केरल के स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी पर रामचंद्रन कायम, बोले- माफी मांगने का सवाल नहीं

Mullappally Ramachandran
बयान पर विवाद छिड़ने के एक दिन बाद रामचंद्रन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने जो कहा है वह सही है। मैं अपने शब्दों पर कायम हूं और किसी का अपमान नहीं किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं माफी मांगने नहीं जा रहा। ऐसा कुछ नहीं करने जा रहा।’’

तिरूवनंतपुरम। केरल कांग्रेस के प्रमुख मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा के खिलाफ अपनी टिप्पणी पर शनिवार को कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं और माफी मांगने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि शैलजा ‘‘कोविड रानी’’ का तमगा हासिल करने का प्रयास कर रही हैं। केपीसीसी अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि निपाह वायरस फैलने के दौरान शैलजा ने कोझिकोड में ‘अतिथि कलाकार’ के तौर पर डेरा डाला था और ‘निपाह राजकुमारी’ बनने के प्रयास में थीं। माकपा ने बयान को लिंगभेदी बताया था और उनसे बिना शर्त माफी मांगने के लिए कहा था। 

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बयान पर विवाद छिड़ने के एक दिन बाद रामचंद्रन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने जो कहा है वह सही है। मैं अपने शब्दों पर कायम हूं और किसी का अपमान नहीं किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं माफी मांगने नहीं जा रहा। ऐसा कुछ नहीं करने जा रहा।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मीडिया ने उनके भाषण से कुछ शब्दों को ‘सहूलियत से ले लिया’ और उनके खिलाफ अभियान चल रहा है। उन्होंने पूछा कि उनके बयान में क्या गलत है। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस से सफलतापूर्वक निपटने का श्रेय डॉक्टर, नर्स, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जाता है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने अतिथि गृह में केवल समीक्षा बैठक की थी और कुछ ऐसा नहीं किया जिसकी प्रशंसा की जाए। निपाह वायरस से 2018 में राज्य में 17 लोगों की मौत हो गई थी।

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इस बीच, कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने दिल्ली में कहा कि केपीसीसी अध्यक्ष ने क्या कहा, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है क्योंकि वह शनिवार की सुबह ही दिल्ली लौटे हैं। वह राजस्थान से राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एम सी जोसफिन ने भी स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ ‘महिला विरोधी’ टिप्पणी के लिए केपीसीसी अध्यक्ष की आलोचना की। टिप्पणी के विरोध में डेमोक्रेटिक विमेन्स एसोसिएशन ने वटाकारा स्थित रामचंद्रन के घर तक मार्च निकाला और उनका पुतला फूंका।

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