बुद्धदेव के पद्म भूषण सम्मान ठुकराने पर उनकी पत्नी ने कहा- वो शरीर से भले ही कमजोर हों, लेकिन फैसले लेने में पहले की तरह ही मजबूत और दृढ़संकल्प हैं

Buddhadeb Bhattacharjee
एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में पूर्व सीएम की पत्नी मीरा भट्टाचार्य ने कहा बुद्धदेव शारीरिक रूप से भले ही कमजोर हो गए हों पर निर्णय लेने में पहले की तरह ही मजबूत और दृढ़संकल्प हैं। उन्होंने यह पुरुस्कार नहीं लेने का निर्णय किया है।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और बुजुर्ग वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य ने गणतंत्र दिवस पर केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले पद्म भूषण सम्मान को लेने से इनकार कर दिया। बुद्धदेव भट्टाचार्य लंबे समय से बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों से जूझ रहे हैं। मंगलवार को देर रात जारी किए गए अपने एक बयान में बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा, पद्म भूषण पुरस्कार के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे इस बारे में किसी ने पहले नहीं बताया है। अगर मुझे पद्म भूषण पुरस्कार देने की घोषणा की गई है तो मैं इसे लेने से इनकार करता हूं।

एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में पूर्व सीएम की पत्नी मीरा भट्टाचार्य ने कहा बुद्धदेव शारीरिक रूप से भले ही कमजोर हो गए हों पर निर्णय लेने में पहले की तरह ही मजबूत और दृढ़संकल्प हैं। उन्होंने यह पुरुस्कार नहीं लेने का निर्णय किया है।आपको बता दें उनके साथ साथ मशहूर गायिका संध्या मुखर्जी तबला वादक अनिंद्य चटर्जी ने भी पद्मश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है।

बुद्धदेव के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने दोपहर को फोन पर उनको पद्मभूषण पुरस्कार दिए जाने की सूचना दी थी। उसके बाद शाम को सरकार ने घोषणा कर दी। लेकिन पूर्व सीएम को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलते ही उन्होंने यह पुरुस्कार नहीं लेने का निर्णय किया। आपको बता दें पूर्व सीएम को राजनीति में उनके योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया था।

सीपीएम ने क्या कहा

बंगाल की पूर्व सीएम के बयान के बाद, सीपीएम ने भी एक बयान जारी किया। सीपीएम ने अपने बयान में कहा पद्मभूषण पुरस्कार के लिए मनोनीत कॉमरेड बुद्धदेव भट्टाचार्य ने यह पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है। सीपीएम शुरू से ही ऐसे पुरस्कार लेने से मना करती रही है। सीपीएम ने अपने बयान में कहा हमारा काम आम लोगों के लिए है अवार्ड के लिए नहीं। आपको बता दें इससे पहले ईएमएस नंबूदरीपाद ने भी अवार्ड लेने से मना कर दिया था।

पद्म पुरस्कारों के लिए जैसे ही पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य के नाम की घोषणा हुई सियासी गलियारों में यह सवाल पूछा जाने लगा था कि क्या बंगाल के आखरी वामपंथी मुख्यमंत्री पुरुस्कार लेंगे। उनके पुरस्कार लेने पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी, पूछा जाने लगा कि जो बुद्धदेव आजीवन बंगाल के लोगों को भाजपा के कथित खतरे के प्रति सचेत करते रहे उस भाजपा का दिया हुआ सम्मान क्या वह स्वीकारेंगे।लेकिन कुछ ही देर बाद बयान जारी कर इस वामपंथी नेता ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सीपीएम की सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, वामपंथी अवार्ड के लिए कभी काम नहीं करते। यूपीए सरकार के समय भी पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु को भारत रत्न देने की पेशकश की गई थी। लेकिन तब भी पार्टी ने उसे लेने से इनकार कर दिया था। बुद्धदेव भट्टाचार्य ने भी पार्टी लाइन के अनुरूप ही इस पुरस्कार को स्वीकार न करने का निर्णय किया है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बुद्धदेव के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि दिल्ली से लैंडलाइन पर आने वाले फोन पर सिर्फ पूर्व पीएम को पद्म पुरस्कार देने की बात कहकर फोन काट दिया गया। वह फोन बुद्धदेव भट्टाचार्य ने नहीं किसी और ने उठाया था। क्योंकि अस्वस्थ होने के चलते वो खुद फोन नहीं उठाते। परिवार के मुताबिक पुरस्कार के लिए नाम की घोषणा करने से पहले बुद्धदेव की सहमति नहीं ली गई।

हालांकि देर रात पीटीआई की ओर से एक खबर जारी की गई जिसमें सूत्रों के हवाले से कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से शीर्ष अधिकारी ने पूर्व सीएम के घर फोन कर उनको पद्मभूषण अवॉर्ड के बारे में जानकारी दी थी। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा की मंगलवार को फोन पर बुद्धदेव के परिवार को पद्मभूषण पुरस्कार के बारे में जानकारी दी गई थी और पद्म पुरस्कार देने के लिए सहमति लेने का कोई प्रावधान नहीं है।

 

संध्या और अनिंद्य ने भी पुरस्कार लेने से किया मना

मशहूर गायिका संध्या मुखर्जी से फोन पर उनकी सहमति मांगी गई थी। लेकिन उन्होंने भी इस पुरुस्कार पर सहमति नहीं दी। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संध्या कहती है कोई इस तरह पद्मश्री देता है? क्या उनको मेरे बारे में कोई जानकारी नहीं है? 90 साल की उम्र में मुझे पद्मश्री लेना होगा? उन्होंने कहा अब कलाकारों की कोई इज्जत नहीं बची है।

साल 1971 में जय जयंती और निशिपद्म फिल्मों में अपने गानों की वजह से राष्ट्रीय गायिका का पुरस्कार जीतने वाली संध्या को वर्ष 2011 में सरकार ने बंग विभूषण पुरुस्कार से सम्मानित किया था। तबला वादक पंडित अनिंद्य चटर्जी ने भी पद्मश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है। एक स्थानीय टीवी चैनल से बातचीत में उनका कहना था अब इस उम्र (67) में पद्मश्री मिलना सम्मानजनक नहीं है। उन्होंने कहा मुझे यह बहुत पहले ही मिलना चाहिए था। 

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