कोई विधर्मी भारत का राजा नहीं हो सकता, सिर्फ एक ही सनातन राजा राम : योगी आदित्यनाथ

Yogi Adityanath
ANI
रेनू तिवारी । Apr 8 2026 12:14PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि भारत का असली राजा कोई बाहरी या विधर्मी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भारत के एक ही राजा हैं – सनातन राजा राम और राम के अलावा कोई और नहीं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को वृंदावन के मलूक पीठ में आयोजित 'श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव' को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया। संत मलूक दास जी महाराज की 452वीं जयंती के अवसर पर सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का असली राजा कोई बाहरी या विधर्मी नहीं हो सकता; भारत के एकमात्र राजा सनातन राजा राम हैं।

मुख्यमंत्री ने मुगल काल की क्रूरता और उस समय के संतों के संघर्ष को याद करते हुए कहा: उन्होंने बताया कि मुगल सम्राट अकबर ने लोभ-लालच देकर गोस्वामी तुलसीदास को अपने दरबार में बुलाने की कोशिश की थी। लेकिन तुलसीदास जी ने दो-टूक जवाब दिया था कि उनका राजा केवल राम है। सीएम ने कहा कि संत मलूक दास ने अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब जैसे चार क्रूर मुगल सम्राटों का दौर देखा, लेकिन उन्होंने कभी अपने मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से समझौता नहीं किया।

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योगी ने कहा कि आज भी रामलीला के मंचों से यही नारा सुनाई देता है – “बोलो राजा रामचंद्र की जय” और यह नारा मुगल काल में संत तुलसीदास ने ही दिया था। मुख्यमंत्री ने संत मलूक दास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके समय भारत विदेशी आक्रांताओं की क्रूरता से जूझ रहा था।

उन्होंने कहा कि 452 वर्ष पहले प्रयागराज के कड़ाधाम में उन्होंने भक्ति की दिव्य ज्योति प्रकट की, जो राष्ट्रवाद और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बनी। योगी ने कहा कि संत मलूक दास ने भारत की वैष्णव रामानंदी परंपरा को आगे बढ़ाया और मुगल काल के चार सम्राटों – अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब – के समय की क्रूरता देखी। उन्होंने कहा कि भारत के संतों ने कभी भी अपने मूल्यों और आदर्शों से समझौता नहीं किया तथा वही जागृत चेतना आज के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भारत की नींव है।

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योगी आदित्यनाथ ने संतों की उपस्थिति में सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। रामनगरी का उदाहरण देते हुए उन्‍होंने कहा कि 2017 के पहले अयोध्या में तीन घंटे बिजली मिलती थी तथा जय श्रीराम बोलने पर लड्डू नहीं, डंडे-लाठियां मिलती थीं, गलियां संकरी थीं और भवन जर्जर, लेकिन आज अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण कराती है। योगी ने कहा कि जब पूज्य संत एक मंच पर आए, एक स्वर में बोले तब 500 वर्ष का कलंक मिट गया और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो गया। उन्‍होंने कहा कि जब संतों की एकता में इतनी शक्ति है तो सभी सनातनी एकजुट होकर ताकत का अहसास कराना प्रारंभ कर दें तो कोई भी विधर्मी और विधर्मी की आड़ में उनकी जूठन खाकर हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का बाल बांका भी नहीं कर पाएंगे।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार श्रीमलूकपीठ आश्रम में मुख्यमंत्री ने दर्शन-पूजन किया, फिर गोपूजन कर गायों को गुड़ खिलाया। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने 84 कोसी परिक्रमा के लिए पैसा दिया। हमने प्रशासन से कहा कि टू-लेन सड़क, सराय, धर्मशाला बनाओ और यात्रा प्रारंभ कराओ। 67 तीर्थों व 19 कूपों से कब्जे हटवाए।‘‘ मुख्‍यमंत्री ने कहा कि संत रामानंदाचार्य ने अलग-अलग जाति के महापुरुषों को शिष्य बनाया तथा संत रैदास, कबीर उन्हीं के शिष्य हैं। उन्होंने कहा कि इसी परंपरा की 22वीं पीढ़ी में जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज का अविर्भाव हुआ और इस परंपरा ने पंथ, संप्रदाय के बारे में नहीं, बल्कि भारत और सनातन धर्म के बारे में सोचा, तब भारत झंझावतों से मुक्त हो पाया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में काशी विश्वनाथ धाम दिव्य बन गया है।

उन्होंने कहा कि 1916 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में आए थे तो उनके मन में काशी की महिमा का दर्शन करने का भाव आया, तब उन्होंने यहां की दुर्दशा का जिक्र किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने पर जब ‘‘मैं काशी गया तो उस समय भी एक साथ 50 लोग दर्शन नहीं कर सकते थे। गली संकरी थी, लेकिन आज एक साथ 50 हजार श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं।’’

इस दौरान मलूक पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज, संत बलराम दास देवाचार्य जी महाराज, संत फूलडोल बिहारी दास जी, राम वृषपाल दास जी, किशोर देवदास देव जी, रसिक माधव दास जी, किशोर देवदास जी, मदन मोहन दास जी, रसिया बाबा जी महाराज, महंत रामलखन दास जी, कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, राज्यसभा सदस्‍य घनश्याम तिवाड़ी आदि मौजूद रहे।

यह खबर पीटीआई भाषा द्वारा प्रसारित की गयी है लेखक ने बस मामूली शाब्दिक और व्याकरण से संबंधित बदलाव किए हैं- 

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