जा रहे नीतीश कुमार!

By अभिनय आकाश | Publish Date: May 10 2019 10:51AM
फिर से पीएम मैटेरियल बनने जा रहे नीतीश कुमार!
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बलियावी ने कहा है की बिहार में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर नहीं बल्कि नीतीश कुमार के चेहरे और काम पर वोट मिल रहा है। यही नहीं बलियावी ने ये भी कह दिया की 23 मई के बाद राजग को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सकती है व अगर राजग को सरकार बनानी है तो नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना होगा।

पटना। एक ही तीर पर कैसे रुकूं मैं, आज लहरों में निमंत्रण है। हरिवंश राय बच्चन की इस काव्य रचना को 1974 में जब जेपी ने पटना के गांधी मैदान से दोहराया था तो इसके अक्षरों ने दिल्ली के तख्त पर बैठे हुक्मरानों को भी सिंहासन खाली करने पर मजबूर कर दिया था। एक नाम एक कहानी में तब्दील हो जाती है तो फिर कहानी बन जाती है। कुछ कहानी कुछ सेकेंड जीती है तो कुछ मिनट, कुछ कहानी कुछ दिन याद रहती है तो कुछ वर्षों। ऐसी ही एक कहानी बिहार से निकल कर सामने आई है। जदयू वाले नीतीश कुमार में फिर से देखने लगे हैं पीएम मैटेरियल। एक बार जो पीएम मैटेरियल हो जाता है हमेशा के लिए बना रहता है। चुनाव से पहले बिहार में बड़ा खेल होने के संकेत हैं। जदयू नेता के बयान से हड़कंप मच गया। जदयू नेता और एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बिहार में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर नहीं बल्कि हमारे नेता नीतीश कुमार के चेहरे पर ही वोट मिल रहा है। उन्होंने अपने दिए एक बयान में कहा है कि अगर राजग की सरकार बनानी है तो नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना होगा। तभी राजग की सरकार बनेगी।

भाजपा को जिताए

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गुलाम रसूल बलियावी के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में खलबली मच गयी है। भाजपा के विधायक जहां जदयू के विधायक पर भड़क गए हैं वहीं महागठबंधन के नेता इस पूरे बयान पर चुटकी ले रहे हैं। भाजपा ने इसपर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कश्मीर से कन्यकुमारी तक मोदी जी के काम और नाम पर वोट मिल रहा है। जिस तरह सूरज का उगना तय है उसी तरह मोदी जी का पीएम बनना तय है। वहीं महागठबंधन के नेता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "अब भाजपा ही बताए कि उनके गठबंधन में कौन प्रधानमंत्री पद का चेहरा है। नीतीश कुमार भाजपा की पीठ में छुरा घोंपने को तैयार बैठे हैं।"

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बता दें की बलियावी ने कहा है की बिहार में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर नहीं बल्कि नीतीश कुमार के चेहरे और काम पर वोट मिल रहा है। यही नहीं बलियावी ने ये भी कह दिया की 23 मई के बाद राजग को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सकती है व अगर राजग को सरकार बनानी है तो नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना होगा। गुलाम रसूल बलियावी का बयान उस वक़्त आया है जब बिहार में लोकसभा चुनाव के दो अहम चरण बाकी हैं। माना जा रहा है बलियावी का बयान बिहार में नीतीश कुमार के भाजपा के साथ होने से जो जदयू के कोर वोटर छिटक रहे हैं उनको साधने के लिए दिया गया है। बिहार में दो चरण में 16 सीटों पर मतदान शेष है। मुस्लिम वोटर जो जदयू से छिटक रहे थे उन्हें जोड़ने का एक प्रयास है। अगर नीतीश का चेहरा आगे होगा तो वोटर नीतीश के चेहरे पर वोट करेंगे। 

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कौन हैं बलियावी 

गुलाम रसूल बलियावी नेता नहीं, धर्म प्रचारक हैं। उनकी राजनीतिक शुरुआत लोजपा के साथ हुई। लोजपा की सभाओं में वे पार्टी अध्यक्ष रामविलास पासवान को पीएम बनाते थे। लोजपा ने उन्हें जब कुछ नहीं बनाया तो जदयू में शामिल हो गए। जदयू ने उन्हें दो साल के लिए राज्यसभा में भेजा। फिलहाल विधान परिषद के सदस्य हैं। परिषद में तीन साल का कार्यकाल बचा हुआ है। 

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साल 2013 में जब नरेंद्र मोदी का नाम भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए तय किया था तब जदयू और खुद नीतीश ने खुद को पीएम मैटेरियल बताया था। बाद में जब महागठबंधन का निर्माण हुआ तो नीतीश कुमार जदयू के साथ उसका एक हिस्सा थे। नीतीश को ही तब महागठबंधन का सबसे बड़ा चेहरा या पीएम कैंडिडेट माना जा रहा था। नीतीश कुमार सत्ता में रहने के लिए जाने जाते हैं विपक्ष में बैठना उनकी आदत नहीं। ऐसे में यह भी चर्चा आम है कि प्रशांत किशोर की तैयारी है की भाजपा को बहुमत न मिलने की स्थिति में उन पार्टियों को लाया आया जाए जिनका वो कैंपेन कर रहे हैं। नीतीश कुमार अपनी बात मनवाने की कला बखूबी जानते हैं, जिस तरह बिहार में भाजपा को 5 सीटों का त्याग कर 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ने पर भाजपा को मजबूर किया। उसी तरह पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने व बिहार को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने जैसी मांग पूरी करवाने की शर्त के साथ वाईएसआर कांग्रेस और नीतीश के मित्र नवीन पटनायक की बीजू जनता दल को साथ लाकर राजग को सत्ता पर काबिज करवाने के खेल भी खेले जा सकते हैं। ऐसे में यह देखना दिसचस्प होगा की बिहार के सियासी चौसर पर कौन बाजी जीतता है और किसके हिस्से में पराजय आती है ये 23 मई के बाद ही साफ होगा।

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